30 टांके, ऑल इंग्‍लैंड जीतकर डॉक्‍टर का भुगतान, इनामी राशि दान, ऐसी हैं सायना- सिंधु के गुरु की कहानी

30 टांके, ऑल इंग्‍लैंड जीतकर डॉक्‍टर का भुगतान, इनामी राशि दान, ऐसी हैं सायना- सिंधु के गुरु की कहानी
गोपीचंद बाई के राष्ट्रीय कोच हैं

सायना नेहवाल (Saina Nehwal) और पीवी सिंधु (PV Sindhu) को बनाने वाले पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) ऑल इंग्‍लैंड चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं, मगर 2012 से पहले तक उन्‍हें देश को बैडमिंटन में ओलिंपिक मेडल ने दिलाने का मलाल रहता था

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नई दिल्‍ली. भारत को सायना नेहवाल (Saina Nehwal), पीवी सिंधु (PV Sindhu), किदांबी श्रीकांत जैसे वर्ल्‍ड क्‍लास बैडमिंटन खिलाड़ी देने वाले गुरु पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) खुद महान खिलाड़ी रह चुके हैं. मगर अपने सफल करियर के पीक पर ही संन्‍यास लेने वाले गोपीचंद ने उसके बाद अपने जैसे कई गोपीचंद भारत को दे दिए. इसके साथ ही महिला बैडमिंटन को भी बढ़ावा दिया. 16 नवंबर 1973 को आंध्र प्रदेश में जन्‍में पुलेला गोपीचंद ऑल इंग्‍लैंड चैंपियनशिप जीतने वाले प्रकाश पादुकोण के बाद दूसरे भारतीय हैं. गोपीचंद के बाद आज तक इस बड़े खिताब को कोई नहीं जीत पाया. सायना नेहवाल, पीवी सिंधु उस खिताब के करीब पहुंचीं जरूर थी, मगर वह अपने कोच की तरह उसे जीत नहीं पाई.

क्रिकेट में रूच‍ि
बैडमिंटन की दुनिया में बतौर खिलाड़ी और कोच शोहरत कमाने वाले गोपीचंद की रूचि एक समय बैडमिंटन में नहीं, बल्कि क्रिकेट में थी, मगर बड़े भाई के प्रोत्‍साहन के बाद उन्‍होंने बैडमिंटन को चुना. प्रकाश पादुकोण एकेडमी में एंट्री मिलने से पहले उन्‍होंने सैयद मोहम्‍मद आरिफ से ट्रेनिंग ली. प्रकाश पादुकोण की एकेडमी में जाने के बाद गोपीचंद का महान खिलाड़ी बनने का सफर शुरू हुआ.

दान में दी थी इनामी राशि



गोपीचंद ने 1996 में अपना पहला नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीता और इसके बाद उन्‍होंने 2000 तक लगातार पांच खिताब जीते. खिताब जीतने के साथ ही गोपीचंद ने पूरे देश का दिल भी जीता. वह अपनी इनामी राशि गुजरात भूकंप रिलीफ और कारगिल शहीद फंड में दान करते थे.



पैसा बचाता था परिवार
11 साल की उम्र में बैडमिंटन हाथ में थामने वाले गोपी के सपने को पूरा करने के लिए उनका परिवार पैसा बचाता था. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का पैसा बचाने के लिए उनकी मां कई किलोमीटर पैदल चलती थी, ताकि उन पैसों से वह अपने बेटे के लिए शटल खरीद सके. परिवार ने रेस्‍टारेंट में जाना, फिल्‍म देखना, यहां तक पारिवारिक समारोह में भी 10 साल तक जाना छोड़ दिया था. ताकि वो अपने बेटे के लिए ट्रेवल, किट आदि का इंतजाम का सके.

सात साल बाद डॉक्‍टर का उधार चुकाया
1994 में डबल्‍स का मैच खेलते हुए गोपी चोटिल हो गए थे. उनके घुटने में चोट लग गई थी. मुश्किल में आए गोपी की सर्जरी के समय 30 से अधिक टांके लगे. घुटनों के सर्जन डॉ अशोक राजगोपाल ने गोपी का मुश्किल इलाज किया. उन्‍होंने इस दौरान गोपी की मां की बात की सुनी, जो ऑपरेशन फीस भरने में आ रही मुश्किलों की बात कर रही थी. इसके बाद डॉक्‍टर ने फीस लेने से मना कर दिया और भुगतान के रूप में गोपी को देश के लिए ऑल इंग्‍लैंड चैंपियन‍शिप जीतने के लिए कहा. गोपी ने इसके सात साल बाद यानी 2001 में इस खिताब को जीतकर डॉक्‍टर का भुगतान किया.

सायना और सिंधु ने पूरा किया सपना
गोपीचंद ने 1998 कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में पुरुष टीम का सिल्‍वर और एकल का ब्रॉन्‍ज मेडल जीता था. हालांकि वो अपने करियर में ओलिंपिक मेडल जीतने से चूक गए. 2000 में ओलिंपिक में हार मिलने से उनके सपने को झटका लगा था. हालांकि इसके बाद उन्‍होंने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर अपना दम दिखाया और कुछ समय बाद कोर्ट को अलविदा कह दिया. मगर उनके मन में हमेशा ही देश को ओलिंपिक में मेडल न दिला पाने का मलाल रहा, जिसे 2012 लंदन ओलिंपिक में सायना नेहवाल ने ब्रॉन्‍ज जीतकर और 2016 रियो ओलिंपिक में पीवी सिंधु सिल्‍वर जीतकर न सिर्फ दूर किया, बल्कि एक गुरु को गुरु दक्षिणा भी दी.

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