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Tokyo 2020: कमलप्रीत शॉट पुटर से डिस्कस थ्रोअर बनीं, जानें क्यों कोच को लगता है कि वो जीत सकती हैं ओलंपिक मेडल

Tokyo Olympics: भारत की कमलप्रीत कौर ने 64 मीटर थ्रो कर डिस्कस थ्रो के फाइनल में सीधे प्रवेश किया. इस इवेंट का फाइनल 2 अगस्त को होगा. (AP)

Tokyo Olympics: भारत की कमलप्रीत कौर ने 64 मीटर थ्रो कर डिस्कस थ्रो के फाइनल में सीधे प्रवेश किया. इस इवेंट का फाइनल 2 अगस्त को होगा. (AP)

टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) के डिस्कस थ्रो इवेंट (Discus Throw) में भारत की कमलप्रीत कौर (Kamalpreet Kaur) ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया. क्योंकि इस इवेंट में हिस्सा लेने वाले 31 खिलाड़ियों में से सिर्फ दो ने ही सीधे फाइनल में प्रवेश किया. इसमें से कमलप्रीत एक हैं. हालांकि, उनके लिए टोक्यो तक का सफर आसान नहीं रहा. स्कूल के दिनों में वो शॉट पुटर थीं. लेकिन साई सेंटर में कोच से मिली सलाह के बाद उन्होंने डिस्कस थ्रो को अपना लिया.

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) के डिस्कस थ्रो इवेंट (Discus Throw) में भारत की कमलप्रीत कौर (Kamalpreet Kaur) ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया. उन्होंने इस इवेंट के फाइनल में क्वालिफाई किया. उनकी इस उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है. क्योंकि इस इवेंट में हिस्सा लेने वाले 31 खिलाड़ियों में से सिर्फ दो ने ही सीधे फाइनल में प्रवेश किया. इसमें से कमलप्रीत एक हैं. उन्होंने तीसरे प्रयास में 64 मीटर थ्रो कर फाइनल का कोटा हासिल किया. इस इवेंट का फाइनल दो अगस्त को होगा. इस प्रदर्शन के बाद कमलप्रीत से मेडल की उम्मीदें जग गईं हैं.

    द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता एथलेटिक्स कोच वीरेंद्र पूनिया (Virendra Poonia), जिन्होंने अपनी पत्नी कृष्णा को भी ट्रेनिंग दी थी, को लगता है कि कमलप्रीत इस बार ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में भारत को पहला पदक दिला सकती हैं. उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि अगर कमलप्रीत ने जो भारत में किया था उसे अगर टोक्यो में दोहरा देती हैं और 66.59 मीटर थ्रो करने में सफल हो जाती हैं तो यह तय है कि वो मेडल जीत लेंगी.

    कमलप्रीत इस साल 66.59 का थ्रो कर चुकी हैं
    कोच पूनिया ने बताया कि कमलप्रीत के खेल में काफी सुधार हुआ है. कमलप्रीत ने मार्च में फेडरेशन कप में 65.06 मीटर चक्का फेंककर ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया था. यह तब नेशनल रिकॉर्ड था. उन्होंने 21 जून को इंडियन ग्रां प्री फोर में 66.59 मीटर थ्रो कर अपने ही रिकॉर्ड में सुधार किया था. इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 61.04 मीटर था, जो उन्होंने 2018 में हासिल किया था. वहीं, 2019 में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 60.5 मीटर था.

    ‘अनुभव की कमी कमलप्रीत के आड़े आ सकती है’
    कोच वीरेंद्र पूनिया का मानना है कि 25 साल की कमलप्रीत शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. बस, अनुभव की कमी उनके ओलंपिक मेडल के आड़े आ सकती है. उन्हें राष्ट्रमंडल या एशियाई खेलों और ओलंपिक में खेलने का कोई अनुभव नहीं है और मुझे लगता है कि यह उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा है.

    कमलप्रीत ने 2014 से लेकर डिस्कस थ्रो को लेकर गंभीर हुईं
    कमलप्रीत पंजाब के मुक्तसर की रहने वाली हैं. पढ़ाई में बहुत अच्छी नहीं होने की वजह से उन्होंने खेल पर ध्यान देना शुरू किया और स्कूल कोच की हौसला अफजाई के बाद 2012 में वो एथलेटिक्स में उतर गईं. उनकी शुरुआती ट्रेनिंग बादल गांव में स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेंटर में हुई. शुरुआत में वो शॉट पुटर थीं. लेकिन साई सेंटर के कोच प्रीतपाल मारू, जोकि खुद डिस्कस थ्रोअर थे. उनकी सलाह के बाद कमलप्रीत ने इस खेल को संजीदगी से लेना शुरू किया और इसका उन्हें फायदा मिला. वो 2016 में अंडर-20 की नेशनल चैम्पियन बनीं.

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    मां कमलप्रीत के एथलेटिक्स में हिस्सा लेने के खिलाफ थीं
    कमलप्रीत की मां नहीं चाहती थीं कि वो एथलेटिक्स में अपना करियर बनाएं, इसकी एक वजह परिवार की खराब माली हालत भी थी. हालांकि, पिता ने कमलप्रीत का साथ दिया और जब उन्होंने नेशनल लेवल पर पदक जीतने शुरू किए तो परिवार का भी उन पर विश्वास बढ़ा. कमलप्रीत के पिता किसान हैं. जैसे आम तौर पर गांवों में होता है. कमलप्रीत पर भी कम उम्र में शादी का दबाब था.

    कमलप्रीत ने खुद पहले कह चुकी हैं कि अगर मैं पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पाती और अच्छे कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलता, तो मेरी किस्मत भी दूसरी लड़कियों जैसी ही होती. हालांकि, मैं इस बात को लेकर अडिग थी कि मेरी किस्मत ऐसी नहीं होगी. मैं जिंदगी में कुछ अलग करना चाहती थी. इसलिए मैंने सोचा कि खेल ही मेरी नौकरी और शादी से बचने का टिकट होगा और आज हकीकत सबके सामने है.

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