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Tokyo Olympics : उम्र भी नहीं तोड़ पाई इनका हौसला, किसी ने 58, तो किसी ने 13 साल की उम्र में जीता मेडल

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में ऐसे खिलाड़ियों ने सुर्खियों ने बटोरीं, जिनका उम्र भी हौसला नहीं तोड़ पाई. इसी में से एक हैं जापान की 13 साल की मोमिजी निशिया (Momiji Nishiya) जिसने स्केटबोर्डिंग में गोल्ड जीता. (PIC-AP)

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में ऐसे खिलाड़ियों ने सुर्खियों ने बटोरीं, जिनका उम्र भी हौसला नहीं तोड़ पाई. इसी में से एक हैं जापान की 13 साल की मोमिजी निशिया (Momiji Nishiya) जिसने स्केटबोर्डिंग में गोल्ड जीता. (PIC-AP)

Tokyo Olympics 2020: टोक्यो ओलंपिक को शुरू हुए अब हफ्ते भर का वक्त हो चुका है. इस दौरान ऐसे कई खिलाड़ी सामने आए जो उम्र की बाधाओं को पार बड़ी कामयाबी हासिल करने में सफल रहे. किसी ने 58 साल की उम्र में सटीक निशाना साधा तो किसी ने स्कूल में खेलने की उम्र में ओलंपिक गोल्ड जीत इतिहास रचा. इसमें कुवैत के अब्दुल्ला अल-रशीदी (Abdullah Al-Rashidi) और जापान की 13 साल की मोमिजी निशिया ( Momiji Nishiya) शामिल हैं.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona Virus) के साए और तमाम विरोधों के बीच आखिरकार टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) का आगाज 23 जुलाई से हुआ. इन खेलों को शुरू हुए अब हफ्ते भर का वक्त हो चुका है. इस दौरान खेलों के महाकुंभ के तमाम रंग देखने को मिले. कभी दो देशों के तल्ख रिश्ते खेल के आड़े आए. तो कभी तमाम बाधाओं को तोड़ खिलाड़ी चमके. टोक्यो गेम्स में ऐसे कई खिलाड़ी सामने आए जो उम्र की बाधाओं को पार बड़ी कामयाबी हासिल करने में सफल रहे. किसी ने 58 साल की उम्र में सटीक निशाना साधा तो किसी ने स्कूल में खेलने की उम्र में ओलंपिक गोल्ड जीत इतिहास रचा. ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों की सफलता के किस्से.

    अब्दुल्ला अल-रशीदी: कुवैत के अब्दुल्ला अल-रशीदी (Abdullah Al-Rashidi) ने बीते हफ्ते स्कीट शूटिंग में कुवैत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था. पहली नजर में यह किसी के लिए भी ओलंपिक मेडल जीतने भर की खबर हो सकती है. लेकिन इसके जिद और जुनून की कहानी छुपी है. क्योंकि अबदुल्ला ने यह मेडल 58 साल की उम्र में जीता है. आमतौर पर खिलाड़ी इस उम्र से बहुत पहले ही रिटायर हो जाते हैं. लेकिन कुवैत के इस निशानेबाज ने उम्र को अपनी सफलता के आड़े आने नहीं दिया और टोक्यो गेम्स में यह उपलब्धि हासिल की.

    चार साल पहले रियो में भी अब्दुल्ला ने 54 साल की उम्र में ब्रॉन्ज जीता था. हालांकि, तब उन्होंने यह मेडल कुवैत के झंडे तले नहीं जीता था. क्योंकि आईओसी ने कुवैत की नेशनल ओलंपिक कमेटी पर बैन लगा दिया था. इसी वजह से जब वो टोक्यो में पोडियम पर पहुंचे तो देश के लिए मेडल जीतने की खुशी नहीं रोक पाए और जश्न मनाने के लिए शरीर में राष्ट्रीय ध्वज लपेट लिया. जबकि ओलंपिक प्रोटोकॉल किसी खिलाड़ी को मेडल सेरेमनी से पहले राष्ट्रीय ध्वज के साथ जश्न मनाने की अनुमति नहीं देता है.

    जावेद फोरोगी: कोरोना महामारी के दौर जब लाखों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा. खिलाड़ी भी सख्‍त प्रोटोकॉल के बीच भी टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों में जुटे हुए थे. वहीं, ईरान के निशानेबाज जावेद फोरोगी (Javad Foroughi) ओलंपिक की तैयारियों को छोड़कर लोगों की इस वायरस से जान बचाने में लगे थे और इसके बाद जब टोक्यो पहुंचे, तो यहां भी इतिहास रच दिया. फोरोगी ने बीते हफ्ते 10 मीटर एय़र पिस्टल इवेंट में गोल्ड जीता था. वो 41 साल में देश के सबसे उम्रदराज और नए ओलंपिक चैम्पियन बने.

    फोरोगी की यह कामयाबी इसलिए भी बड़ी है. क्योंकि ईरान ने इससे पहले कभी ओलंपिक के शूटिंग इवेंट में मेडल नहीं जीता था और फोरोगी ने सीधे गोल्ड पर ही निशाना साधा. वो सीरिया के युद्ध क्षेत्र में बतौर नर्स लोगों की जान बचाने का काम कर चुके हैं.

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    ल्यू शियाओजुन: वेटलिफ्टिंग दम-खम का खेल है. इसमें उम्र की काफी अहमियत होती है. लेकिन चीन के ल्यू शियाओजुन (Lyu Xiaojun) के लिए यह बात मायने नहीं रखती. तभी तो उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में 37 साल की उम्र में गोल्ड जीतकर सबको हैरान कर दिया. वो वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं. उन्होंने पुरुषों के 81 किलो वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की. 37 साल के इस चाइनीज वेटलिफ्टर ने स्नैच में 170 और क्लीन एंड जर्क में 204 किलो वजन उठाया था. यानी कुल 374 किलो वजन उठाकर वो गोल्ड जीते.

    इस जीत के बाद ल्यू ने कहा कि मुझे कम उम्र में वेटलिफ्टिंग पसंद था, लेकिन अब यह मेरा प्यार है. यही वजह है कि मैं 37 साल या 40 साल की उम्र तक भी इसे जारी रखूंगा.

    मोमिजी निशिया: स्केटबोर्डिंग ने पहली बार टोक्यो गेम्स के जरिए ओलंपिक में एंट्री की और पहली ही इस खेल में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन हुए. जापान की मोमिजी निशिया ( Momiji Nishiya) ने वुमेंस स्ट्रीट स्केटबोर्डिंग इवेंट में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा. वो इस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली सबसे युवा एथलीट हैं. निशिया 13 साल 330 दिन की उम्र में गोल्ड मेडल जीतने वाली जापान की सबसे युवा एथलीट हैं. दिलचस्प बात यह रही कि जिस इवेंट में 13 साल की निशिया ने गोल्ड जीता. उसी इवेंट का सिल्वर मेडल ब्राजील की रेयस्सा लील को मिला था. उनकी उम्र भी 13 बरस ही है.

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    इसके अलावा ब्रॉन्ज मेडल भी जापान की झोली में आया था और इसे जीतने वाली खिलाड़ी फुना भी सिर्फ 16 साल की हैं. स्केटबोर्ड इवेंट में ही ब्रिटेन की ओर से स्काई ब्राउन टोक्यो में शामिल हुईं थी. ब्राउन समर ओलंपिक में ब्रिटेन की ओर से खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं. वो भी सिर्फ 13 साल की हैं.

    हेंड जाज़ा टोक्यो की सबसे युवा खिलाड़ी बनीं
    सीरिया की हेंड जाज़ा (Hend Zaza) महज 12 साल की उम्र में ओलंपिक का हिस्सा बनीं. वो टेबल टेनिस के महिला सिंगल्स में उतरी थीं. हालांकि, जाज़ा पहले ही मैच में 39 साल की ऑस्ट्रिया की खिलाड़ी ल्यू जिया से हारकर बाहर हो गईं. ल्यू का ये छठवां ओलंपिक था. दिलचस्प बात यह है कि जब जाज़ा पैदा भी नहीं हुईं थीं, तब ल्यू 3 ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी थीं. टोक्यो के सबसे युवा एथलीट में जापान की 12 साल की कोकोना हिराकी भी शामिल हैं. उन्होंने स्केटबोर्ड इवेंट में दावेदारी पेश की थी. वो समर ओलंपिक में जापान की ओर से सबसे कम उम्र में खेलने वाली एथलीट हैं.

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