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नीरज चोपड़ा: आर्थिक तंगी के बावजूद किसान के बेटे ने जिद से जीता जहां

News18Hindi
Updated: August 27, 2018, 11:36 PM IST

हरियाणा के पानीपत के एक किसान बेटे नीरज चोपड़ा ने एशियाई खेलों में गोल्‍ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.

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  • Last Updated: August 27, 2018, 11:36 PM IST
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भारतीय खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए 18वें एशियाई खेलों में पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्‍पर्धा में गोल्‍ड मेडल अपने नाम किया. उन्‍होंने अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.06 मीटर की फेंकी और मेडल पर कब्जा जमाया. नीरज ने यह मेडल पांच में से दो प्रयासों में विफलता के बाद हासिल किया. यह भारत के लिए एशियाई खेलों के इतिहास में जेवलिन में पहला पहला गोल्‍ड मेडल है. जबकि मौजूदा एशियाई खेलोंं में यह भारत के लिए 8वां गोल्‍ड मेडल है. 24 दिसंबर, 1997 को पानीपत में जन्‍मे नीरज से पहले जेवलिन थ्रो में भारत के लिए सिर्फ एक मेडल आया था. यह मेडल 1982 एशियाई खेलों में भारत के गुरतेज सिंह ने ब्रॉन्‍ज के रूप में जीता था.

बहरहाल,एशियाई खेलोंं में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले 20 साल के नीरज चोपड़ा का यह सफर कतई आसान नहीं रहा है. यह खुद-ब-खुद में संघर्ष और संकल्प की एक अद्भुत कहानी है. हरियाणा के पानीपत के एक छोटे से गांव खांद्रा के किसान सतीश कुमार के बेटे नीरज एक समय पर उस खेल का नाम तक नहीं जानते थे,जिसमें उन्होंने आज इतिहास रच दिया है.

खेल कूद के शौकीन नीरज चोपड़ा दोस्तों के साथ घूमते फिरते एक दिन पानीपत के शिवाजी स्टेडियम जा पहुंचे. वहां अपने कुछ सीनियर्स को जेवलिन थ्रो करते हुए देख, खुद ने भी भाला थाम लिया. पहली बार जेवलिन थ्रो करने वाले नीरज को उस दिन लगा कि यह खेल उनके लिए जिंदगी है. वह इसमें आगे बढ़ने के बारे में सोचने लगे, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे ज्यादातर बच्चों के ख्वाब तो उनकी आंखों में ही मर जाते हैं.

यूं किया आर्थिक तंगी का सामना

नीरज के लिए भी यह बहुत आसान तो नहीं था. वह जानते थे कि एक ज्वांइट परिवार में किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा खर्च नहीं किया जा सकता. घर के आर्थिक हालात भी उनसे छिपे नहीं थे, लेकिन इन सब पहलुओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने भाला थाम लिया. सच कहा जाए तो जेवलिन की कीमत डेढ़ लाख रुपये थी, लेकिन इस युवा ने हौसला नहीं खोया. पिता सतीश कुमार व चाचा भीम सिंह चोपड़ा से सात हजार रुपये लेकर सस्ता जेवलिन खरीदा और हर दिन आठ घंटे अभ्यास किया. नीरज के पिता जहां खेती करते हैं, वहीं उनकी माता ग्रहणी हैं. नीरज के परिवार की खास बात यह है कि उनके पिता चार भाई हैं और उनका 17 सदस्यों का संयुक्त परिवार है.यकीनन अपनी प्राकृतिक ताकत के बूते पहले राष्ट्रीय स्तर पर कई मुकाबले जीते तो फिर महज 18 साल की उम्र में अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना और अपने देश का नाम दर्ज करवा दिया.

यू ट्यूब को बनाया गुरु
नीरज के जेवलिन थ्रो में रिकॉर्ड रचने के बाद भारतीय जेवलिन थ्रो के कोच गैरी कॉलवर्ट्स ने संघ से विवाद के चलते अप्रैल 2017 में इस्तीफा दे दिया था. गैरी के जाने के बाद भारतीय जेवलिन थ्रो टीम के पास कई महीनों तक कोई कोच नहीं था. गैरी की ही कोचिंग में नीरज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया था. उनके जाने के बाद नीरज नें यू-ट्यूब का सहारा लेते हुए अपनी ट्रेनिंग जारी रखी. हालांकि इस दौरान वह लंदन विश्व चैंपियनशिप में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे.खराब प्रदर्शन से जूझ रहे नीरज ने फिर तीन महीने जर्मनी में ट्रेनिंग ली. जिसके बाद भारत वापिस आ कर कोच ओवे होम की निगरानी में कोचिंग की. फिर कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में पहली बार हिस्सा लेने पहुंचे. कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज से लोगों को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद तो थी लेकिन उस उम्मीद को मेडल में तब्दील खुद उन्होंने किया. नीरज ने गोल्‍ड मेडल जीता था.

नीरज का जेवलिन थ्रो सफर
वैसे इस युवा को 13 साल की उम्र में पूर्व जेवलिन थ्रो खिलाड़ी जयवीर सिंह ने साल 2011 में वालीबॉल टूर्नामेंट के दौरान देखा था, जहां वह नीरज की क्षतमा से खासे प्रभावित हुए थे. इसके बाद उन्‍होंने इस युवा को जेवलिन थ्रो में करियर बनाने के लिए राजी कर लिया. इसके बाद उन्‍होंने 2012 में नेशनल जूनियर चैंपियनशिप( अंडर-16) में गोल्‍ड मेडल जीतकर अपना परचम लहरा दिया. जबकि इस वक्‍त उनकी उम्र सिर्फ 14 साल थी. साल 2013 नेशनल यूथ चैंपियनशिप में सिल्‍वर जीतकर अपना फिर दम दिखाया.

नीरज ने 2016 विश्व जूनियर चैंपियनशिप में (86.48 मी) रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था.जबकि दोहा डायमंड लीग में नीरज ने 87.43 मीटर के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन पदक से चूक गए थे और चौथे स्थान पर रहे थे. महज 18 साल की उम्र में अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में रिकॉर्ड तोड़ते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. इसी के साथ किसी भी प्रतिस्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए. इसके बाद उन्‍होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और भारत को मेडल दिलाने के लिए हमेशा जीजान से जुटे रहे. उनका आखिरी मेडल कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2018 में गोल्‍ड मेडल के रूप में आया था.

आपको बता दें कि नीरज इस सत्र में बेहतरीन फार्म में चल रहे हैं और उन्होंने लगातार 85 मीटर की दूरी पार की है. उन्होंने मार्च में फेडरेशन कप में 85.94 मीटर भाला फेंका था और गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर के साथ गोल्‍‍‍ड मेडल हासिल किया था. दोहा में भी उन्होंने 85 मीटर की दूरी पार की और एशियाई खेलों में आने से पहले फ्रांस और फिनलैंड में क्रमश: 85.17 और 85.69 मीटर भाला फेंका था.

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First published: August 27, 2018, 7:16 PM IST
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