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Tokyo Olympics: किराए की जमीन पर खेती करते थे पिता! बेटा टोक्यो से जीत लाया मेडल

Tokyo Olympica: रवि दहिया कुश्ती में मेडल जीतने वाले 5वें भारतीय पहलवान हैं. (AP)

Tokyo Olympica: रवि दहिया कुश्ती में मेडल जीतने वाले 5वें भारतीय पहलवान हैं. (AP)

Tokyo Olympics 2020: आर्थिक तंगी होने के बावजूद रवि दहिया (Ravi Dahiya) के पिता राकेश अपने बेटे की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी. हर रोज अपने गांव से छत्रसाल स्टेडियम तक की 40 किलोमीटर की दूरी तय कर रवि तक दूध और फल पहुंचाते थे..

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक से लाकर हिंदुस्तान के मस्तक पर एक और मेडल सजाने वाले रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) इस वक्त रेसलिंग के नए ‘पोस्टर ब्वॉय’ बन चुके है.  23 साल के पहलवान रवि टोक्यो में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी हैं. उनके इस प्रदर्शन को पूरा देश सलाम कर रहा है. सोशल मीडिया से लेकर पूरा देश टोक्यो (Tokyo Olympics 2020) में उदय हुए इस ‘रवि’ के आगे नतमस्तक है.

    कर्ज पर खेत, पिता का संघर्ष
    रवि हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी गांव से आते है. एक गरीब परिवार में जन्मे रवि के पिता खेती करते थे, लेकिन उनके पास अपनी जमीन तक नहीं थी. वो किराए की जमीन पर खेती किया करते थे. आर्थिक तंगी होने के बावजूद उनके पिता राकेश अपने बेटे की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी. हर रोज अपने गांव से छत्रसाल स्टेडियम तक की 40 किलोमीटर की दूरी तय कर रवि तक दूध और फल पहुंचाते थे..

    छत्रसाल में कुश्ती की पाठशाला
    10 साल की उम्र से ही रवि ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग ली. छत्रपाल स्टेडियम में रवि ने सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त जैसे खिलाड़ियों को खेलते हुए देखा. छत्रपास स्टेडियम से ट्रेनिंग लेकर रवि एक इंटरनेशनल रेसलर बन गए. सतपाल सिंह और विरेन्द्र कुमार, रवि दाहिया के कोच है. साल 2015 में छत्रसाल स्टेडियम के जाने-माने पहलवान के नेतृत्व में ट्रेनिंग शुरू करने के बाद उन्होंने सबसे पहले वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप का हिस्सा बनकर अपना हुनर दिखाया.

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    कुश्ती के ‘पोस्टर ब्वॉय’ बनने का सफर
    2015 जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैम्पियनशिप में रवि की प्रतिभा नजर आई. उन्होंने 55 किलो कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता. लेकिन सेमीफाइनल में चोटिल भी हो गए.उसके बाद सीनियर वर्ग में करियर बनाने के दौरान चोट के कारण उन्हें पीछे भी हटना पड़ा. 2017 के सीनियर नेशनल्स में चोट ने उन्हें परेशान किया. इस कारण उन्हें कुछ समय मैट से दूर रहना पड़ा. उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में करीब एक साल लगा.

    हालांकि, चोट के कारण लगे ब्रेक के बाद उन्होंने उसी जगह से वापसी की जहां से छोड़ा था. रवि ने बुखारेस्ट में 2018 वर्ल्ड अंडर 23 रेसलिंग चैम्पियनशिप में 57 किलो कैटेगरी में सिल्वर पर कब्जा जमाया. 2020 भी रवि के लिए काफी अच्छा रहा. कोरोना से पहले मार्च में दिल्ली में हुई एशियन रेसलिंग चैम्पियनशिप में उन्होंने गोल्ड जीता था. अब टोक्यो ओलंपिक फाइनल में पहुंचकर रवि भारतीय कुश्ती के नए ‘पोस्टर ब्वॉय’ बन गए.

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