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Sunday Special: ना फेडरेशन को था भरोसा, ना सरकार ने की मदद, अपने दम पर फवाद ने रचा इतिहास

News18Hindi
Updated: January 12, 2020, 7:40 AM IST
Sunday Special: ना फेडरेशन को था भरोसा, ना सरकार ने की मदद, अपने दम पर फवाद ने रचा इतिहास
20 साल बाद घुड़सवारी में भारत ने ओलिंपिक (Olympic) टिकट हासिल किया है. पिछली बार 2000 सिडनी ओलिंपिक (Sydney Olympic) में इस खेल में भारत ने अपनी दावेदारी पेश की थी

20 साल बाद घुड़सवारी में भारत ने ओलिंपिक (Olympic) टिकट हासिल किया है. पिछली बार 2000 सिडनी ओलिंपिक (Sydney Olympic) में इस खेल में भारत ने अपनी दावेदारी पेश की थी

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  • Last Updated: January 12, 2020, 7:40 AM IST
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भारत (India) के कई खिलाड़ी अब तक ओलिंपिक कोटा हासिल कर चुके हैं. जहां खिलाड़ी अपनी मेहनत से सरकार और फेडरेशन की मदद से ट्रेनिंग करके यह उपलब्धि हासिल की, वहीं एक ऐसा खिलाड़ी भी है जिसने अपने दम पर ना सिर्फ ओलिंपिक कोटा (Olynpic Quota) हासिल किया बल्कि 36 साल बाद इतिहास भी रच दिया. हम बात कर रहे हैं घुड़सवार फवाद मिर्जा  (Fouaad Mirza) की. एक ऐसा खिलाड़ी जिसकी ना सरकार ने मदद की, ना उसके फेडरेशन ने उसपर भरोसा दिखाया, लेकिन उसने देश को दो दशक बाद इस खेल में ऐतिहासिक कोटा दिलाया.

फवाद मिर्जा ने हासिल किया ऐतिहासिक ओलिंपिक कोटा
फवाद (Fouaad Mirza) ने 2018 एशियन गेम्‍स में भारत को 36 साल बाद इक्वेस्ट्रियन में मेडल दिलवाया ‌था. उन्होंने पिछले 36 वर्षों से व्यक्तिगत मेडल पाने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था. 20 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत ने इंडिविजुअल में ओलिंपिक कोटा हासिल किया. इसी के साथ फवाद (Fouaad Mirza) ओलिंपिक में हिस्सा लेने वाले तीसरे भारतीय होंगे. उनसे पहले भारत ने दो बार ओलिंपिक के इक्वेस्ट्रियन इवेंट में हिस्सा लिया था. 1996 में विंग कमांडर आईजे लांबा अटलांटा ओलिंपिक और 2000 में इम्तियाज अनीस में सिडनी ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था.

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फवाद मिर्जा ओलिपिक कोटा हासिल कर चुके हैं


इस साल की शुरुआत में ही फवाद के टॉप घोड़े मेडिकोट सेनियर को चोट लग गई थी. यह फवाद के लिए बड़ा झटका था लेकिन उन्होंने इसे अपने ओलिंपिक खेलने के सपने के बीच में नहीं आने दिया. उन्होंने  27 साल के फवाद (Fouaad Mirza) ने छह क्वालिफाइंग स्पर्धा से कुल 64 अंक बनाए. उन्होंने अपने पहले घोड़े फेर्नहिल फेसटाइम से 34 और दूसरे घोड़े टचिंगवुड से 30 अंक बनाए. फवाद को चीन और थाईलैंड की टीमों के क्वालिफाई करने का इंतजार करना पड़ा. दोनों टीमें पिछले इटली में क्वालिफाई कर लिया. अगर इन दोनों ही देशों ने टीम के तौर पर क्वालिफाई नहीं किया होता, तो वे व्यक्तिगत स्‍थान ले लेते और भारतीय घुड़सवार को कोटा नहीं मिल पाता.

सात पीढ़ियों से घुड़सवारी कर रहा है फवाद का परिवार
फवाद मिर्जा  (Fouaad Mirza) को बचपन से ही घुड़सवारी का शौक था. उनके परिवार की पिछली सात पीढ़ियां इस खेल जुड़ी थी. घुड़सवारी फवाद के खून में हैं. उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस खेल में हैं. फवाद अपने परिवार की सातवीं पीढ़ी हैं जो इसकी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. पेशे से जानवरों के डॉक्टर फवाद  (Fouaad Mirza)  के पिता हसनेन मिर्जा ने उनको इस खेल से परिचय करवाया . फवाद पांच साल की उम्र से ही इस खेल से जुड़ गए थे.हर बार घोड़े से गिरने का रिकॉर्ड रखते थे फवाद
जब वह पहली बार घोड़े पर बैठे थे तो उनके पिता ने उनसे कहा था कि वह तबतक घुड़सवारी नहीं सीख पाएंगे जब तक वह सौ बार घोड़े से गिरते नहीं है. इसके बाद से फवाद  (Fouaad Mirza)  ने इसका रिकॉर्ड रखना शुरू किया. फवाद  (Fouaad Mirza)  एक डायरी रखते जिसमें वह रिकॉर्ड रखते कि वह कब, कहां और कैसे घोड़े से गिरे.  एक इंटरव्यू ने फवाद ने बताया कि पांच साल की उम्र में ही एक बार वह घोड़े से गिरे और घोड़े ने उनके चेहरे पर पैर रख दिया जिससे वह गंभीर चोट लगी. उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनके चेहरे पर 16 टांके आए. हालांकि फवाद  (Fouaad Mirza)  रोए नहीं. जब उनके पिता ने उनसे बात की तो फवाद बोले कि यह 98वीं बार था, जब वह घोड़े से गिरे हैं. उन टांकों के निशान आज भी उनके चेहरे पर है. हालांकि 134 के बाद उन्होंने रिकॉर्ड रखना बंद कर दिया क्योंकि उन्हें खुद पर विश्वास आ चुका था.

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फवाद मिर्जा ने 36 साल बाद भारत को घुड़सवारी में कोटा दिलाया है


क्वालिफिकेशन के लिए घोड़े-घुड़सवार की जोड़ी को एकजुट होकर करना होता है काम
क्वालिफिकेशन के लिए घुड़सवार को चार स्टार के लेवल के टूर्नामेंट में हिस्सा लेना होता है. घोड़े और घुड़सवार की जोड़ी पूरे साल इन टूर्नामेंट में हिस्सा लेती हैं और अंक हासिल करती हैं. अंक हासिल करने के लिए खिलाड़ी को टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले कुल खिलाड़ियों के टॉप 25 प्रतिशत खिलाड़ियों में शामिल होना होता है. टूर्नामेंट में वह जितने ऊपर की रैंक हासिल करते हैं उन्हें उतने ही ज्यादा अंक मिलते हैं. इन्हीं अंको के मुताबिक उन्हें रैकिंग दी जाती है. साल के अंत में रैकिंग के दम पर ही खिलाड़ियों को ओलिंपिक कोटा दिया जाता है. फवाद ने एक जनवरी 2019 से लेकर दिसंबर 31 दिसंबर 2019 तक की जारी रैंकिंग के दम पर कोटा हासिल किया. फवाद (Fouaad Mirza) से पहले इम्ति‍याज अनीस ने 2000 सिडनी ओलिंपिक और विंग कमांडर आईजे लांबा ने 1996 अटलांटा ओलिंपिक में घुड़सवारी में देश का प्रतिनिधित्व किया था.

फवाद को नहीं मिला सरकार और फेडरेशन का साथ
फवाद  (Fouaad Mirza)  की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह सब अपने दम पर हासिल किया. ना तो उन्हें खेल मंत्रालय से किसी तरह की मदद मिली ना ही अपने फेडरेशन से. फवाद भारतीय सरकार की टॉप्स स्कीम में भी शामिल नहीं हैं. भारत की घुड़सवारी फेडरेशन ने तो साल 2018 में एशियन गेम्स  (Asian Games) में फवाद और भारतीय टीम को भेजने से ही माना कर दिया था.  हालांकि फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष जीतू वीरमानी की दखल के बाद उन्हें भेजा गया. भारत को दो सिल्वर मेडल हासिल हुए.

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फवाद से पहले सिर्फ दो घुड़सवार ही ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर पाए हैं


जीतू वीरमानी ने की फवाद की मदद
फवाद ओलिंपिक में घुड़सवारी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जो सेना से नहीं है. फवाद के पिता चाहते हैं कि भारतीय सरकार उनकी उपलब्धियों को देखते हुए  मदद करे.  फवाद फिलहाल जर्मनी में वर्ल्ड चैंपियन सांद्रा ऑफार्थ के साथ ट्रेन कर रहे हैं. उनकी ट्रेनिंग का पूरा खर्चा जीतू वीरमानी उठा रहे हैं. मेडिकॉट के चोट लगने के बाद जीतू वीरमानी ने उन्हें डायरे नाम का नया घोड़ा दिया जो कि 2.5 करोड़ का था.

फवाद मानते हैं कि उनके जीवन में घोड़ों के अलावा कुछ नहीं है. वही उनका पहला प्यार है. फवाद ने बताया कि वह फेसबुक, इंस्टाग्राम पर नहीं है ऐसे में दोस्तो के फोटो देखकर उन्हें कभी ऐसा नहीं लगता कि जिंदगी में कुछ खो रहे हैं.  ओलिंपिक में दुनिया के टॉप 65 घुड़सवार हिस्सा लेने वाले हैं फवाद जानते हैं कि उनके लिए आसान नहीं होने वाला है लेकिन उनका लक्ष्य साफ है. वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके देश को मेडल दिलाना चाहते हैं.

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First published: January 12, 2020, 7:35 AM IST
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