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कभी क्रिकेटर बनना चाहते थे तजिंदर, इस वजह से एथलीट बन फेंका स्वर्णिम 'गोला'

News18Hindi
Updated: August 26, 2018, 12:03 AM IST

एशियन गेम्स के सातवें दिन तजिंदर पाल सिंह तूर ने भारत को 7वां गोल्ड मेडल दिलाया. इसके साथ ही भारत को एथलेटिक्स में अपना पहला स्वर्ण पदक दिलाने का श्रेय 22 वर्षीय तजिंदर को जाता है जिन्होंने शॉटपुट में ये स्वर्ण पदक हासिल किया.

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  • Last Updated: August 26, 2018, 12:03 AM IST
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एशियन गेम्स के सातवें दिन तजिंदर पाल सिंह तूर ने भारत को 7वां गोल्ड मेडल दिलाया. इसके साथ ही भारत को एथलेटिक्स में अपना पहला स्वर्ण पदक दिलाने का श्रेय 22 वर्षीय तजिंदर को जाता है, जिन्होंने शॉटपुट में ये स्वर्ण पदक हासिल किया. इससे पहले तजिंदर पाल सिंह उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब 2017 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्हें रजत पदक मिला था.

पंजाब के एक साधारण किसान परिवार से तालुक रखने वाले तजिंदर पाल सिंह तूर बचपन में एक क्रिकेटर बनना चाहते थे. लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. पिता के कहने पर उन्होंने शॉटपुट खेलना शुरू किया और ये उनकी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ. युवा तजिंदर को इसमें काफी सफलता मिली.

फेडरेशन कप, अंतरराज्यीय प्रतियोगिताएं और राष्ट्रीय खेलों में पदक हासिल कर वो शॉटपुट में एशिया के नंबर एक खिलाड़ी बन गए. हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों में वो पदक से चूक गए थे. तजिंदर के अंकल भी शॉटपुट के ही खिलाड़ी हैं. तजिंदर पाल सिंह तूर भारत और एशिया के नंबर एक शॉटपुट खिलाड़ी हैं. वहीं उनकी वर्ल्ड रैंकिंग 49 है. तूर कोच बहादुर सिंह से ट्रेनिंग लेते हैं.

(image credit: AP)


13 नवंबर 1994 को पंजाब के मोगा में जन्में तजिंदर पाल सिंह तूर के लिए ये रास्ता आसान नहीं था. साधारण घर से आने वाले तजिंदर के लिए ट्रेनिंग, डायट और उपकरण का खर्च उठाना इतना आसान नहीं था. वो कहते हैं कि जूते भी कुछ ही महीने चलते थे. ऐसे में उनके महीने का खर्च काफी ज्यादा हो जाता था. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और एक के बाद एक उपलब्धियां उनके नाम के साथ जुड़ने लगी.

लेकिन, खेल के मैदान का ये शेर अपनी निजी ज़िन्दगी में भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं. उनके पिता कैंसर के मरीज़ हैं. वैसे तो 2015 में त्वचा कैंसर का इलाज होने के बाद वो स्वस्थ हो चुके थे. पर उसके अगले साल एक बार फिर उन्हें कैंसर डिटेक्ट हुआ. उनके पिता को चौथा स्टेज बोन कैंसर है.

इस मुश्किल की घड़ी में भारतीय नौसेना ने उनकी काफी मदद की है. नौसेना ने तजिंदर पाल सिंह तूर को ना केवल नौकरी दी बल्कि उनके पिता के इलाज में भी मदद कर रहे हैं.बता दें कि एशियाई खेलों में अब तक भारत को 29 मेडल मिल चुका है जिसमें 7 गोल्ड 5 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल है. इसके साथ ही भारत इस वक्त मेडल तालिका में 8वें पायदान पर है.

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First published: August 25, 2018, 8:56 PM IST
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