Home /News /sports /

Tokyo Olympics: किसी ने दोस्त से बांट लिया गोल्ड तो किसी ने सुकून के लिए ठुकरा दिया मेडल, ये हैं टोक्यो ओलंपिक की 5 इंस्पायरिंग स्टोरी

Tokyo Olympics: किसी ने दोस्त से बांट लिया गोल्ड तो किसी ने सुकून के लिए ठुकरा दिया मेडल, ये हैं टोक्यो ओलंपिक की 5 इंस्पायरिंग स्टोरी

Tokyo Olympics : टोक्यो ओलंपिक में पीवी सिंधु और 
अमेरिकी जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो भविष्य के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक होंगी. (AP/Instagram)

Tokyo Olympics : टोक्यो ओलंपिक में पीवी सिंधु और अमेरिकी जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो भविष्य के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक होंगी. (AP/Instagram)

Tokyo Olympics: कोरोना वायरस की आशंका के बीच एक साल की देरी से ही सही टोक्यो ओलंपिक हुए. कई रिकॉर्ड टूटे और कई खेलों को नए ओलंपिक चैम्पियन भी मिले. लेकिन खेलों के महाकुंभ से जुड़ी परंपराएं बरकरार रहीं. एक-एक मेडल के लिए गलाकाट प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद मैदान पर खेल भावना की ऐसी मिसालें पेश की गईं, जो भविष्य के एथली्टस के लिए मिसाल बनेगीं.

अधिक पढ़ें ...

    नई दिल्ली. ओलंपिक आमतौर पर 4 साल में होते हैं. लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण पांचवें साल हुए. हालांकि, राह आसान नहीं थी. क्योंकि मेजबान जापान की बड़ी आबादी इस बार भी इन खेलों के आयोजन के खिलाफ थी. खैर, तमाम आशंकाओं के बीच टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) हुआ. दर्शकों की गैरमौजूदगी में वैसा रोमांच तो महसूस नहीं हुआ. लेकिन एक-एक मेडल के लिए खिलाड़ियों की बीच की जोर आजमाइश वैसी ही पुरानी दिखी. लेकिन इस सबके बीच दिल को सुकून पहुंचाने वाली कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं. जो ओलंपिक या कहें तो खेलों के चरित्र से मिलती-जुलती है. वो है एक-दूसरे का हाथ थामना. मुकाबला बराबरी पर छूटा तो टाईब्रेकर के बजाय अपने चोटिल दोस्त के साथ गोल्ड मेडल बांट लेना. यह ऐसी कुछ कहानी थीं, जो भविष्य के खिलाड़ियों को भी हमेशा प्रेरित करती रहेंगी. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) की ऐसी ही 5 इंस्पायरिंग स्टोरी हम आपको बताने जा रहे हैं.

    जब मुकाबला टाई होने पर खिलाड़ियों ने बांटा लिया गोल्ड मेडल
    वैसे तो आलंपिक में एक-एक मेडल के लिए गलाकाट प्रतिस्पर्धा होती है. ऐसे में दो खिलाड़ियों के आपस में गोल्ड बांट लेने की बात वाकई हैरान करने वाली है. लेकिन ऐसा टोक्यो ओलंपिक के हाई जंप इवेंट में हुआ. दरअसल, इटली के जियानमार्को तम्बेरी (Gianmarco Tamberi) और कतर के मुताज बरशिम (Mutaz Barshim) के बीच हाई जंप में कड़ा मुकाबला था. दोनों ने गोल्ड जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. कोई भी हार मानने को तैयार नहीं था. मुकाबला टाई हो गया था.

    इसके बाद विजेता चुनने के लिए बार को बढ़ाकर ओलंपिक रिकॉर्ड हाइट 2.39 मीटर (7 फीट 10 इंच) कर दिया गया. दोनों को तीन-तीन मौके मिले. लेकिन दोनों इस ऊंचाई को पार करने में चूक गए. चाहते तो इसके बाद जंप-ऑफ के लिए जा सकते थे. लेकिन इटली के तेम्बरी चोटिल हो गए थे. दोस्त को दर्द से कराहता देख बरशिम ने रैफरी के सामने ऐसी पेशकश रखी कि वो भी दंग रह गए. उन्होंने पूछा क्या हम जंप-ऑफ की जगह गोल्ड मेडल बांट सकते हैं.

    ऑफिशियल्स की हरी झंडी मिलते ही दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. तम्बेरी अपने दोस्त बरशिम से गले लगकर रोने लगे. खेल भावना की ऐसी तस्वीर कम ही देखने को मिलती है. लेकिन इन दोनों ने खिलाड़ियों ने यह दिखा दिया कि खेल से बड़ी खेल भावना है.

    Tokyo Olympics: दांव पर था एक गोल्ड, जिगरी दाेस्तों के कारण देने पड़े 2 पीले मेडल

    सिमोन बाइल्स मानसिक सुकून के कारण मेडल की दौड़ से हटीं
    टोक्यो 2020 ने यह बता दिया कि कई बार किसी चीज को छोड़ देना भी जीतने के बराबर होता है. कम से कम ओलंपिक और वर्ल्ड इवेंट में 32 मेडल जीतने वाली 24 साल की जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स (Simone Biles) ने तो अपनी मानसिक स्वास्थ्य को तरजीह देते हुए यही किया. इस पर काफी हो-हल्ला मचा. लोगों को यकीन नहीं हुआ. लेकिन बाइल्स को पक्का यकीन था कि इस वक्त खुद पर ध्यान देना जरूरी है. इसलिए रियो ओलंपिक 2016 (Rio Olympics 2016) की चैंपियन सिमोन ने सभी 5 इंडिविजुअल इवेंट के फाइनल के लिए क्वालीफाई करने के बावजूद. उनमें से 4 में हिस्सा नहीं लिया.

    वो टीम ऑल-राउंड, इंडिविजुअल ऑल-राउंड, वॉल्ट, फ्लोर एक्सरसाइज और अन-इवन बार इवेंट में नहीं उतरीं. बाइल्स के बाहर होने के कारण अमेरिकी महिलाओं की टीम लगातार चौथा स्वर्ण नहीं जीत पाईं. हालांकि, बाद में उन्होंने बेलेंस बीम इवेंट में हिस्सा लिया. लेकिन वो ब्रॉन्ज मेडल ही जीत पाईं. जबकि 5 साल पहले रियो में इसी जिमनास्ट ने फ्लोर एक्सरसाइज, वॉल्ट, इंडिविजुअल ऑल-राउंड और टीम इवेंट का गोल्ड जीता था.

    2019 में बाइल्स दुनिया की ऐसी दूसरी आर्टिस्टिक जिम्नास्ट बनीं थीं, जिसने एक ही वर्ल्ड चैम्पियनशिप में पांच गोल्ड मेडल जीते थे. वो विश्व चैम्पियनशिप के इतिहास में 19 गोल्ड जीतने वाली इकलौती जिम्नास्ट हैं. इतना बड़ा कद होने के बाद भी उन्होंने खुद मानसिक सुकून के लिए मेडल ठुकरा दिया. यह भावी पीढ़ी खिलाड़ियों के लिए भी मिसाल है.

    सिंधु जिससे हारीं, उनके आंसू पोंछे
    पीवी सिंधु (PV Sindhu) का टोक्यो में बैडमिंटन का गोल्ड जीतने का सपना अधूरा रह गया. उन्हें सेमीफाइनल में विश्व की नंबर-1 खिलाड़ी ताइ जु यिंग ने 21-18, 21-12 से शिकस्त दी थी. हालांकि, ताइ खुद भी गोल्ड नहीं जीत पाईं. उन्हें फाइनल में चीन की चेन यू फेई के हाथों 18-21, 21-19, 18-21 से हार के कारण सिल्‍वर मेडल से संतोष करना पड़ा. इस हार से वो बहुत मायूस थीं. लेकिन सिंधु ने उनका हौसला बढ़ाया. खुद जु यिंग ने खुलासा किया था कि मेडल सेरेमनी में सिंधु को गले लगाने के बाद उनके आंसू निकल आए थे. उन्‍होंने मुझसे कहा कि मैं जानती हूं कि आप असहज हो और आप बहुत अच्छा खेलीं, लेकिन आज आपका दिन नहीं था. इसके बाद उन्‍होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और कहा कि वह भी इस अहसास से वाकिफ हैं.

    Tokyo Olympics: पहले पीवी सिंधु को हराकर करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ा, फिर गले लगकर खूब रोईं ताइ जु यिंग

    क्वालिफाइंग में सबसे फिसड्डी और फाइनल में जीता गोल्ड
    बचपन में हम सभी ने कछुआ और खरगोश की दौड़ वाली कहानी जरूर सुनी होगी. रफ्तार में धीमे होने के बावजूद कछुआ सिर्फ अपनी लगन से उस दौड़ को जीत जाता है. ऐसा ही कुछ ट्यूनीशिया के 18 साल के तैराक अहमद हफनोई ने किया.दरअसल, अहमद क्वालीफाइंग राउंड में आठवें स्थान पर थे. इसी वजह से उन्हें आउटर लेन में जगह मिली थी. इस लेन से किसी का मेडल जीतना लगभग नामुमकिन सा होता है. लेकिन फाइनल राउंड में इस 18 साल के तैराक ने ऑस्ट्रेलियाई और अमेरिकी खिलाड़ियों के सालों पुराने इतिहास को पीछे छोड़ते हुए 400 मीटर फ्री स्टाइल के गोल्ड पर कब्जा जमा लिया.

    उन्होंने 3 मिनट 43.3 सेकेंड के साथ स्वर्ण पदक जीता.जब वो पोडियम पर पहुंचे और उन्होंने अपने देश का झंडा ऊपर लहराता देखा तो उनकी आंखों से आंसू बह निकले. यह ट्यूनीशिया का टोक्यो गेम्स में पहला और इकलौता गोल्ड रहा. उनकी यह कहानी छोटे देशों के एथलीट्स के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है.

    मेडल जीतने के आड़े नहीं आई उम्र
    लोग कहते हैं कि उम्र में क्या रखा है. लेकिन जब असल जिंदगी की बात आती है, तो इस पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. पढ़ाई करने की उम्र, शादी की एक तय उम्र होती है. लेकिन टोक्यो ओलंपिक में तो उम्र का पैमाना ही छोटा पड़ गया. क्योंकि 13 साल से लेकर 58 साल के एथलीट ने अपने देश के लिए मेडल जीता. स्केटबोर्डिंग को पहली बार ओलंपिक में शामिल किया गया और इस खेल में कम उम्र के खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया. इसमें सबसे पहला नाम है जापान की मोमिजी निशिया (Momoji Nishia). जिस उम्र में बच्चे खिलौनों या वीडियो गेम से खेलते हैं इस 13 साल की निशिया ने खेलों के महाकुंभ में पीला तमगा अपने नाम कर लिया. दिलचस्प बात यह है कि इस इवेंट का सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल भी 13 और 16 साल की लड़की ने ही जीता.

    Tokyo Olympics : उम्र भी नहीं तोड़ पाई इनका हौसला, किसी ने 58, तो किसी ने 13 साल की उम्र में जीता मेडल

    ऐसा ही कुछ कुवैत के 58 साल के अब्दुल्ला अलरशीदी ने किया. उम्र के जिस पड़ाव पर लोग रिटायरमेंट की प्लानिंग करते हैं, उस उम्र में अलरशीदी ने तो कांस्य पदक पर निशाना साधकर दुनिया को यह बता दिया कि उनके लिए उम्र महज एक आंकड़ा भर है. रशीदी 7 ओलंपिक में हिस्सा ले चुके हैं. फिर भी उनकी जिद और जुनून कम नहीं हुआ. पदक जीतने के बाद उन्होंने 2024 में पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पर निशाना लगाने का भी वादा किया जब वह 60 पार हो चुके होंगे.

    Tags: Gold Medal, Momiji Nishiya, Olympics, Olympics 2020, PV Sindhu Tokyo 2020, Tokyo 2020, Tokyo Olympics 2020, Tokyo Olympics 2021

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर