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भारतीय हॉकी की 'वॉल' सविता पूनिया का युवाओं को संदेश-सपने सच करने के लिए आज से ही मेहनत शुरू करें

भारतीय हॉकी की 'वॉल' सविता पूनिया का युवाओं को संदेश-सपने सच करने के लिए आज से ही मेहनत शुरू करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिन पहले टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात की थी. तब महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया भी प्रधानमंत्री से मिलीं थीं. (Savita Punia instagram)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिन पहले टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात की थी. तब महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया भी प्रधानमंत्री से मिलीं थीं. (Savita Punia instagram)

टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Women'S Hockey Team) पहली बार सेमीफाइनल तक पहुंचने में सफल रही. टीम के इस प्रदर्शन में गोलकीपर सविता पूनिया (Savita Punia) की भूमिका अहम रही. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 9 गोल बचाए थे. इसी वजह से उन्हें टीम की 'वॉल' कहा गया. हालांकि, सविता की नजर में यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि अपने खेल को और ऊंचा उठाने की जिम्मेदारी है.

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारतीय महिला हॉकी टीम (Indian Women’S Hockey Team) ने शानदार प्रदर्शन किया. टीम भले ही पदक नहीं जीत पाई, लेकिन पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचकर इतिहास रचा. टीम की इस सफलता में गोलकीपर सविता पूनिया (Savita Punia) की भूमिका अहम रही. वो गोल पोस्ट पर चट्टान की तरह डटी रहीं और कई मौकों पर बचाव कर टीम की जीत तय की. खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उन्होंने 9 गोल बचाए. इसी फौलादी इरादे की वजह से उन्हें टीम की ‘दीवार’ कहा गया. 31 साल की सविता के इसे बड़ी जिम्मेदारी मानती हैं और इसे निभाने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं.

    महिला हॉकी टीम की इस गोलकीपर ने हाल ही में देश में हॉकी के विकास, अपनी भूमिका और भविष्य की योजनाओं को लेकर बात की थी. तब उन्होंने युवाओं से कहा था कि जिंदगी में अपने लक्ष्य तय करिए और इसे हासिल करने के लिए आज और अभी से ही कड़ी मेहनत शुरू कर दीजिए. क्योंकि इसके बिना आप मंजिल तक नहीं पहुंच सकते हैं.

    ‘वॉल’ नाम के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी: सविता 
    सविता उस राज्य से आती हैं, जहां आज भी बेटियों के लिए घर की चाहरदीवारी से बाहर निकलकर अपने सपनों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है. फिर भी वो घर से निकली और हॉकी जैसे खेल में बतौर गोलकीपर पहचान बनाई.जिसमें हमेशा चोट लगने की संभावना बनी रहती है. ऐसे में वो लाखों बेटियों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं. उन्हें आज दुनिया भारतीय हॉकी की ‘वॉल’ मानती हैं. लेकिन उनके लिए दोहरी जिम्मेदारी जैसी बात है. एक अपने खेल को और ऊंचे स्तर तक ले जाना और दूसरा इस टैग को हमेशा और हर बार मैदान पर सच साबित करना.

    ‘मेंटल कंडीशनिंग का हमें टोक्यो में काफी फायदा मिला’
    एक गोलकीपर के तौर पर उनका फुटवर्क हमेशा से ही अच्छा रहा है. वो जूनियर लेवल पर पर भी फॉरवर्ड और मिडफील्डर्स के साथ ज्यादा वक्त बिताती थीं. ताकि उनकी सोच और खेल को बेहतर ढंग से समझ सकें. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में उनके खेल में इसकी झलक नजर आई थी. सविता को आज भी यह मुकाबला याद है. इसे लेकर उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि हम पहले भी हाई प्रेशर मैच खेल चुके हैं. लेकिन इस मुकाबले में अत्यधिक दबाव था.

    अगर हम इस मैच जीत लेते तो मेडल के और करीब पहुंच जाते. ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को बिना गोल किए रोकना आसान बात नहीं थी. हमारी फिटनेस अच्छी थी. इसलिए हम 60 मिनट तक बेहतर हॉकी खेल पाए. मेंटल कंडीशनिंग के सेशंस से भी हमें फायदा हुआ था.

    हॉकी का आधारभूत ढांचा पहले के मुकाबले बेहतर हुआ
    सविता को लगता है कि महिला हॉकी के टोक्यो ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन के बाद अब और लड़कियां इस खेल में आगे आएंगी. वैसे पहले के मुकाबले अब खेल के इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार हुआ है. पहले नेशनल लेवल पर पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को तमाम सुविधाएं मिलती हैं. अब कई राज्यों में बुनियादी स्तर पर ही सुविधाएं मिल रही हैं. यह खेल के लिए अच्छा है और अब बच्चे इसमें करियर बनाने के बारे में सोचेंगे

    Tags: Indian women hockey team, Indian women's hockey player, Savita Punia, Tokyo 2020, Tokyo Olympics

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