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Tokyo Olympics: दीपिका कुमारी ने कहा- हम ओलंपिक मेडल के बारे में अधिक सोचते हैं, इसी ने प्रदर्शन बिगाड़ा

Tokyo Olympics: दीपिका कुमारी ने कहा- हम ओलंपिक मेडल के बारे में अधिक सोचते हैं, इसी ने प्रदर्शन बिगाड़ा

Tokyo Olympics: दीपिका कुमारी टोक्यो में मेडल नहीं जीत सकीं. वे तीसरी बार ओलंपिक में उतरी थीं. (AP)

Tokyo Olympics: दीपिका कुमारी टोक्यो में मेडल नहीं जीत सकीं. वे तीसरी बार ओलंपिक में उतरी थीं. (AP)

Tokyo Olympics: महिला तीरंदाज दीपिका कुमारी (Deepika Kumari) ओलंपिक में मेडल नहीं जीत सकीं. वे लगातार तीसरे ओलंपिक में कमाल नहीं कर सकीं. ओलंपिक से पहले दीपिका ने वर्ल्ड कप में गोल्डन हैट्रिक लगाई थी.

    कोलकाता. भारत की स्टार तीरंदाज दीपिका कुमारी (Deepika Kumari) ने सोमवार को स्वीकार किया कि उन्हें ओलंपिक खेलों (Tokyo Olympics) में दबाव में आने से बचने की जरूरत है. साथ ही कहा कि भविष्य में अच्छे नतीजे हासिल करने के लिए खेलों के सबसे बड़े मंच को अलग नजरिए से देखने की जरूरत है. इस साल वर्ल्ड कप में कई पदक जीतने वाली दीपिका अच्छी फॉर्म में चल रही थीं और 27 साल की इस खिलाड़ी से टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए तीरंदाजी का पहला ओलंपिक पदक जीतने की उम्मीद थी.

    दीपिका कुमारी को हालांकि व्यक्तिगत और मिक्स्ड दोनों इवेंट के क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा. इस तरह से एक बार फिर ओलंपिक में उनके अभियान का निराशाजनक अंत हुआ. वे तीसरी बार ओलंपिक में उतरी थीं. दीपिका कुमारी ने कहा, ‘वो पांच छल्लों का दबाव, हावी हो रहा है. सभी कह रहे हैं कि हमारे पास पदक नहीं है, हमारे पास पदक नहीं है. हमने इसके बारे में वहां हजार बार सोचा और यह हमारी मानसिकता पर हावी रहा. इसका मानसिक असर रहा और हमारी तकनीक प्रभावित हुई.’

    अलग नजरिए से देखने की जरूरत है

    दीपिका कुमारी ने कहा, ‘समय आ गया है कि मैं अपने खेल का आत्मविश्लेषण करूं और इसे अलग नजरिए से देखूं. काफी चीजों की कमी खल रही है. असल में हमें अपने खेल का नजरिया बदलने की जरूरत है.’ उन्होंने कहा, ‘हमें सभी प्रतियोगिताओं को एक तरह से देखना होगा. यह वर्ल्ड कप हो, वर्ल्ड चैंपियनशिप या ओलंपिक. लेकिन वहां (ओलंपिक) हम पदक के बारे में काफी अधिक सोचते हैं. हमें चीजों को पेचीदा नहीं बनाना होगा और उस लम्हे का लुत्फ उठाना होगा.’

    अन्य इवेंट के बारे में अधिक नहीं सोचते

    दीपिका कुमारी ने कहा, ‘वर्ल्ड कप या वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी पदक ही सर्वोच्च लक्ष्य होता है, लेकिन हम कभी इसके बारे में लगातार नहीं सोचते. लेकिन एक बार ओलंपिक में पहुंचने के बाद हम पदक जीतने के विचार से दूर नहीं हो पाते. हमें इस पर काम करने की जरूरत है.’ दीपिका को व्यक्तिगत क्वार्टर फाइनल में कोरिया की 20 साल की आन सान के खिलाफ सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा. व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली आन सान भी दीपिका के खिलाफ दबाव में दिखीं और अंतिम दो सेट में 26 अंक ही जुटा सकीं. दीपिका ने हालांकि बेहद लचर प्रदर्शन किया और लगातार तीन बार सात और एक आठ अंक के साथ मुकाबला गंवा दिया.

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    नंबर-1 दीपिका कुमारी कहा, ‘‘मैं काफी अच्छा खेल रही थी, लेकिन तीर बीच में नहीं लग रहे थे. यह रहस्य था. मैं और मीम सर (कोच मीम गुरुंग) हैरान थे.’ अपने पति और भारत के नंबर-1 तीरंदाज अतनु दास की तरह दीपिका ने भी कहा कि मनोवैज्ञानिक की मौजूदगी से मदद मिलती. उन्होंने कहा, ‘इससे काफी मदद मिलती. हमें ऐसे व्यक्ति की जरूरत है, जो हमारा मनोबल बढ़ाए.’ दीपिका और अतनु वर्ल्ड चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में चूकने के बाद अगले महीने वर्ल्ड कप फाइनल में हिस्सा लेंगे.

    Tags: Archery, Deepika kumari, Olympics, Olympics 2020, Tokyo 2020, Tokyo Olympics, Tokyo Olympics 2020

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