Olympic Countdown 143 Days: दर्द से कराहता बेटा, दोस्ती का मेडल और व्हीलचेयर...ओलिंपिक इतिहास के अद्भुत लम्हे

Olympic Countdown 143 Days: दर्द से कराहता बेटा, दोस्ती का मेडल और व्हीलचेयर...ओलिंपिक इतिहास के अद्भुत लम्हे
भारत में लगे लॉकडाउन के कारण सभी खिलाड़ी इन दिनों अपना अभ्यास और मैच छोड़कर घर पर रहने को मजबूर हैं. ओलिंपिक खेलों को भी अगले साल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है जिससे उन्हें तैयारियों में आराम भी मिल गया है.

ओलिंपिक खेलों (Olympic Games) में ऐसे कई मौके आए जहां खेल भावना दिखाकर खिलाड़ियों ने अपना दिल जीता

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नई दिल्ली. खिलाड़ी केवल जीत के लिए मैदान पर उतरता है. बेशक हर खिलाड़ी का सपना होता है कि ओलिंपिक में देश के लिए मेडल लाए लेकिन कई बार दुनिया ऐसे शानदार दृश्यों की गवाह बनी जहां मेडल जीतने वाला नहीं, बल्कि खेल भावना दिखाने वाला नायक बना. सच्ची प्रतिस्पर्धा, विरोधियों का सम्मान, जीत की खुशी को मिलकर मनाना और खेल भावना को सबसे ऊपर रखना ओलिंपिक में कई ऐसे लम्हे देखने को मिले. आज हम आपको ऐसी ही कुछ कहानियां बताने जा रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आपको अहसास होगा कि कई बार आपका पोडियम तक पहुंचना ही जीत नहीं होता, बल्कि असली जीत तब मिलती है, जब आप लोगों के दिल जीतते हैं.

बर्लिन ओलिंपिक 1936 : जब प्रतिद्वंद्वी ने दिया ओवेंस को जीत का मंत्र
बर्लिन ओलिंपिक (Berlyn Olympic) में एथलेटिक्स दिग्गज जेसी ओवेंस लॉन्ग जंप के फाइनल के लिए क्वालिफाई करने के लिए पहुंचे तो फैंस को उम्मीद थी कि वह आंख बंद करके भी ऐसा कर लेंगे. हालांकि वह अपनी पहली दो कोशिश में नाकाम रहे. इसके बाद अमेरिका के लुंज लॉन्ग उनके पास आए जो उनके विरोधी थे. लॉन्ग ने ओवेंस को उनकी गलती बताई और कहा कि वह टेक ऑफ बोर्ड से एक पैर पहले रखकर कोशिश करें. लॉन्ग की सलाह का जादू कहें या कुछ ओर, बहरहाल फाइनल में ओवेंस ने गोल्ड जीत लिया. इस स्पर्धा का रजत लॉन्ग के नाम रहा. मगर दिलचस्प बात ये रही कि किसी खिलाड़ी को बेहतर करने के लिए लॉन्ग ने अपने मन में ये ख्याल नहीं आने दिया कि ओवेंस उनके प्रतिस्पर्धी भी हैं. यहां से दोनों के बीच मजबूत दोस्ती की शुरुआत हुई.

बर्लिन ओलिंपिक 1936 : दोस्ती का मेडल
जापान के दो पोल वॉल्ट जिमनास्ट निशिदा और ओई के बीच सिल्वर मेडल के लिए प्रतियोगिता हुई. दोनों ने एक ही ऊंचाई की जंप लगाई. कम मौके चूकने के कारण निशिदा को सिल्वर और ओई को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया. हालांकि दोनों ने देश वापस आकर जो किया वह किसी ने सोचा नहीं था. देश वापस आकर दोनों ने अपने-अपने मेडल आधे काटे और नए मेडल बनाए. इसमें आधा मेडल ब्रॉन्ज और आधा सिल्वर था. इसे दोस्ती का मेडल कहा गया.



1988 सियोल ओलिंपिक : जान बचाने के लिए मिला खेल भावना का पदक
कनाडा के सेलर लेम्यू लॉरेंस ओलिंपिक हीरो में शामिल हैं. 1988 के ओलिंपिक खेलों के दौरान सेलिंग के मुकाबले सियोल से 450 किमी दूर हो रहे थे. मुकाबला जैसे ही शुरू हुआ मौसम ठीक था लेकिन धीरे-धीरे हवा की गति बढ़ती गई और वह 15 नॉट से 35 नॉट हो गया. लेम्यू सिल्वर मेडल जीतने के करीब थे लेकिन तभी उन्होंने देखा कि सिंगापुर के दो सेलर नाव से नीचे गिर गए और जान बचाने के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए. यह दोनों अन्य मुकाबले में हिस्सा ले रहे थे. उन्होंने अपना रास्त बदला और उनके पास गए. काफी मुश्किलों के बाद उन्होंने दोनों को बचाया जो बुरी तरह घायल हो चुके थे. उन्हें बचाने के बाद लेम्यू ने रेस जारी रखी लेकिन 32 सेलर में वह दूसरे की जगह 22वें नंबर पर रहे. उन्हें ओलिंपिक के अंत में खेल भावना का पदक दिया गया.

बार्सिलोना ओलिंपिक 1992 : दर्द से कराहते बेटे को फिनिश लाइन के पार पहुंचाया
बार्सिलोना ओलिंपिक में हिस्सा ले रहे ब्रिटिश धावक डेरेक रेडमंड 400 मीटर की दौड़ के सेमीफाइनल तक पहुंच चुके थे. डेरेक 250 मीटर की दौड़ लगा चुके थे और तभी उनके जांघ की एक मांसपेशी खिंच गई. इस असहनीय दर्द ने डेरेक की रफ्तार धीमी कर दी. डेरेक यहां पर बिल्कुल लाचार हो चुके थे औऱ रो रहे थे हालांकि उन्होंने दौड़ना जारी रखा. इस बीच डेरेक के पिता भी स्टेडियम में मौजूद थे जिनसे अपने बेटे का दर्द देखा नहीं गया. उन्होंने दर्द से कराहते हुए बेटे को सहारा देने के लिए किसी की परवाह नहीं की और सीधे ट्रेक पर जाकर अपने बेटे को सहारा देते हए फिनिश लाइन तक पहुंचाया और वहां जाकर बेटे को खुद लाइन पार करने के लिए छोड़ दिया. डेरेक ने रेस पूरी की और यह दृश्य हमेशा के लिए अमर हो गया.

बीजिंग ओलिंपिक 2008 : पदक पैक कर भेज दिया प्रतिद्वंद्वी के पास
बीजिंग ओलिंपिक में पुरुषाें की 200 मीटर रेस में जमैका के दिग्गज यूसेन बोल्ट ने गोल्ड मेडल जीता था. नेदरलैंड्स के चुरांडी मार्टिना दूसरे और अमेरिका के वालेस स्पिएरमन तीसरे स्थान पर रहे. वालेस के ही हमवतन क्राफोर्ड चौथे स्थान पर रहे. हालांकि गेम्स के बाद कहा गया कि मार्टिन और स्पिएरमॉन ने अपनी लेन की लाइन पर पैर रखा था जिसके कारण उन्हें डिसक्वालिफाई किया गया था. इस कारण क्राफोर्ड को सिल्वर मेडल दिया हालांकि उन्होंने इस पदक को पैक करके मार्टिना को भेजा और लिखा, 'मैं जानता हूं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन मैं चाहता हूं कि इसे आप रखें क्योंकि आप इसके हकदार हैं.'

लंदन ओलिंपिक 2012 : व्हीलचेयर पर बैठाकर ले गए बाहर
लंदन ओलिंपिक में 110 मीटर हर्डल्स में चीन के लियो जिएंग को चोट लग गई. लियो जिएंग 2004 ओलिंपिक के रिकॉर्ड मेडलिस्ट थे और वह फीनिश लाइन के पास पहुंचते-पहुंचते गिर गए. इसके बाद ब्रिटेन के टर्वर और स्पेन के क्विनोनज उनकी मदद के लिए आगे आए और उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाकर ट्रैक से बाहर लेकर गए.

 

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