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Tokyo Olympics: कंडक्टर पिता की बेटी से देश को उम्मीदें, कोच ने गुरु दक्षिणा में मांगा ओलंपिक मेडल

Tokyo Olympics: प्रियंका गोस्वामी से कोच ने मांगा ओलंपिक मेडल (PC-प्रियंका गोस्वामी इंस्टाग्राम)

Tokyo Olympics: प्रियंका गोस्वामी से कोच ने मांगा ओलंपिक मेडल (PC-प्रियंका गोस्वामी इंस्टाग्राम)

मेरठ को अब ओलंपिक सिटी भी कहा जाने लगा है. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में मेरठ के 5 खिलाड़ियों ने क्वालिफाई किया है, जिनमें से एक प्रियंका गोस्वामी (Priyanka Goswami) भी हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ भी शहर की तारीफ करते नहीं थकते.

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नई दिल्ली. मेरठ को यूं तो स्पोर्ट्स सिटी के तौर पर दुनिया जानती है.लेकिन अब इस शहर को ओलंपिक सिटी भी कहा जाने लगा है. आलम ये है कि ख़ुद मुख्यमंत्री भी इस शहर के मुरीद हो गए हैं. यूपी से टोक्यो ओलम्पिक जा रहे खिलाड़ियों से संवाद करते हुए सीएम ने कई बार मेरठ का ज़िक्र किया. हो भी क्यों न यूपी से टोक्यो (Tokyo Olympics) जा रहे दस खिलाड़ियों में से पांच मेरठ से जो हैं. मेरठ की प्रियंका गोस्वामी (Priyanka Goswami). अन्नू रानी सीमा पुनिया सौरव चौधरी और वंदना कटारिया टोक्यो ओलम्पिक में भारत का तिरंगा शान से लहराने को बेताब है. इन सब के संघर्ष की लंबी दास्तान है. मेरठ की रहने वाली प्रियंका गोस्वामी को दस साल से तराश रहे कोच का कहना है कि उन्होंने शिष्या से कहा है कि उन्हें गुरु दक्षिणा में मेडल चाहिए.

क्रान्ति की नगरी मेरठ खेल की दुनिया में क्रान्ति कर रही है.मेरठ को यूं तो स्पोर्ट्स सिटी के तौर पर दुनिया जानती है लेकिन अब इस शहर को लोग ओलम्पिक सिटी कहने लगे हैं. अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि मेरठ के पांच खिलाड़ी इस बार टोक्यो ओलम्पिक में भारत का तिरंगा शान से लहराने को बेताब है. यूपी से टोक्यो ओलम्पिक जा खेलने जा रहे दस खिलाडि़यों में से पांच मेरठ से हैं. इन सभी खिलाड़ियों से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ख़ास बातचीत की. मुख्यमंत्री ने इस दौरान मेरठ ज़िले की तारीफ करते हुए कहा कि इसीलिए मेरठ को खेल विश्वविद्यालय का भी तोहफा दिया गया है. यहां अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी.उन्होंने वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसीलिए मेरठ में स्पोर्ट्स को ओडीओपी के तहत चुना गया है.

प्रियंका गोस्वामी के पिता थे कंडक्टर
इधर मुख्यमंत्री से बात करने के बाद जब टोक्यो ओलम्पिक जा रही रेस वॉकर प्रियंका गोस्वामी के परिजनों से हमने बात की तो वो फफक कर रो पड़े. प्रियंका के पिता मदनपाल गोस्वामी उन दिनों को याद करने लगे जब वो रोड़वेज़ की बस में टिकट टिकट आवाज़ लगाया करते थे. और आज उन्हीं की बेटी ओलम्पिक का टिकट पा चुकी है. वहीं प्रियंका की मां अनीता गोस्वामी की आंखें उस वक्त को याद करते करते नम हो जाती हैं. जब घर में प्रियंका पैदा हुई थी तो कई रुढि़वादी सोच के शिकार लोग ये कहने लगे थे कि अरे बेटी पैदा हो गई. आज वही बेटी टोक्यो में भारत का तिरंगा शान से लहराने को बेताब है.

कोच ने गुरु दक्षिणा में मांगा ओलंपिक मेडल
पिछले दस साल से बेरोज़गारी से जंग लड़ रहे अपने पिता से टोक्यो ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई कर चुकी रेस वॉकर बेटी ने वादा किया है कि बस कुछ दिनों का इंतज़ार और. और पदक जीतते ही दुनिया बदल जाएगी. प्रियंका ने सौगंध ली कि वो अपने पिता के एक एक आंसुओं को वो मोती में तब्दील करेगी. प्रियंका के कोच गौरव का कहना है कि बिटिया से वो बस गुरु दक्षिणा में ओलम्पिक में पदक चाहते हैं. गौरव त्यागी का कहना है कि प्रियंका ने उनके किसी आदेश को कभी मना नहीं किया है. और इस बार उन्हें ओलम्पिक पदक के रुप में गुरु दक्षिणा मिलेगी.

प्रियंका हैं बेहद टैलेंटेड
प्रियंका ने सबसे पहले साल 2015 में रेस वॉकिंग की दुनिया मे तिरुअनंतपुरुम में आयोजित हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. मैंगलोर में फेडरेशन कप में भी तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पर कब्जा जमाया. साल 2017 में दिल्ली में हुई नेशनल रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में इस एथलीट ने कमाल करते हुए अपने वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए गोल्ड मेडल जीता. 2018 में खेल कोटे से रेलवे में प्रियंका को क्लर्क की नौकरी मिल गई. परिवार की आर्थिक हालत सुधरी तो इस बिटिया का उत्साह और बढ़ गया और बीती फरवरी में मेरठ की अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रियंका गोस्वामी ने रांची में चल रहे राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ओलंपिक के लिए क्वॉलीफाई कर लिया . यहां अंतरराष्ट्रीय रेस वॉकर प्रियंका गोस्वामी ने नए रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता.

प्रियंका गोस्वामी ने रांची में हुए इवेंट में 20 किलोमीटर की वॉक एक घंटा अट्ठाईस मिनट पैंतालिस सेकेंड में पूरा कर नया रिकॉर्ड बनाया. इससे पहले यह रिकॉर्ड पिछले साल राजस्थान की एथलिट भावना जाट ने बनाया था. उन्‍होंने 20 किलोमीटर की पैदल चाल एक घंटा उनतीस मिनट चौव्वन सेकेंड में में पूरी की थी. अब खेलों के महाकुंभ ओलम्पिक में पदक जीतने के सपने को हकीकत में बदलने के लिए प्रियंका मैदान में पसीना बहा रही हैं. हमें उम्मीद हैं कि देश की उम्मीदों पर ये बिटिया बिलकुल खरी उतरेगी. और सपनों को हक़ीकत में तब्दील कर देगी और कोच को वो गुरु दक्षिणा अवश्य देंगी. ऑल द बेस्ट प्रियंका गोस्वामी.

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