Tokyo Olympics: दान के 32 किलो सोने से बने मेडल, 400 डिजाइन में से एक फाइनल हुआ, जानें एक मेडल में कितना गोल्ड

Tokyo 2020: जापान के लोगों द्वारा दान किए गए इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स की मदद से मेडल तैयार किए गए हैं. (PIC: AP)

Tokyo Olympics: टोक्यो 2020(Tokyo 2020) कई मायनों में खास है. पहली बार लोगों की भागीदारी से मेडल तैयार हुए हैं. इस बार रिसाइकिल इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स से मेडल तैयार(Tokyo Olympics Medal Design) किए गए हैं. इसके लिए जापान के लोगों ने 62 लाख मोबाइल आयोजन समिति को दान किए थे. मेडल के लिए कुल 32 किलो सोना इकठ्ठा किया गया था. इसमें से कितना सोना गोल्ड मेडल में इस्तेमाल हुआ. यह जानना काफी दिलचस्प होगा.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कारण एक साल के लिए टाले गए टोक्यो ओलंपिक (Tokyo 2020) के शुरू होने में अब गिनती के ही दिन बचे हैं. दुनिया भर के एथलीट्स जिंदगी के कई साल सिर्फ इसी एक लक्ष्य पर लगा देते हैं कि वो कैसे ओलंपिक के पोडियम तक पहुंचे. मेडल खिलाड़ी की सालों की मेहनत, त्याग और समर्पण का प्रतीक होता है. ओलंपिक में मेडल जीतना ही आपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है. लेकिन खेलों के महाकुंभ में हिस्सा लेने वाले हर खिलाड़ी का सपना गोल्ड जीतने का ही होता है. इस बार के ओलंपिक इसलिए भी खास हैं. क्योंकि मेडल तैयार करने में जनता का सहयोग लिया गया है.

    ओलंपिक पदकों को तैयार करने में टोक्यो 2020 की आयोजन समिति (Tokyo 2020) ने पूरे जापान से इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन जैसे छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इकठ्ठा किया. इसके लिए 'टोक्यो 2020 मेडल प्रोजेक्ट' शुरू किया गया था. देश के नागरिकों से अप्रैल 2017 से मार्च 2019 के बीच अलग-अलग राज्यों की म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ने करीब 78,985 टन इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक आयटम्स, इकठ्ठा किए. इसमें मोबाइल फोन भी शामिल हैं.

    टोक्यो ओलंपिक के लिए 32 किलो सोना इकठ्ठा किया गया
    आपको जानकर ताजुज्ब होगा कि मेडल तैयार करने में आयोजन समिति ने लोगों से कुल 32 किलो सोना, करीब 3500 किलो चांदी और 2200 किलो पीतल इकठ्ठा किया. इकठ्ठा किए गए इन धातुओं से कुल 5 हजार मेडल तैयार किए गए हैं. टोक्यो 2020 की आयोजन समिति को लोगों से भले ही 32 किलो सोना मिला हो. लेकिन मेडल पूरी तरह सोने के नहीं बने हैं. इसमें नाममात्र का गोल्ड इस्तेमाल हुआ है. सिर्फ इस पर सोने का पानी चढ़ाया गया है.

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    गोल्ड मेडल में कितना गोल्ड?
    टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को जो गोल्ड मेडल दिया जाएगा. वो असल में चांदी से बना होगा. 556 ग्राम के गोल्ड मेडल को तैयार करने में सिर्फ 6 ग्राम सोने का इस्तेमाल हुआ है. इस मेडल पर सोने की प्लेटिंग की गई है. आखिरी बार 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक में खिलाड़ियों को असली गोल्ड मेडल दिए गए थे. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ की मौजूदा गाइडलाइन के मुताबिक, गोल्ड मेडल में कम से कम 6 ग्राम सोना होना चाहिए. यानी मेडल में ज्यादा हिस्सा चांदी का ही होता है. इसके अलावा पदक कम से कम 60 मिमी व्यास और 3 मिमी मोटे होने चाहिए.



    (वीडियो टोक्यो ओलंपिक से साभार)

    टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को जो सिल्वर मेडल दिया जाएगा, उसका वजन 550 ग्राम होगा. वहीं, ब्रॉन्ज मेडल का वजन 450 ग्राम होगा. ब्रॉन्ज मेडल तैयार करने में 95 फीसदी कॉपर और 5 फीसदी जिंक का इस्तेमाल हुआ है.

    टोक्यो ओलंपिक के पदकों को क्या खास बनाता है?
    जापान की तकनीकी कौशल को लेकर रूचि किसी से छुपी नहीं है. टोक्यो ओलंपिक में भी इसे विस्तार देने की कोशिश की गई है. खेलों के लिए रिसाइकिल इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स से मेडल तैयार किए गए हैं. ये इको-फ्रेंडली और तकनीकी प्रगति के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है. मेडल तैयार करने में लोगों द्वारा दान किए गए 62 लाख पुराने मोबाइल का इस्तेमाल हुआ है. ये ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के इतिहास में पहला मौका है, जब मेडल के निर्माण के लिए लोगों से इस्तेमाल की गईं खास चीजें ली गईं और पहली बार रिसाइकिल मटेरियल से मेडल बनाए गए हैं.

    मेडल के लिए 400 में से एक डिजाइन फाइनल हुआ
    टोक्यो 2020 के आयोजकों ने डिजाइनरों, पेशेवरों और छात्रों के लिए खुली प्रतियोगिता आयोजित करके जनता को डिजाइन चुनने की अनुमति दी. मेडल के कुल 400 डिजाइन आए. इसमें जूनिची कावानिशी के डिजाइन को चुना गया. कावानिशी जापान साइन डिजाइन एसोसिएशन के डायरेक्टर हैं. टोक्यो 2020 के आयोजकों के मुताबिक, पदक खुरदुरे पत्थरों से मिलते-जुलते हैं, जिन्हें पॉलिश कर चमकाया गया है. मेडल के डिजाइन का उद्देश्य विविधता का प्रतीक है और एक ऐसी दुनिया का प्रतिनिधित्व करना है, जहां खेल में प्रतिस्पर्धा करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाता है. मेडल के साइड में इवेंट का नाम भी लिखा होगा.

    रिबन का भी डिजाइन खास
    मेडल के रिबन का डिजाइन भी खास है. इसमें पारंपरिक जापानी संस्कृति को दिखाया गया है. मेडल के रिबन को देखकर ये पता चल जाता है कि जापान कैसे 'एकता में अनेकता' का संदेश देता है. डिजाइन "सद्भाव से नवाचार" के टोक्यो 2020 ब्रांड विजन को भी बढ़ावा देता है. रिबन की सतह पर खास तरह की सिलिकॉन लाइन इस्तेमाल किया गया है, ताकि कोई भी छूकर पदक के प्रकार (गोल्ड, सिल्वर या ब्रॉन्ज) की पहचान कर सके. इसमें रासायनिक रूप से रिसाइकिल किए गए पॉलिएस्टर फाइबर, जोकि निर्माण प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइ ऑक्साइड का काम उत्सर्जन करता है, उसका उपयोग किया गया है.

    मेडल के लिए लकड़ी से बने खास खोल हुए डिजाइन
    टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को जिस केस या खोल में रखकर मेडल दिए जाएंगे, उसका डिजाइन भी खास है. ये गेम्स के प्रतीक चिन्ह से मेल खाता है. मेडल रखने के लिए तैयार किया गया हर खोल उन ओलंपियंस को समर्पित है, जिन्होंने खेल के सर्वोच्च शिखर को छूआ है. जापानी शिल्पकारों ने पारंपरिक और आधुनिक तकनीक के मेल से इस खास केस को तैयार किया है. हर केस का पैटर्न दूसरे से अलग है और इसे लकड़ी से काटकर तैयार किया गया है.

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