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Tokyo Olympics: मुक्केबाज पूजा रानी ने इचरक चाएब को हराया, क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचीं

Tokyo Olympics 2020: पूजा रानी ने टोक्यो ओलंपिक में अपना पहला मुकाबला जीत लिया है. (Pooja Rani/Instagram)

Tokyo Olympics 2020: पूजा रानी टोक्यो में पहला मैच जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज हैं. वहीं, भारत की पूजा रानी टोक्यो ओलंपिक में क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश करने वाली दूसरी भारतीय मुक्केबाज बन गई हैं.

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    टोक्यो. भारतीय महिला मुक्केबाज पूजा रानी ने 75 किग्रा मिडिलिवेट वर्ग के राउंड 16 में अल्जीरिया की इचरक चाएब पर 5-0 से जीत दर्ज कर क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश किया है. पूजा रानी टोक्यो में पहला मैच जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज हैं. वहीं, भारत की पूजा रानी टोक्यो ओलंपिक में क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश करने वाली दूसरी भारतीय मुक्केबाज बन गई हैं. पूजा से पहले लवलीना बोरगोहेन ने मंगलवार को महिला वेल्टरवेट स्पर्धा के क्वॉर्टर फाइनल में जगह बनाई है.

    पूजा रानी अब अंतिम 8 में जगह बनाने वाली दूसरी मुक्केबाज बन गई हैं. इसके अलावा भारत की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने भी अपना शुरुआती दौर जीता और अब क्वॉर्टरफाइनल में जगह बनाने के लिए गुरुवार को मुकाबला करेंगी.

    30 साल की भारतीय ने पूरे मुकाबले के दौरान अपने से 10 साल जूनियर प्रतिद्वंद्वी पर दबदबा बनाए रखा. दो बार की एशियाई चैम्पियन दाहिने हाथ के सीधे दमदार मुक्कों से नियंत्रण बनाये हुए थीं और उन्हें चाएब के रिंग में संतुलन की कमी का भी काफी फायदा मिला. तीनों राउंड में रानी का दबदबा रहा जबकि चाएब भी अपना पहला ओलंपिक खेल रही थीं, लेकिन वह मुक्के सही जगह नहीं जड़ पा रही थीं. रानी ने विपक्षी से दूरी बनाकर चतुराई भरा प्रदर्शन किया.

    रानी ने पूरी बाउट के दौरान जवाबी हमले किये जबकि चाएब भी दमदार मुक्के लगाने का प्रयास कर रही थीं लेकिन वे अपने लक्ष्य से चूकते रहे. रानी का ओलंपिक का सफर काफी मुश्किलों से भरा रहा है. वह कंधे की चोट से जूझती रहीं जिससे उनका करियर खत्म होने का भी डर बना हुआ था, उनका हाथ भी जल गया था. वित्तीय सहयोग की कमी के बावजूद वह यहां तक पहुंची हैं.

    उनके पिता पुलिस अधिकारी हैं जो उन्हें इस खेल में नहीं आने देना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि मुक्केबाजी आक्रामक लोगों के लिए ही है. उन्होंने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा था, ''मार लग जाएगी. मेरे पिता ने यही कहा था. उन्होंने कहा था कि यह खेल मेरे लिए नहीं है, क्योंकि उन्हें लगता था कि मुक्केबाजी केवल आक्रामक (गुस्सैल) लोग ही करते हैं.''

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