टोक्यो से कुश्ती में गोल्ड लाकर शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं महाबली सतपाल

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) का निधन हो गया है. दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.

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Updated: July 20, 2019, 9:43 PM IST
टोक्यो से कुश्ती में गोल्ड लाकर शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं महाबली सतपाल
शिला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते हुए दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे. (twitter)
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Updated: July 20, 2019, 9:43 PM IST
 महाबली सतपाल

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का निधन ना केवल मेरे लिए बल्कि दिल्ली की खेलों की दुनिया के लिए भी अपूरणीय क्षति है. मुझे दिल्ली के शिक्षा विभाग में बतौर खेल निदेशक 15 साल उनके साथ काम करने का मौका मिला. शीला जी ने दिल्ली में हमेशा खेलों को बढ़ावा देने का काम किया जिसका नतीजा रहा कि 2008 बीजिंग ओलिंपिक में सुशील कुमार कांस्य पदक जीतने में सफल रहे और ये सिलसिला यहीं नहीं थमा. 2012 लंदन ओलिंपिक में सुशील कुमार ने रजत और योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक देश नाम किया. ये 2008 बीजिंग ओलंपिक का किस्सा है. मुझे सुशील के साथ बतौर कोच जाना था, लेकिन ऐन मौके पर मेरा नाम कट गया. मुझे दुख तो बहुत हुआ लेकिन क्या कर सकता था. तभी 15 अगस्त के समारोह में शीला जी से मुलाकात हुई. उन्होंने पूछा, सतपाल तुम बीजिंग नहीं गए. मैंने उनसे कहा, मैम किसी कारणवश मेरा नाम रह गया. इससे ज्यादा उनसे क्या कहता. उन्होंने कहा कि नहीं तुम जाओगे, मैं देखती हूं कि कितनी जल्दी ये काम किया जा सकता है. उसके बाद की कहानी तो सब जानते हैं. सुशील ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया. रेपेचेस में खिलाड़ी को गुरु के मार्गदर्शन की बेहद जरूरत होती है.'

शीला जी का लगाव केवल कुश्ती तक ही सीमित नहीं था. वह सभी खेलों में बेहतर प्रदर्शन की बात करती थीं. जब वह मुख्यमंत्री बनीं खेलों का बजट लगातार बढ़ाया जाता रहा. नतीजा ये हुआ कि दिल्ली के खिलाड़ी सभी खेलों में शानदार प्रदर्शन करने लगे. जब बजट की बात होती तो वह मुझसे कहती थी कि आप मुख्य सचिव के साथ बैठकर बात कीजिए.

शीला दीक्षित का निधन हो गया है.


कोई प्रस्ताव उन्हें समझ में नहीं आता तो वह मुझे बुला लेती थीं और फिर से बनवा कर उसे मंजूर करवा कर ही दम लेती थीं. शीला जी की वजह से जो स्कॉलरशिप 500 रुपये की थी, वो बढ़कर 5000 रुपये तक हो गई थी. दिल्ली का अच्छा प्रदर्शन रहने पर कैबिनेट के सामने बुलाकर सराहना करती थीं. मैंने कई मंत्रियों और इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ काम किया, लेकिन खेलों को लेकर शीला जी जैसा प्रेम किसी के अंदर नहीं था.'

मेरा उनसे एक अलग रिश्ता बन गया था. वह जहां भी मिलतीं बेटा कह कर बुलातीं और खेलों की तरक्की के बारे में जरूर पूछतीं. उन्होंने अपने कार्यकाल में ना केवल राजधानी दिल्ली का चेहरा बदलने का काम किया बल्कि खेलों को प्राथमिकता देने का फर्ज भी निभाया. कुछ दिन पहले वह अस्पताल से लौटीं थीं तो मैं उनसे मिलने गया था. पहली बात उन्होंने यही पूछी कि कुश्ती में क्या चल रहा है. जब मैंने बताया कि जूनियर एशियन कुश्ती में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा और दिल्ली के पहलवानों ने भी कई मेडल जीते तो वह बेहद खुश हुईं. मैंने उनसे कहा कि 2020 टोक्यो ओलंपिक में देश को कुश्ती में गोल्ड मेडल दिलाना है. यह नहीं सोचा था कि वह कुछ दिनों बाद ही नहीं रहेंगी. लेकिन 2020 टोक्यो में गोल्ड जरूर दिलाना है. ये मेरी ओर से उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी.'

(महाबली सतपाल एशियन गेम्स (1982) और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. इसके साथ ही भारत सरकार की ओर से उन्हें अर्जुन अवॉर्ड और पद्म श्री से नवाजा जा चुका है. यह लेख उनसे न्यूज18 के सचिन शंकर की  बातचीत पर आधारित है)
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First published: July 20, 2019, 6:51 PM IST
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