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भाई को पहले रेस में मात दी, अब रेसलिंग में जीता ऐतिहासिक गोल्ड, जानिए क्या है पूरा मामला

News18Hindi
Updated: February 19, 2020, 1:24 PM IST
भाई को पहले रेस में मात दी, अब रेसलिंग में जीता ऐतिहासिक गोल्ड, जानिए क्या है पूरा मामला
सुनील कुमार ग्रीको रेसलर हैं

सुनील कुमार (Sunil Kumar) ने एशियन चैंपियनशिप (Asian Championship) में ग्रीको-रोमन में 27 साल बाद भारत को गोल्ड दिलाया है

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  • Last Updated: February 19, 2020, 1:24 PM IST
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नई दिल्ली. नई दिल्ली में जारी एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप (Asian Wrestling Championship) में भारत के सुनील कुमार (Sunil Kumar) ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत के 27 साल के इंतजार का अंत किया. हरियाणा के डबरपुर गांव के रहने वाले सुनील की इस जीत में उनके परिवार की अहम भूमिका रही है जिनकी मेहनत और त्याग के चलते ही सुनील यह जीत हासिल कर पाए हैं. सुनील (Sunil Kumar) के पिता तो आज जिंदा नहीं है गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने पिता का सपना किया जिसकी उन्हें खुशी है.

पिता ने 5 किमी. की रेस करवा के किया था चुनाव
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुनील के पिता अश्विनी कुमार (Ashwini Kumar) एक शादी में गए थे जहां उन्हें एहसास हुआ कि हरियाणा में पहलवानों की कितनी इज्जत की जाती है. इसी वजह से उन्होंने अपने दोनों बेटों को पहलवान बनाने का फैसला किया. हालांकि एक किसान परिवार से होने के कारण उनके लिए दोनों को पहलवान बनाना मुमकिन नहीं था.

सोनीपत के सुनील कुमार ने कुश्ती रचा इतिहास, 27 साल बाद ग्रीको रोमन में देश को दिलाया गोल्ड-Sunil kumar of sonipat wins gold medal in Asian wrestling championships hrrm
सोनीपत के सुनील कुमार ने एशियन चैंपियनशिप में जीता गोल्ड




इस कारण उन्होंने दोनों में से किसी एक को रेसलर बनाने का फैसला किया जिसका चुनाव बड़े ही दिलचस्प तरीके से किया. सुनील के पिता ने शर्त रखी कि दोनों भाईयों के बीच 5 किमी. की रेस होगी और जो भी इसे जीतेगा उसे रेसलिंग की ट्रेनिंग दिलाई जाएगी वहीं हारने वाला किसानी के काम में पिता की मदद करेगा. सुनील अपने बड़े भाई से आठ साल छोटे होने के बावजूद रेस जीत गए. उसके बाद से जिंदगी के सभी उतार चढ़ाव पार करने के बाद आखिरकार सुनील ने 27 साल का इंतजार पूरा किया.

ऐतिहासिक है सुनील कुमार की जीत
एशियन चैंपियनशिप के फाइनल में सुनील कुमार की टक्कर किर्गिस्तान के सालिदिनोव से हुई, जिसमें उन्होंने 5-0 से एकतरफा जीत दर्ज की. एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप के ग्रीको रोमन के 87 किग्रा भारवर्ग के सेमीफाइनल में करिश्माई जीत दर्ज की थी. सुनील कजाखस्तान के अजामत कुस्तुबायेव के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में 1-8 से पिछड़ रहे थे लेकिन उन्होंने लगातार 11 अंक बनाकर कर शानदार वापसी की और मुकाबले को 12-8 से अपने नाम किया, वह 2019 में भी फाइनल में पहुंचे थे लेकिन तब उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था लेकिन इस बार सुनील ने मैदान मार लिया.

87 किलो भार वर्ग में जीते सुनील ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया


भारत ने ग्रीको रोमन में आखिरी गोल्ड मेडल साल 1998 में जीता था. पप्पू यादव ने 48 किग्रा वर्ग में ग्रीको रोमन में एशियन गोल्ड मेडल जीता था. उस समय 20 साल के सुनील पैदा भी नहीं हुए थे. सुनील के पिता देहांत तब हो गया था जब वह महज 10 साल के थे. जीत के बाद उनके साथियों ने कोच ने फैंस ने उन्हें घेर लिया. सुनील ने कहा कि यही उनके पिता का सपना था कि उन्हें ऐसी ही इज्जत मिले.

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First published: February 19, 2020, 1:24 PM IST
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