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Tokyo Olympics: श्रीजेश और सविता; भारतीय हॉकी के 2 वॉल, जिन्होंने भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया

Tokyo Olympics: पीआर श्रीजेश और सविता पुनिया ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है. (Savita Punia Instagram/AP)

Tokyo Olympics: पीआर श्रीजेश और सविता पुनिया ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है. (Savita Punia Instagram/AP)

Tokyo Olympics: टोक्यो भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम के लिए मेडल की उम्मीद लेकर आया है. दोनों ही टीमों ने सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है. पुरुष टीम अब 3 अगस्त को बेल्जियम से जबकि महिला टीम 4 अगस्त को अर्जेंटीना से भिड़ेगी.

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) भारतीय हाॅकी के लिए बेहद शानदार साबित हुआ है. पुरुष टीम ने जहां 49 साल बाद सेमीफाइनल में जगह बनाई, तो महिला टीम पहली बार अंतिम-4 में पहुंची है. ऐसे में दोनों टीमों ने मेडल की उम्मीद जगा दी है. ओलंपिक की बात की जाए तो भारत के अब तक तीन मेडल पक्के हुए हैं. महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर जबकि बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है. महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने सेमीफाइनल में पहुंचकर मेडल पक्का कर लिया है.

    भारतीय हॉकी टीम की जीत में अब तक गोलकीपर्स का योगदान अहम रहा है. पुरुष टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) और महिला टीम की गोलकीपर सविता पुनिया (Savita Punia) ने कमाल का प्रदर्शन किया है. गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन के खिलाफ कई शानदार बचाव किए थे. इसके अलावा ग्रुप मुकाबलों में भी कई अहम मौकों पर उन्होंने विरोधी टीमों को गोल करने से रोका. टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने उन्हें जमकर सराहा भी है. उन्होंने कहा, ‘अविश्वसनीय. आप देख सकते हैं कि श्रीजेश हमें हमेशा बचाता है. हम उसे ‘द वॉल’ कहते हैं.’

    35 की उम्र में भी नहीं दिख रही कोई कमी

    35 साल के पीआर श्रीजेश का यह तीसरा ओलंपिक है. वे 2012 और 2016 ओलंपिक में भी उतर चुके हैं. उनका करियर मेडल से भरा हुआ है. एशियन गेम्स में एक गोल्ड सहित दो मेडल जीत चुके हैं. चैंपियंस ट्रॉफी और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी मेडल पर कब्जा किया है. इसके अलावा एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में तीन गोल्ड सहित चार मेडल जीते हैं. उन्हें 2006 में पहली बार इंटरनेशनल मुकाबला खेलने काे मिला था. 2008 जूनियर एशिया कप में उन्हें बेस्ट गोलकीपर का अवॉर्ड मिला.

    फाइनल में किए कई शानदार बचाव

    2011 में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पीआर श्रीजेश ने पाकिस्तान के खिलाफ दो पेनल्टी स्ट्रोक राेके और टीम को जीत दिलाई. 2014 के एशियन गेम्स में टीम इंडिया ने फाइनल में पाकिस्तान को हराया. इस मुकाबले में भी श्रीजेश ने दो शानदार स्ट्रोक बचाए थे. 2014 चैंपियंस ट्रॉफी और 2018 चैंपियंस ट्रॉफी दाेनों में उन्हें गोलकीपर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिला. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 2016 में चैंपियंस ट्रॉफी में सिल्वर मेडल भी जीता था.

    लॉन्ग जंप और वॉलीबॉल को छाेड़कर हॉकी को चुना

    केरल के पीआर श्रीजेश का हॉकी में आना भी एक संयोग ही है. 12 साल तक वे दौड़, लॉन्ग जंप और वॉलीबॉल में करियर बनाने की सोच रहे थे. लेकिन इसके बाद स्कूल के कोच ने उन्हें गोलकीपिंग करने की सलाह दी. इसने श्रीजेश के जीवन को ही बदलकर रख दिया. वे आज दुनिया के चुनिंदा बेस्ट गोलकीपर्स में से एक हैं. 2017 में उन्हें खेल में योगदान देने के लिए पद्मश्री पुरस्कार दिया जा चुका है.

    सविता पुनिया ने लड़कों के साथ की तैयारी

    हरियाणा की सविता पुनिया इतिहास रचने वाली महिला हॉकी टीम की गोलकीपर हैं. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के 9 पेनल्टी कॉर्नर रोके. लेकिन इस प्रदर्शन के पीछे उनकी कड़ी मेहतन छिपी है. वे लड़कों के साथ हॉकी खेलने का अभ्यास करती थीं. लड़के ताकत के साथ ड्रैग फ्लिक शॉट मारते थे, उन्हें रोकने के लिए काफी ताकत लगानी पड़ती थी. इस तरह से उन्होंने खुद को तैयार किया.

    जापान के खिलाफ किया था कमाल

    2016 में जापान के खिलाफ उन्होंने शानदार पेनल्टी कॉर्नर रोके और टीम को 1-0 से जीत दिलाई. इसी के दम पर टीम ने रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने में सफल हुई. 2018 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार भी मिल चुका है. 31 साल की सविता पुनिया का यह दूसरा ओलंपिक है. 2018 में उन्हें एशिया कप में बेस्ट गोलकीपर चुना गया. इसी की बदौलत टीम 2018 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर सकी.

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    हॉकी में मिले हैं अब तक 11 मेडल

    ओलंपिक के इतिहास की बात की जाए तो भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 11 मेडल जीते हैं. टीम ने 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964 और 1980 में गोल्ड मेडल जीता. इसके अलावा टीम 1960 में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रही थी. इसके बाद 1968 और 1972 में ब्रॉन्ज मेडल जीते. हालांकि 1980 के बाद टीम मेडल नहीं जीत सकी है. दूसरी ओर महिला टीम को पहले मेडल का इंतजार है.

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