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Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ी या टीम कोरोना संक्रमित हुई तो क्या होगा? जानिए इससे जुड़े नियम

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ी या टीम कोरोना संक्रमित हुई तो क्या होगा? जानिए इससे जुड़े नियम

Tokyo Olympics: इन खेलों के लिए भारत का 228 सदस्यीय दल जाएगा. इसमें 67 पुरुष और 52 महिला खिलाड़ी शामिल हैं. (Hockey India Twitter)

Tokyo Olympics: इन खेलों के लिए भारत का 228 सदस्यीय दल जाएगा. इसमें 67 पुरुष और 52 महिला खिलाड़ी शामिल हैं. (Hockey India Twitter)

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (IOC) ने स्पोर्ट-स्पेसिफिक रेगुलेशन(Sport Specific Regulation) जारी किए हैं. इसमें बताया गया है कि किसी खिलाड़ी या टीम के कोरोना संक्रमित होने की सूरत में क्या होगा. आइए समझते हैं कि कोरोना से जुड़े क्या नियम टोक्यो ओलंपिक में लागू होंगे और इसका भारतीय दल पर क्या असर पड़ सकता है.

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक(Tokyo Olympics) शुरू होने में अब हफ्ते भर का ही वक्त बचा है. लेकिन कोरोना वायरस की चिंता सबको सता रही है. अगर इवेंट के दौरान कोई खिलाड़ी वायरस की चपेट में आया तो क्या होगा. इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (IOC) ने इंटरनेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन( International Sports Federations) के साथ मिलकर ‘स्पोर्ट-स्पेसिफिक रेगुलेशन’ यानी खेल-विशिष्ट नियम (SAR) जारी किए हैं.

    इसमें बताया गया है कि अगर टोक्यो ओलंपिक शुरू होने के बाद कोई खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है, तो क्या होगा. हालांकि, इस रेगुलेशन में भी कई सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हुए हैं. खास तौर पर टीम और एक से ज्यादा दिन चलने वाले इवेंट को लेकर.

    सिंगल और मल्टी डे इवेंट में क्या होगा?
    सामान्य तौर पर हर एथलीट या टीम जिसे कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रतियोगिता से हटना पड़ता है, तो अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा और उन्हें डीएनएस (शुरुआत नहीं कर पाए) के रूप में चिन्हित किया जाएगा. एथलीट्स का खेल गांव में रोजाना कोरोना टेस्ट होगा. इसलिए शूटिंग, वेटलिफ्टिंग और मैराथन जैसे सिंगल-डे इवेंट (एक दिन में खत्म होने) में खिलाड़ियों को उस दिन की कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी. हालांकि, अधिकांश खेलों में जहां इवेंट कई दिनों तक चलते हैं, उसमें अगर कोई खिलाड़ी या टीम कोरोना संक्रमित पाई जाती है, तो टीम या खिलाड़ी को बदला जा सकेगा.

    ट्रैक एंड फील्ड इवेंट के फाइनल में खिलाड़ी रिप्लेस होगा
    जैसे हॉकी, रग्बी-7 और हैंडबॉल में, अगर कोई टीम नॉकआउट मैच के पहले दौर के बाद वायरस की चपेट में आती है, तो उसे हटाया जा सकेगा और दूसरे राउंड में पहुंचने के लिए उस टीम ने जिसे हराया था, वो उसकी जगह लेगी. वहीं, व्यक्तिगत स्पर्धाओं की बात करें. तो थोड़ा सा बदलाव होगा. जैसे ट्रैक एंड फील्ड के फाइनल में पहुंचा एथलीट कोरोना संक्रमित पाया जाता है, तो उस खिलाड़ी की जगह फाइनल में अगले सर्वोच्च रैंक वाले एथलीट को जगह मिलेगी.

    उदाहरण के लिए अगर 100 मीटर रेस के फाइनल में पहुंचे 8 एथलीट में से एक रेस के दिन वायरस से संक्रमित पाया जाता है, तो सेमीफाइनल में 9वें स्थान पर रहा खिलाड़ी उसकी जगह लेगा. लेकिन बैडमिंटन, टेनिस और बॉक्सिंग जैसे खेलों में जहां अगर खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव हो जाता है, तो विपक्षी खिलाड़ी को बाय या वॉकओवर मिल जाएगा. इन इवेंट में संक्रमित खिलाड़ी का रिप्लेसमेंट नहीं होगा. अगर ऐसा फाइनल में होता है, तो कोरोना संक्रमित पाए जाने वाले खिलाड़ी को सिल्वर और विपक्षी को गोल्ड मेडल दिया जाएगा.

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    बॉक्सिंग और कुश्ती एक जैसे खेल, लेकिन नियम अलग
    बॉक्सिंग और कुश्ती दोनों को कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स माना जाता है. इसके बावजूद कोरोना संक्रमित खिलाड़ी को लेकर दोनों खेलों के लिए अलग नियम तय किए गए हैं. अगर कुश्ती इवेंट के फाइनल से पहले कोई रेसलर संक्रमण की जद में आता है, तो स्थिति अलग होगी. संक्रमित पाए गए खिलाड़ी को गोल्ड मेडल के मुकाबले से हटा दिया जाएगा और उसकी जगह वो खिलाड़ी फाइनल में उतरेगा, जिसे संक्रमित खिलाड़ी ने एक दिन पहले सेमीफाइनल में शिकस्त दी थी. नियमों के तहत रिप्लेसमेंट वाले खिलाड़ी को वायरस से संक्रमित हुए पहलवान का 'क्लोज कॉन्टैक्ट' नहीं माना जाएगा.

    टीम इवेंट से जुड़े खेलों के लिए भी अलग-अलग नियम
    हैंडबॉल से जुड़े ‘स्पोर्ट-स्पेसिफिक रेगुलेशन' में यह लिखा गया है कि अगर फाइनल के लिए क्वालिफाई करने वाली टीम कोरोना के कारण खिताबी मुकाबले का हिस्सा बनने की स्थिति में नहीं है, तो उस सूरत में सेमीफाइनल हारने वाली टीम फाइनल खेलेगी. इस मामले में ब्रॉन्ज मेडल का मैच भी खेला जाएगा.

    हॉकी के लिए भी नियम लगभग ऐसे ही हैं. लेकिन इसमें ये नहीं बताया गया है कि अगर कोरोना के कारण कोई टीम फाइनल नहीं खेल पाती है, तो उसे मेडल मिलेगा या नहीं. यही बात कुश्ती में भी है. नियमों के तहत अगर फाइनल से पहले कोई खिलाड़ी संक्रमित पाया जाता है, तो उसे हटा दिया जाएगा. लेकिन ये साफ नहीं है कि जिस खिलाड़ी को कोरोना संक्रमित होने के कारण फाइनल से हटाया गया है, उसे मेडल मिलेगा या नहीं.

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    भारतीय खिलाड़ियों को सतर्क रहना होगा
    टोक्यो ओलंपिक के दौरान भारतीय वेटलिफ्टर्स, पहलवानों, बैडमिंटन खिलाड़ियों और मुक्केबाजों को सतर्क रहना होगा. क्योंकि अगर वो कोरोना संक्रमित पाए जाते हैं, तो उनकी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी. वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू से पदक की काफी उम्मीदें हैं. उनका इवेंट भी एक दिन का है. ऐसे में उन्हें कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचना होगा. वहीं, कुश्ती में बजरंग पूनिया औऱ विनेश फोगाट से भारत की उम्मीदें जुड़ी हैं. इनके इवेंट में अगर कोई पहलवान कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है, तो विपक्षी को बाय मिल जाएगा. हालांकि, ये अगर फाइनल में पहुंचने के बाद कोरोना संक्रमित होते हैं तो सेमीफाइनल में इनसे हारने वाला खिलाड़ी फाइनल खेलेगा.

    बॉक्सिंग, बैडमिंटन और शूटिंग में कोई रिप्लेसमेंट नहीं है. हालांकि, शूटिंग के मिक्स्ड इवेंट में जरूर थोड़ी राहत है. अगर इस इवेंट से पहले भारत का कोई निशानेबाज कोरोना की चपेट में आता है, तो उसकी जगह दूसरा शूटर उस इवेंट में शामिल हो सकेगा.

    हर टीम के साथ एक कोविड लायजन ऑफिसर रहेगा
    टोक्यो ओलंपिक में हर टीम के साथ एक कोविड लायजन ऑफिसर रहेगा. इस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वो खिलाड़ियों का सैंपल इकठ्ठा करके उसे जांच के लिए तय वक्त पर लैब में भेजे. भारतीय दल के सीएलओ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रेम चंद वर्मा हैं.undefined

    Tags: COVID 19, Olympics, Olympics 2020, Tokyo 2020, Tokyo Olympics, Tokyo Olympics 2020, Tokyo Olympics Rules

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