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Role Model: युद्ध से घिरी है नोवाक की दुनिया, नाम भी शरण देने वाले पर, 20 हजार बच्चों को पढ़ाते हैं

नोवाक जोकोविच दिग्गज टेनिस खिलाड़ी हैं.

नोवाक जोकोविच दिग्गज टेनिस खिलाड़ी हैं.

सर्बिया के नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) का जीवन युद्ध से घिरा रहा है. नोवाक नाम भी उस व्यक्ति की याद में है, जिसने दूसरे विश्व युद्ध में जोकोविच परिवार का शरण दी थी. नाटो के हमले के दौरान भी उनका परिवार ढाई महीने तक बंकर में रहा.

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    नई दिल्ली. सारी दुनिया आज कोरोना वायरस से लड़ रही है. अमेरिका-इंग्लैंड  जैसी बड़ी-बड़ी ताकतें घुटने टेक रही हैं. जैसे तीसरा वर्ल्ड वार छिड़ गया हो. लोग डरे हुए हैं और घरों में कैद हैं. निराशा घर कर रही है. ऐसे में टेनिस सितारे सर्बिया (Serbia) के नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) का जीवन हमें उम्मीद बंधाता है. वे हम सबके लिए सही रोलमॉडल हो सकते हैं. वैसे तो टेनिस के इस सितारे को उसके खेल के अलावा सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए जाना जाता है. लेकिन कम लोग ही जानते होंगे, कि उनके इस ह्यूमर के भीतर कितना दर्द छिपा है. खुद नोवाक ने एक बार माना था कि युद्ध का दर्द मेरे साथ हमेशा रहेगा. हालांकि, मैंने इससे लड़ना और जीतना सीख लिया है.

    पिछले 15 साल में टेनिस जगत में जब भी राइवलरी की बात हुई होगी तो रोजर फेडरर और राफेल नडाल का नाम सबसे पहले आया होगा. इन दोनों खिलाड़ियों के मुकाबले को ही ड्रीम मुकाबला कहा गया. हालांकि, इस दौरान एक तीसरे खिलाड़ी (नोवाक) ने एंट्री मारी और फेडरर-नडाल दोनों को हराता चला गया. नोवाक का नाम फिर भी ड्रीम मुकाबले में कम ही आया. यह शायद मार्केट की डिमांड रही होगी, जो राइवलरी को त्रिकोणीय होने से रोकता रहा. लेकिन खेल के पन्नों पर एक बात साफ-साफ दर्ज है कि इस धरती पर एक ही इंसान है, जिसने रोजर और राफेल को बार-बार हराया है. सिर्फ नोवाक ही हैं, जिनका रोजर और राफेल दोनों के खिलाफ जीत-हार का रिकॉर्ड पॉजिटिव है.

    जिसने शरण दिया, उसी पर रखा नाम
    नोवाक जोकोविच की यह कहानी उनके नाम से शुरू करते हैं. नोवाक के दादा व्लादिमीर 1940 के दशक में मोंटेनेग्रो में रहते थे. दूसरे विश्वयद्ध के समय उन्हें जान बचाने के लिए एक रिश्तेदार के यहां शरण लेनी पड़ी. जिसने शरण दी, उसका नाम नोवाक था. युद्ध खत्म होने के बाद जोकोविच परिवार अपने घर लौट गया, पर वह एहसान नहीं भूला. 1987 में जब बेलग्रेद (Belgrade) में व्लादिमीर के यहां पहला पोता हुआ तो उसका नाम नोवाक रखा गया. नोवाक जोकोविच.

    4 साल की उम्र में रैकेट पकड़ा
    नोवाक का परिवार रेस्टोरेंट चलाता था. रेस्टोरेंट के सामने तीन टेनिस कोर्ट थे. वे चार साल की उम्र से ही उस कोर्ट में चले जाते. जब वे छह साल के थे, तब यूगोस्लाव की मशहूर खिलाड़ी येलेना जेन्सिच ने उन्हें देखा. वे तुरंत नोवाक के माता-पिता को ढूढ़ने लगीं. येलेना ने कहा कि उन्होंने मोनिका सेलेस के बाद पहली बार इतना प्रतिभाशाली बच्चा देखा है. अगले छह साल नोवाक उनके देखरेख में खेलते रहे.

    युद्ध ने पीछा नहीं छोड़ा
    नोवाक का जन्म बेलग्रेद में हुआ. यह वो दौरा था, जब वहां गृहयुद्ध छिड़ा हुआ था. नोवाक ने तीन साल की उम्र से बम-मिसाइल के हमले देखे. अपनों को खोया तो नहीं, लेकिन अपनों को खोते हुए बहुतों को देखा. जब वे 11 साल के थे तब नाटो ने यूगोस्लाविया पर हमला कर दिया. नोवाक का परिवार रातों-रात खुशहाल घर छोड़कर फिर एक रिश्तेदार के यहां पहुंचा, जिनके यहां बंकर था. यहां करीब 20 परिवार रह सकते थे. नोवाक का पिरवार भी यहां ढाई महीने रहा. नोवाक ने यहीं अपना 12वां जन्मदिन मनाया. नोवाक ने एक बार बताया था, लोग हैप्पी बर्थडे गा रहे थे और मुझे बम की आवाजें सुनाई दे रही थीं.

    युद्ध के बीच जर्मनी पहुंचे नोवाक
    नोवाक का खेल गृह युद्ध के साये में आगे बढ़ता रहा. वे 12 वर्ष की उम्र में ट्रेनिंग के लिए जर्मनी आ गए. करीब 14 साल की उम्र में उन्होंने टूर्नामेंट जीत लिया. नोवाक जब कोर्ट पर उतरते तो किसी लड़ाके की तरह खेलते. जैसे सामने कोई दुश्मन हो. नोवाक के इस रुख को इस बात से समझा जा सकता है. उन्होंने एक बार बताया था कि जब वे 12 साल के थे, तब उनके मन में बहुत गुस्सा था. वे बेगुनाहों के मारे जाने का बदला लेना चाहते थे. बाद में उन्होंने अपने गुस्से को खेल में उतार लिया. इसीलिए वे अंत तक हार नहीं मानते.

    फेडरर-नडाल से बस थोड़ा ही पीछे  
    32 साल के नोवाक जोकोविच सबसे अधिक ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने के मामले में अभी तीसरे नंबर पर हैं. उन्होंने 17 खिताब जीते हैं. इस मामले में 38 साल के रोजर फेडरर (20) पहले और 32 वर्षीय राफेल नडाल (19) दूसरे नंबर पर हैं.

    जो फेडरर-नडाल न कर पाए, वह नोवाक ने किया
    नोवाक जोकोविच दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी हैं. वे एटीपी रैंकिंग में 16,950 रेटिंग अंक हासिल कर चुके हैं. वे इतने अंक हासिल करने वाले दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी हैं. स्विस किंग रोजर फेडरर और स्पेनिश स्टार राफेल नडाल भी ऐसा नहीं कर सके हैं.

    नडाल-फेडरर दोनों ज्यादा मैच हारे
    नोवाक जोकोविच और राफेल नडाल के बीच अब तक 54 मुकाबले में हुए हैं. इनमें से 28 में नोवाक ने जीत दर्ज की है. राफेल नडाल के नाम 26 जीत दर्ज हैं. इसी तरह नोवाक ने फेडरर को 25 बार हराया है. फेडरर उनसे सिर्फ 22 मैच जीते.

    लगातार 4 ग्रैंडस्लैम जीता
    नोवाक एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने चारों ग्रैंडस्लैम लगातार जीते हैं. उन्होंने ऐसा 2015-16 (विंबलडन 2015, यूएस ओपन 2015, ऑस्ट्रेलियन ओपन 2016 और फ्रेंच ओपन 2016) में किया था. रोजर फेडरर या राफेल नडाल कभी भी लगातार चार ग्रैंडस्लैम नहीं जीत सके हैं.

    एनजीओ 20 हजार बच्चों को पढ़ाता है
    युद्ध की विभीषिका झेल चुके नोवाक ने गरीब और अनाथ बच्चों की मदद के लिए एनजीओ जोकोविच फाउंडेशन बनाया है. उनके एनजीओ के अच्छे काम से प्रभावित होकर वर्ल्ड बैंक ने उसे अपना पार्टनर बना लिया. अब ये दोनों मिलकर सर्बिया में 43 स्कूल चला रहे हैं, जहां 20 हजार 800 बच्चे पढ़ते हैं.

    हाइस्कूल की गर्लफ्रेंड से शादी की  
    नोवाक ने हाईस्कूल की गर्लफ्रेंड येलेना रिस्टिच से शादी की है. दोनों ने 2013 में सगाई की. एक साल बाद दोनों ने शादी कर ली. येलेना ही अब एनजीओ जोकोविच फाउंडेशन का काम मुख्यत: अब येलेना रिस्टिच ही देखती हैं.

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