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नेशनल चैंपियन रित्विक भट्टाचार्य ने खोली अपनी अकादमी, आदिवासी बच्चों को कर रहे हैं ट्रेन

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Updated: October 16, 2019, 10:39 PM IST
नेशनल चैंपियन रित्विक भट्टाचार्य ने खोली अपनी अकादमी,  आदिवासी बच्चों को कर रहे हैं ट्रेन
रित्विक भट्टाचार्य की अकादमी मोकाशी में है

पांच बार के राष्ट्रीय चैंपियन रित्विक (Ritwik Bhattacharya) की अकादमी मुंबई (Mmubai) से लगभग 70 किमी दूर मोकाशी (Mokashi) गांव में है

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  • Last Updated: October 16, 2019, 10:39 PM IST
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पूर्व राष्ट्रीय स्क्वाश चैंपियन रित्विक भट्टाचार्य (Ritwik Bhattacharya) मुंबई (Mumbai) के समीप अपनी अकादमी में आदिवासी बच्चों (Tribal Children) को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

पांच बार के राष्ट्रीय चैंपियन रित्विक (Ritwik Bhattacharya) की अकादमी मुंबई (Mmubai) से लगभग 70 किमी दूर मोकाशी (Mokashi) गांव में है और अकादमी में ट्रेनिंग लेने वाले बच्चे गुरुवार से चेन्नई में शुरू हो रही जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप (Junior National Championship) में हिस्सा लेंगे. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार रित्विक की स्क्वाश टैंपल एवं रीयल ट्रेनिंग (स्टार्ट) में मोकाशी गांव और इसके आसपास के 150 से अधिक बच्चे ट्रेनिंग ले रहे हैं.

विज्ञप्ति के अनुसार यह पहली बार होगा जब आदिवासी परिवारों से संबंध रखने वाले उनके कुछ प्रशिक्षु विमान में सफर करेंगे और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे.

गांव के कई बच्चे पिछले साल की तरह जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे. इस खेल से जुड़ने वाले गांव के शुरुआती बच्चों में शामिल बिजाली दरवाड़ा ने इस साल राष्ट्रीय सीनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंचे थे.

2017 में की START की शुरुआत

रित्विक ने साल 2015 में पहली बार मोकाशी में आए थे जब उन्होंने यह जमीन खरीदी थी. उस समय वहां केवल एक छोटा सा कमरा और बाथरूम था. रित्विक उस समय ज्यादातर समय गांव में बिताते थे. इसके बाद साल 2017 में उन्होंने स्कावैश टेंपल और रियल ट्रेनिंग (START) की शुरुआत की.

मोकाशी में बने इस स्टार्ट में वह ना सिर्फ युवा खिलाड़ियों को खेल से जोड़ते नहीं है बल्कि पूरी तरह ट्रेन करते हैं. गर्मियों के ब्रेक के समय के जूनियर चैंपियन ट्रेनिंग के लिए मोकाशी आते हैं. रित्विक के मुताबिक माता-पिता बच्चों को कैंप में छोड़कर चले जाते हैं जिसके बाद बच्चों को खुद का ख्याल रखना होता है. सिर्फ बाहर से ही नहीं रित्विक के इस कैंप में गांव के बच्चे भी शामिल है. शुरुआत में गांव के बच्चों को इस खेल में दिलचस्पी थी जिसके बाद 11 बच्चों को रित्विक ने कैंप का हिस्सा बनाया जिसकी संख्या अब बढ़ चुकी है. रित्विक के मुताबिक बाहर से आए खिलाड़ी गांव के बच्चों को बहुत कुछ सिखाते हैं और उनसे सीखते भी हैं.
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First published: October 16, 2019, 10:39 PM IST
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