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Sunday Special: जिन खेलों का जन्‍मदाता है भारत, अब उनमें दूसरे देशों का दबदबा


Updated: March 22, 2020, 7:12 AM IST
Sunday Special: जिन खेलों का जन्‍मदाता है भारत, अब उनमें दूसरे देशों का दबदबा
पहला आधिकारिक पोलो मैच भारत के मणिपुर में खेला गया

चेस, पोलो और मॉर्डन मार्शल आर्ट की शुरुआत भारत से ही हुई, मगर आज चेस को छोड़कर बाकी दोनों खेलों में भारत सिमट कर रह गया है

  • Last Updated: March 22, 2020, 7:12 AM IST
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नई दिल्‍ली. खेलों की दुनिया में इस समय भारत का डंका क्रिकेट (Cricket) में बज रहा  है. हॉकी में भारत ने आठ बार ओलिंपिक गोल्‍ड अपने नाम किया. बैडमिंटन, कुश्‍ती, निशानेबाजी में भी भारतीय खिलाड़ी कहीं पर भी पीछे नहीं हैं. इन सभी खेलों की उत्‍पत्ति किसी और देश में हुई, मगर बेहतरीन तरीके से इन खेलों में भारत ने खुद को स्‍थापित किया. मगर देश उन खेलों में कुछ हद तक पिछड़ गया, जिसकी उत्‍पत्ति भारत में हुई. शतरंज, पोलो, और मार्शल आर्ट ऐसे खेल हैं, जिनका जन्‍मदाता भारत है और आज इन खेलों में दूसरे देशों का दबदबा अधिक है.

शतरंज
दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान बना चुका शतरंज की शुरुआत भारत से ही हुई है. पहले यह खेल देश में चतुरंग नाम से मशहूर था. मगर सातवीं सदी से पहले ही यह खेल भारत से निकलकर दूसरे देशों में पहुंच चुका था और धीरे धीरे बाकी देशों ने भी इस खेल में अपनी रूचि दिखाई. विलेहम इस खेल के पहले विश्‍व चैंपियन हैं, जो 1886 में बने थे. मगर 1948 के बाद से वर्ल्‍ड चैंपियनशिप का आयोजन  FIDE द्वारा की जाने लगी. फिडे काबिल खिलाड़ियों को लाइफ टाइम मास्‍टर का खिताब देता है, जिसमें से सबसे बड़ा खिताब ग्रैंडमास्‍टर का है.

पहला आधिकारिक पोलो मैच भारत के मणिपुर में खेला गया
भारत में शतरंज का खेल चतुरंग नाम से मशहूर था.




चेस को 2006 और 2010 एशियन गेम्‍स में शामिल किया गया था. अधिकारिक वर्ल्‍ड चेस चैंपियनशिप में 1886 से 1946 के बीच अमेरिका और जर्मन एम्‍पायर का दबदबा रहा. इसके बाद फिडे वर्ल्‍ड चेस चैंपियनशिप 1948 से 1993 के बीच में  सोवियत यूनियन की धाक रही थी. इसके बाद क्‍लासिक वर्ल्‍ड चैंपियनशिप 1993 से 2006 के बीच भी सोवियत यूनियन का ही दबदबा रहा. इस बीच 2000 में भारत के विश्वनाथन आनंद  पहली बार विश्‍व चैंपियन बने. 2006 के बाद से अभी तक विश्‍व चैंपियनशिप नाम से टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है. 2008 से 2012 के बीच भारत का दबदबा. विश्वनाथन आनंद लगातार चार बार चैंपियन बने.

मार्शल आर्ट

मार्शल आर्ट में आज चीन, जापान के खिलाडि़यों का बोलबाला है.  मगर मार्शल आर्ट का जन्‍मदाता भारत ही है. बाद में यह खेल बुद्ध सन्यासियों के जरिए  एशियन देशों में फैल गया है. भारत में पहले जानवरों से सुरक्षा के लिए मार्शल आर्ट का इस्‍तेमाल किया जाता था. शुरुआत में कुछ लोगों को ही यह कला सिखाई जाती थी. भारत में मार्शल आर्ट थोड़ा झुककर लड़ने वाली कला थी, मगर चीन जाते जाते इसने सीधे खड़े होकर लड़ने वाली कला का रूप ले लिया.

मॉर्डन पोलो 
मॉर्डन पोलो (Polo) का जन्‍मदाता भारत है. पहला आधिकारिक पोलो मैच भारत के मणिपुर में खेला गया. पहला पोलो क्‍लब 1833 में असम में स्‍थापित किया गया. हालांकि पोलो ने खेल का रूप बाद में लिया. पहले यह कैवलरी यूनिट का एक ट्रेनिंग खेल हुआ करता था. जिसमें राजा के गार्ड और शीर्ष सैनिक हिस्‍सा लेते थे. हालांकि इसके बाद यह खेल धीरे धीरे दुनिया भर में फैल गया. फिलहाल इंटरनेशनल पोलो फेडरेशन में 100 से ज्‍यादा देश इसके सदस्‍य है. पोलो को राजाओं का खेल कहा जाता है.
यह खेल दो टीमों के बीच खेला जाता है. हर टीम में चार चार खिलाड़ी होते हैं, जो घोड़ों पर होते हैं और इन्‍हें लंबे हैंडल वाली लड़की वाले मैलेट से छोटी सी गेंद को विपक्षी टीम के गोल पोस्‍ट में पहुंचाना होता है.

इस खेल में आज अर्जेंटीना, ब्राजील, चिली देशों का दबदबा है. इंटरनेशनल फेडरेशन पोलो की ओर से हर तीन चार साल में होने वाले वर्ल्‍ड पोलो चैंपियनशिप की सबसे सफल टीम अर्जेंटीना है. अर्जेंटीना ने सर्वाधिक 5 बार, ब्राजील ने तीन, चिली ने एक और अमेरिका ने एक बार खिताब अपने नाम किया. यहां तक कि टॉप 10 टीमों में भी भारत नहीं है.

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First published: March 22, 2020, 7:12 AM IST
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