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Tokyo Olympics: गन के टूटे लीवर ने तोड़ा मनु भाकर का ख्वाब, 17 मिनट हुए बर्बाद और हाथ से फिसल गया मेडल

Tokyo Olympics: मनु भाकर अभी मिक्स्ड डबल्स में भी उतरेंगी. (AP)

Tokyo Olympics: मनु भाकर अभी मिक्स्ड डबल्स में भी उतरेंगी. (AP)

Tokyo Olympics: भारतीय महिला शूटर मनु भाकर (Manu Bhaker) ओलंपिक के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकीं. वे फाइनल में जगह नहीं बना सकी थीं. अब तक शूटिंग के 4 इवेंट हो चुके हैं और भारत को एक भी मेडल नहीं मिला है.

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    टोक्यो. मनु भाकर (Manu Bhaker) टोक्यो ओलंपिक में अच्छी शुरुआत नहीं कर सकीं. 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट के क्वालिफिकेशन से ही वे बाहर हो गई थीं. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मनु ने पिस्टल में खराबी के कारण 75 मिनट में से 17 मिनट गंवा दिए थे, लेकिन उन्होंने इसके बाद भी मैदान नहीं छोड़ा. अपने सभी 60 शॉट पूरे किए. वे क्वालिफिकेशन में  575 के स्कोर के साथ 12वें स्थान पर रहीं. भारत को शूटिंग में (Tokyo Olympics) में अब तक एक भी मेडल नहीं मिला है. 4 इवेंट पूरे हो चुके हैं.

    मुकाबले के दौरान मनु भाकर की पिस्टल का कॉकिंग लीवर टूट गया था. इस कारण वे अपनी गन को लोड नहीं कर सकती थीं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, कॉकिंग लीवर को खोलकर ही बैरल में गोली रखी जाती है. इसके बाद ही शूटर शॉट लगा सकता है. लीवर बंद नहीं होने पर शॉट नहीं लगाया जा सकता. मनु भाकर के साथ ऐसा ही हुआ. लीवर टूट गया था और वे शॉट नहीं लगा सकती थीं. टीम के साथ टोक्याे गए नेशनल पिस्टल टीम के कोच और कॉमनवेल्थ गेम्स के पूर्व गोल्ड मेडलिस्ट रौनक पंडित ने कहा, ‘इस तरह की गड़बड़ी एक दुर्लभ घटना थी. कॉकिंग लीवर मेटल का बना होता है और इसके टूटने की उम्मीद नहीं थी. हालांकि हमारे पास एक अतिरिक्त पिस्टल थी. इस कारण हम इसमें बदलाव कर सके.’

    शूटर को अतिरिक्त समय नहीं मिलता

    नियम के अनुसार, एक खिलाड़ी को सही कारण होने के बाद भी राउंड पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाता है. एक शूटर को 6 सीरीज के 60 शॉट मारने के लिए 75 मिनट मिलते हैं. लेकिन मनु भाकर को पिस्टल में खराबी के कारण अंतिम 38 मिनट में 44 शॉट मारने थे. 17 मिनट के ब्रेक के कारण उनकी लय बिगड़ गई. वे अपनी पुरानी पिस्टल से ही सहज थीं, इस कारण उसमें ही बदलाव करना पड़ा.

    यह भी पढ़ें: Tokyo Olympics: भारतीय पुरुष तीरंदाजी टीम क्वार्टर फाइनल में, भवानी देवी ने पहला मैच जीतकर रचा इतिहास

    अंतिम सीरीज में कर सकती थीं वापसी

    मनु भाकर ने अंतिम सीरीज के अंतिम शॉट में 8 अंक बनाए. अगर वे 10 अंक का स्कोर करती तो दो अन्य खिलाड़ियों के साथ उनका स्कोर बराबर हो जाता. ऐसे में तीन खिलाड़ियों के बीच शूट ऑफ होता और दो खिलाड़ी को फाइनल्स में मौका मिलता. पूर्व ओलंपिक मेडलिस्ट गगन नारंग ने भी माना एक बार लय बिगड़ने के बाद वापसी करना आसान नहीं होता, क्योंकि आपके ऊपर समय का दबाव आ जाता है.

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