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Olympic CountDown 172 Days: 1928 में ध्यानचंद ने अपने डेब्यू टूर्नामेंट में ही भारत को दिला दिया था पहला गोल्ड मेडल

News18Hindi
Updated: February 3, 2020, 11:49 AM IST
Olympic CountDown 172 Days: 1928 में ध्यानचंद ने अपने डेब्यू टूर्नामेंट में ही भारत को दिला दिया था पहला गोल्ड मेडल
साल 1928 में जीत हासिल हासिल कर चुकी है

भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) ओलिंपिक (Olympic) में हिस्सा लेने वाली पहली गैर यूरोपीय टीम थी

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  • Last Updated: February 3, 2020, 11:49 AM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) को साल 1900 में पहला ओलिंपिक मेडल मिला जिसके बाद अगले मेडल के लिए उन्हें 28 साल का इंतजार करना पड़ा. भारत (India) को दूसरा ओलिंपिक मेडल (Olympic) और पहला गोल्ड साल 1928 में एम्स्टर्डम (Amsterdam) में हुए ओलिंपिक में हॉकी (Hockey) में मिला. भारतीय पुरुष हॉकी (Indian Men's Hockey Team) इंटनेशनल हॉकी फेडरेशन (International Hockey Federation) में शामिल होने वाली पहली गैर यूरोपीय टीम थी. टीम ने पहली बार 1928 में गोल्ड मेडल जीता और इसके बाद अगले छह सालों तक इस पर अपना वर्चस्व बनाए रखा. 13 सदस्य की भारतीय टीम (Indian Team) 10 मार्च 1928 को मुंबई (Mumbai) से लंदन (London) के लिए रवाना हुई थी. इन 13 सदस्य में ही शामिल थे हॉकी के जादूगर ध्यान चंद (Dhyanchand) जिन्होंने इन खेलों के साथ अपना डेब्यू किया था.

Dhyanchand
पांच मुकाबलों में ध्यानचंद ने 14 गोल दागे थे


भारतीय टीम का सफर
साल 1924 में हुए ओलिंपिक (Olympic) में हॉकी शामिल नहीं था, इसके बाद तमाम कोशिशों के बाद इसे साल 1928 में इसे शामिल किया गया. भारतीय टीम (Indian Team) ने इस ओलिंपिक (Olympic) में पांच मुकाबले में खेले और सभी में जीत हासिल की. टीम ने पूरे टूर्नामेंट में 29 गोल किए जबकि भारत  (India) के खिलाफ कोई गोल नहीं कर पाया. भारत (India)  का पहला मुकाबला 17 मई को ऑस्ट्रेलिया से हुआ था जिसमें उन्होंने 6-0 से जीत हासिल की थी. वहीं इसके बाद भारत  (India) का अगला मुकाबला बेल्जियम में था और भारत  (India) ने 9-0 से मात थी. इसके बाद डेनमार्क (Denmark) को 5-0 और स्विट्जरलैंड को 6-0 से हराने के बाद भारत  (India) फाइनल में पहुंचा. फाइनल  (India) में भारत ने नेदरलैंड्स (Netherlands) को 3-0 से मात देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया.

फाइनल मुकाबला
गोल्ड मेडल मुकाबले के लिए भारत  (India) का सामना मजबूत नेदरलैंड्स (Netherlands) से था. यह मुकाबला 26 मई 1928 को खेला गया था. इस मुकाबले से पहले टीम के नियमित कप्तान जयपाल सिंह (Jaipal Singh) को किसी कारण इंग्लैंड वापस जाना पड़ा था. इसके बाद फाइनल मुकाबले में टीम के उप-कप्तान एरिक पिनिगर (Eric Pinniger) ने टीम की कमान संभाली. भारत (India)  ने 3-0 से मुकाबले में जीत दर्ज की थी और पहली बार देश को गोल्ड मेडल दिलाया. फाइनल मुकाबले में भारत की ओर से तीनों गोल ध्यान चंद (Dhyanchand)  ने किए जो आने वाले समय में सबसे इस खेल के सबसे बड़े दिग्गज शामिल हुए.


स्टार खिलाड़ी
इस टूर्नामेंट में अपने खेल से सबको चौंका देने वाले ध्यान चंद (Dhyanchand)  टीम के स्टार साबित हुए. पांच मुकाबलों में ध्यानचंद (Dhyanchand)  ने 14 गोल दागे. ध्यानचंद (Dhyanchand)  एम्स्टर्डम में फैंस की पहली पसंद बन गए थे. फाइनल मुकाबले में भारत ने तीन गोल किए थे और यह तीनों गोल ध्यानचंद ने ही दागे थे. ध्यानचंद के अलावा टीम के गोलकीपर रिचर्ड जेम्स एलेन (Richard James Ellen) भी जीत के हीरो रहे जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में विरोधी टीम को गोल नहीं करने दिया. भारत के पांच मुकाबलों में कोई गोल नहीं हुआ जिसका श्रेय रिचर्ड को जाता है.

गोल्ड मेडलिस्ट टीम -

जयपाल सिंह (कप्तान) - लंदन
ब्रून एरिक - पंजाब
शौकत अली - बंगाल
रिचर्ड जे एलेन - (गोलकीपर) बंगाल
ध्यान चंद - (यूनाइटेड प्रोविंस)
माइकल ए गेटले - (दिल्ली)
विलियम जेम्स कुलेन - (यूनाइटेड प्रोविंस)
लेसली सी हामंड- (यूनाइटेड प्रोविंस)
फिरोज खान - (पंजाब)
जॉर्ज एरिक - (यूनाइटेड प्रोविंस)
रेक्स ए ओ नॉरिस - (सेंट्रल प्रोविंस)
नवाब ऑफ पटौदी - (लंदन)
माइकल इ रोक - (सेंट्रल प्रोविंस)
फ्रेडरिक एस - (यूनाइटेड प्रोविंस)
खेर सिंह - (पंजाब)
सैयद एम यूसुफ - (लंदन)
ए आर रोसर - (बंगाल)

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First published: February 3, 2020, 9:26 AM IST
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