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Role Model:6 साल की उम्र में सपनों के पीछे दौड़ पड़ीं दीपा, सपाट पैरों ने रोकी राह, फिर ओलिंपिक में रचा इतिहास

Role Model:6 साल की उम्र में सपनों के पीछे दौड़ पड़ीं दीपा, सपाट पैरों ने रोकी राह, फिर ओलिंपिक में रचा इतिहास

दीपा करमाकर ने रियो ओलिंपिक में अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया था.

दीपा करमाकर ने रियो ओलिंपिक में अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया था.

26 साल की दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) की कहानी फिल्मी नहीं है. मगर जब आप उनकी जिंदगी के छोटे-छोटे हिस्सों से मिलते हैं, तो उनका संघर्ष और समर्पण देखकर हैरान रह जाते हैं.

    नई दिल्ली. जिम्नास्टिक्स... भारत में ​इस खेल को इससे पहले कभी इतना नहीं देखा गया था. साल 2016, मंच ओलिंपिक का था और मेजबानी रंगीन रियो (Rio Olympic) की. वॉल्ट (Vault) जिम्नास्टिक की स्पर्धा में सिमोन बाइल्स (Simon Biles) उतर रहीं थीं. ओलिंपिक और विश्व चैंपियन में 30 से ज्यादा पदक जीतने वाली बाइल्स. मगर ये क्या, बाइल्स से भी ज्यादा नजरें एक और प्रतिभागी पर थीं. नाम है दीपा करमाकर (Dipa Karmakar). 9 अगस्त 1993 को त्रिपुरा में जन्मीं दीपा करमाकर ओलिंपिक में कदम रखने वाली पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट थीं. मतलब 23 साल की दीपा ने इतिहास तो स्पर्धा में शामिल होकर ही रच दिया था. मगर दीपा की कहानी इससे भी ज्यादा दिलचस्प है.

    जब सिमोना बाइल्स पर भारी पड़ीं दीपा
    14 अगस्त 2016 ही वो ऐतिहासिक तारीख थी जब रियो डी जेनेरियो के जिम्नास्टिक्स सेंटर में वॉल्ट स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाली सिमोन बाइल्स (Simone Biles) से ज्यादा तालियां चौथे नंबर पर रहीं भारत की स्टार दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) के लिए बज रहीं थीं. पदक की कांटे की टक्कर में 4 फीट 11 इंच कद वाली दीपा बेहद मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं, और चौथे स्थान पर रहीं. मगर उन्होंने दिखा दिया कि उनका कद उनकी सफलता का मोहताज नहीं है. और उसी पल इस जिम्नास्टिक्स सेंटर से भारत को उसका चैंपियन मिल गया.

    6 साल की उम्र में शुरू की प्रैक्टिस
    दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) ने अभयनगर नजरुल स्मृति स्कूल में पढ़ाई की. सिर्फ छह साल की थी दीपा जब उन्होंने अपने सपनों के पीछे भागना शुरू कर दिया. यानी इसी उम्र में उन्होंने जिम्नास्टिक की प्रैक्टिस शुरू कर दी. मतलब जिस उम्र में बचपन हिलोरे मार रहा होता है उस उम्र में दीपा ने तय कर लिया था कि आखिर उन्हें जिदंगी में करना क्या है.

    सपाट पैरों ने की राह रोकने की कोशिश
    दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) ने जब जिम्नास्टिक्स की प्रैक्टिस शुरू की, तब उनके पैर सपाट थे, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता था. वो इसलिए क्योंकि इस खेल के लिए सपाट पैर सबसे बड़ी बाधा होती है. हालांकि कड़ी मेहनत और अभ्यास से उन्होंने इस कमी को बहुत जल्दी दूर कर लिया.

    77 पदक, 67 स्वर्ण
    साल 2007 के बाद से दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) ने स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में 77 पदक जीते, जिनमें से 67 गोल्ड हैं. दीपा करमाकर को साल 2016 में रियो ओलिंपिक में किए गए असाधारण प्रदर्शन की बदौलत राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान से नवाजा गया. अगले साल उन्हें पद्मश्री पुरस्कार दिया गया. साल 2017 में ही दीपा फोर्ब्स की 30 साल से कम उम्र की एशिया की सुपर अचीवर्स में शामिल किया गया.

    साल 2017 में चोटों से रहा वास्ता
    दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) को 2017 के बीच में घुटने में चोट लगी. तब वह एशियन आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप के ट्रायल की तैयारी कर रहीं थीं. उसी साल अप्रैल में लिगामेंट की सर्जरी हुई. इसके चलते दीपा को 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स से भी अपना नाम वापस लेना पड़ा. हालांकि जुलाई 2018 में उन्होंने दमदार वापसी करते हुए तुर्की में हुई एफआईजी आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स विश्व चैलेंज कप की वॉल्ट स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया. इसी के साथ दीपा बहुदेशीय प्रतियोगिता में जिम्नास्टिक्स में स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली जिम्नास्ट बनीं. 2018 एशियन गेम्स के वॉल्ट फाइनल में दीपा क्वालिफाई नहीं कर सकीं. एक बार उन्हें चोट का सामना करना पड़ा और इस बार उनका दायां घुटना चोटिल हो गया, जिसकी बाद में सर्जरी हुई.

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    Tags: Gymnastics, Sports news, Summer Olympics

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