पीएम मोदी की शरण में भारतीय शूटर्स, NRAI ने मांगी मदद

भाषा
Updated: August 22, 2019, 11:00 PM IST
पीएम मोदी की शरण में भारतीय शूटर्स, NRAI ने मांगी मदद
कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग नहीं होगी हिस्सा

गुरुवार को पेश किए गए विश्लेषण दस्तावेजों में एनआरएआई (NRAI) प्रमुख ने पिछले साल की तरह बहिष्कार की मांग नहीं की लेकिन मोदी (Narendra Modi) से अपील की कि वो इस मुद्दे को उठाएं.

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भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) निशानेबाजी को 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) से बाहर करने का मुद्दा ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के साथ उठाए. भारत के निशानेबाजी संघ ने जोर देते हुए कहा कि निशानेबाजी को बाहर करना पूरे उप महाद्वीप के लिए खेल को पीछे ले जाने वाला कदम है.

एनआरएआई अध्यक्ष रनिंदर सिंह ने मोदी ने अपील की कि वह खेल को दोबारा कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल करने का मुद्दा ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के साथ उठाएं.

कॉमनवेल्थ गेम्स महासंघ के कार्यकारी बोर्ड ने आयोजन समिति और कॉमनवेल्थ इंग्लैंड के प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाले समीक्षा पैनल की सिफारिश के बाद भी निशानेबाजी को 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स से हटाने का फैसला किया. इस कदम की भारत में काफी आलोचना हुई और भारतीय ओलिंपिक संघ (आईओए) ने खेल को दोबारा शामिल नहीं करने पर कॉमनवेल्थ गेम्स के बहिष्कार की धमकी तक दे डाली. निशानेबाजी 1966 के अलावा प्रत्येक कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा रही है लेकिन यह इन गेम्स के कोर खेलों का हिस्सा नहीं है.

आईओए और खेल मंत्रालय को भी उठाना चाहिए मुद्दा

गुरुवार को पेश किए गए विश्लेषण दस्तावेजों में एनआरएआई प्रमुख ने पिछले साल की तरह बहिष्कार की मांग नहीं की लेकिन मोदी से अपील की कि वो इस मुद्दे को उठाएं. रनिंदर ने कहा, ‘हम एक बार फिर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ देख रहे हैं कि वो यह मुद्दा जितना जल्दी संभव हो ब्रिटेन के अपने समकक्ष बोरिस जॉनसन के साथ द्विपक्षीय तौर पर उठाएं.’

रनिंदर ने कहा कि मोदी ने इसी तरह की पहल की थी जब राज्यवर्धन सिंह राठौड़ खेल मंत्री थे. उन्होंने कहा, ‘आपने लंदन दौरे के दौरान द्विपक्षीय चर्चाओं के दौरान यह मुद्दा उठाया था और तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री (टेरेसा मे) इस मामले पर गौर करने के लिए राजी हो गई थीं.’

उन्होंने साथ ही कहा कि आईओए और खेल मंत्रालय को भी अपने समकक्षों के साथ खेल को दोबारा शामिल कराने का मुद्दा उठाना चाहिए.
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रनिंदर ने कहा कि निशानेबाजी को हटाने का भारत ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देशों बांग्लादेश और श्रीलंका पर भी बड़ा असर पड़ेगा. उन्होंने कहा, ‘भारत को ऐसी स्थिति में 24 से 27 प्रतिशत पदक गंवाने होंगे जो वह शर्तिया जीतता. श्रीलंका पर भी दीर्घकाल में इसका असर (15 प्रतिशत) पड़ेगा. निशानेबाजी के बिना बांग्लादेश अपने शत प्रतिशत पदक गंवा देगा.’

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First published: August 22, 2019, 10:09 PM IST
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