काॅमनवेल्‍थ गेम्स : शूटर्स के निशाने 'गायब', शीर्ष पांच में आना भी भारत के लिए हुआ मुश्किल!

काॅमनवेल्‍थ गेम्स : शूटर्स के निशाने 'गायब', शीर्ष पांच में आना भी भारत के लिए हुआ मुश्किल!
2022 में बर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को हटा दिया गया है, जिसका नुकसान भारत के पदकों की संख्या पर सबसे ज्यादा नजर आएगा

2022 में बर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को हटा दिया गया है, जिसका नुकसान भारत के पदकों की संख्या पर सबसे ज्यादा नजर आएगा

  • Last Updated: June 22, 2019, 1:18 PM IST
  • Share this:
तीन साल बाद 2022 बर्मिंघम में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स से ​शूटिंग का हट भारत के लिए सबसे बुरी खबर है. शूटिंग के हट जाने से ना सिर्फ निशानेबाजों को नुकसान हुआ है, बल्कि काफी हद तक​ मेडल टेली में भारत की रैंकिंग को भी नुकसान पहुंचा है. पिछले पांच कॉमनवेल्थ गेम्स में शीर्ष पांच में रहने वाले भारत पर अब शीर्ष 5 में भी आना भी काफी मुश्किल होता दिख रहा है.

भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में निशानेबाजी से सबसे ज्यादा पदक आते हैं. 2018 की बात करें तो 15 खेल में से निशानेबाजी में भारत के सबसे ज्यादा पदक आए और इन्हीं पदकों के दम पर भारत चौथे पायदान पर रहा.

पिछले सालों में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन



2018 गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 26 गोल्ड, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज सहित कुल 66 पदकों के साथ तीसरे पायदान पर रहा. भारत की इस बड़ी संख्या में सबसे ज्यादा योगदान शूटिंग का रहा. शूटिंग में भारत ने 7 गोल्ड, 4 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज सहित कुल 16 पदक जीते थे.
2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत पांचवें स्थान पर था. भारत ने 15 गोल्ड, 30 सिल्वर और 19 ब्रॉन्ज सहित कुल 64 पदक जीते थे. 4 गोल्ड, 9 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज सहित कुल 17 मेडल इन 64 में से निशानेबाजी से आए थे. इस कॉमनवेल्थ गेम्स में 10वें पायदान पर जमैका रहा था, जिसके 10 गोल्ड, 4 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज थे. यानी अगर निशानेबाजी के मेडल को ना गिना जाए तो भारत की स्थिति भी इसी के आस पास होगी.



2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के ऐतिहासिक रहा. दिल्ली में हुए इस गेम्स में भारत 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज सहित कुल 101 मेडल के साथ दूसरे नंबर पर आ रहा था. इतिहास में पहली बार भारत ने 100 से अधिक मेडल जीते थे. इस 100 में अब जरा निशानेबाजी का योगदान भी देख लीजिए. 14 गोल्ड, 11 सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज सहित कुल 30 मेडल आए थे.
2006 में दोहा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 22 गोल्ड, 17 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज सहित कुल 50 मेडल के साथ चौथे स्थान पर रहा था. इसमें से 16 गोल्ड अकेले शूटिंग से आए थे. वहीं सात सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल शूटिंग में भारत की संख्या में जोड़े थे. अगर इसमें से निशानेबाजी के मेडल को अलग कर तो हम केन्या के बराबर तक पहुंच जाएंगे. जो 6 गोल्ड 5 सिल्वर और सात ब्रॉन्ज के साथ 10वें पायदान पर था.

2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत चौथे पायदान पर रहा था. भारत के खाते में 30 गोल्ड, 22 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज सहित कुल 69 मेडल आए थे, जिसमें से 14 गोल्ड अकेले निशानेबाजी में थे. गोल्ड के अलावा सात सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज भी थे.

वैसे इस झटके से पहले भारत के लिए अच्छी खबर यह रही थी कि महिला क्रिकेट 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल हो सकता है. महि​ला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिहाज से यह एक अच्छा कदम है, लेकिन निशानेबाजी का हटना भारत के निशानेबाजों और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की स्थिति के लिए बड़ा नुकसान है
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज