Olympic Count down 157 Days : राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ की बंदूक से निकली चांदी ने दोगुना किया आजादी का जश्न

Olympic Count down 157 Days : राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ की बंदूक से निकली चांदी ने दोगुना किया आजादी का जश्न
राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ सिल्‍वर मेडल का जश्‍न मनाते हुए.

राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ (rajyavardhan singh rathore) ने ओलिंपिक मेडल के अलावा दुनियाभर के कई टूर्नामेंट में कुल 25 मेडल अपने नाम किए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 18, 2020, 7:51 AM IST
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नई दिल्‍ली: एथेंस ओलिंपिक 2004 (Athens Olympic 2004) में राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने निशानेबाजी में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था. यह किसी भी भारतीय का व्‍यक्तिगत स्‍पर्धा में पहला रजत पदक था. इससे पहले केडी जाधव, लिएंडर पेस और कर्णम मलेश्‍वरी ने कांस्‍य पदक जीत रखा था और राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने इस पदक को चांदी में बदला था. उन्‍होंने पुरुषों के डबल ट्रैप इवेंट में रजत पदक जीता था. उन्‍होंने 17 अगस्‍त 2004 को रजत जीता था. स्‍वतंत्रता दिवस का जश्‍न मना रहे देश को जब उनकी कामयाबी का पता चला तो खुशी दोगुनी हो गई.

2004 के एथेंस ओलिंपिक में राठौड़ ने न केवल भारत का पदक सूखा समाप्‍त किया बल्कि यह उस टूर्नामेंट में भारत का इकलौता पदक रहा. इन खेलों में सानामाचा चानू, कुंजारानी, अभिनव बिंद्रा और सुमा शिरुर जैसे खिलाड़ियों ने अच्‍छा प्रदर्शन किया लेकिन ये सभी फाइनल में पदक से दूर रह गए थे.

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राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ निशानेबाजी में ओलिपिंक मेडल जीतने वाले पहले भारतीय हैं.




क्‍या है डबल ट्रेप



यह‍ निशानेबाजी की एक स्‍पर्धा है. इसमें निशानेबाज को एक सेकंड में हवा में जा रहे दो टारगेट पर निशाना लगाना होता है. जितने टारगेट पर निशाना लगता है उनके पॉइंट काउंट होते हैं. राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने ओलिंपिक मेडल के अलावा दुनियाभर के कई टूर्नामेंट में कुल 25 मेडल अपने नाम किए. एथेंस ओलिंपिक से 2 साल पहले मैनचेस्‍टर कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2002 में उन्‍होंने इन खेलों का रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्‍ड मेडल जीता था. उन्‍होंने 200 में से 192 निशाने लगाए थे. यह रिकॉर्ड आज भी बरकरार है.

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राज्यवर्धन राठौड़ ने 32 साल की उम्र में ओलिंपिक पदक जीता था. (फाइल फोटो)


कॉमनवेल्‍थ गेम्स में जीते चार पदक
कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में राज्‍यवर्धन राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने कुल 4 पदक जीते थे. दो मैनचेस्‍टर और दो मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में. चिली के नाम से मशहूर राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ ने 28 साल की उम्र में निशानेबाजी शुरू की. इस उम्र में अक्‍सर लोग निशानेबाजी छोड़ देते हैं. जब वे महू में सेना की मार्क्समैन यूनिट में तैनात थे तब उन्‍होंने निशानेबाजी पर काम किया. इसके बाद इस खेल को पूरा समय देने के लिए उन्‍होंने दिल्‍ली पोस्टिंग ले ली. निशानेबाजी के लिए उन्होंने प्रमोशन की चिंता भी नहीं की. राठौड़ ने 32 साल की उम्र में ओलिंपिक मेडल जीता था.

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राज्यवर्धन राठौड़ एथेंस ओलिंपिक में पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय थे. (फाइल फोटो)


आतंकवाद रोधी अभियानों में शामिल रहे...
निशानेबाजी को चुनने से पहले राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) कश्‍मीर में तैनात रहे और यहां पर आतंकवाद रोधी अभियानों में शामिल रहे. हंदवाड़ा में 9 ग्रेनेडिएर्स के साथ राठौड़ की बटालियन को एक्‍सीलेंस का सम्‍मान भी मिला था. उनकी पत्‍नी गायत्री राठौड़ सेना में डॉक्‍टर रह चुकी हैं. वहीं राठौड़ के पिता भी फौज से रिटायर हैं. राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ अभी लोकसभा सांसद हैं. वे लगातार दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर जयपुर ग्रामीण से जीते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे खेलमंत्री भी रह चुके हैं.

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