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Tokyo Olympics: जिस कमरे में रहकर योगेश्वर ने जीता ओलंपिक मेडल, रवि ने उसी से तय किया टोक्यो का सफर

Tokyo Olympics: भारतीय पहलवान रवि कुमार के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद उनसे मेडल की उम्मीदें बढ़ गई हैं. वो हरियाणा के सोनीपत से आते हैं और योगेश्वर दत्त से भी उनका खास कनेक्शन है. (AFP)

Tokyo Olympics: भारतीय पहलवान रवि कुमार के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद उनसे मेडल की उम्मीदें बढ़ गई हैं. वो हरियाणा के सोनीपत से आते हैं और योगेश्वर दत्त से भी उनका खास कनेक्शन है. (AFP)

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में बुधवार का दिन भारतीय रेसलिंग के लिए शानदार रहा. पुरुषों के फ्रीस्टाइल के 57 किलो भार वर्ग में रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar) सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे. वो हरियाणा के सोनीपत से आते हैं. जिसे देश में रेसलिंग की नर्सरी के रूप में जाना जाता है. उनके गांव नाहरी से भी कई ओलंपियन निकले हैं. उन्हें देखकर ही रवि भी अखाड़े में उतरे और आज पदक के इतने करीब पहुंचे हैं. दो ओलंपिक मेडल जीतने वाले भारतीय रेसलर सुशील कुमार (Sushil Kumar) उनके आदर्श हैं.

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में बुधवार का दिन भारतीय रेसलिंग के लिए शानदार रहा. पुरुषों के फ्रीस्टाइल के 57 किलो भार वर्ग में रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar) सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे. उन्होंने पहले प्री क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के पहलवान ऑस्कर एडुवार्डो को शिकस्त दी और इसके बाद क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जॉर्जी वैलेंटिनोव को 14-4 से हराया. रवि का यह पहला ओलंपिक है और उन्होंने जिस तरह का दमदार खेल दिखाया है. ऐसे में उनसे पदक की उम्मीदें बढ़ गई हैं. रवि 2019 के वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के ब्रॉन्ज भी मेडलिस्ट रहे हैं.

    रवि हरियाणा के सोनीपत से आते हैं. जिसे देश में कुश्ती की नर्सरी कहा जाता है. यहां के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ट्रेनिंग सेंटर में देश के कई दिग्गज पहलवान तैयार हुए हैं. यहीं के नाहरी गांव के रहने वाले रवि को पिता ने 6 साल की उम्र में कुश्ती से जोड़ा था. उन्होंने गांव में ही शुरुआती दांव-पेंच सीखे और 10 साल की उम्र के बाद से इस खेल को संजीदगी से लेना शुरू किया.

    रवि के गांव से कई ओलंपियन निकले हैं
    किसान के पुत्र तथा शांत और शर्मीले मिजाज के रवि इस गांव के तीसरे ओलंपियन हैं. उनसे पहले महावीर सिंह (मॉस्को ओलंपिक-1980 और लॉस एंजिल्स ओलंपिक-1984) तथा अमित दहिया (लंदन ओलंपिक-2012) भी इसी गांव के रहने वाले हैं. उनके गांव में कुश्ती काफी लोकप्रिय है. ओलंपियन और विश्व चैम्पियनशिप में मेडल जीतने वाले दिग्गज पहलवानों को देखते हुए वो बड़े हुए और इसी वजह से इस खेल से जुड़े.

    रवि ने योगेश्वर के कमरे में रहकर ट्रेनिंग की
    23 साल के रवि लंबे वक्त से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ही ट्रेनिंग कर रहे हैं. वो स्टेडियम के जिस कमरे में रहते हैं, उसमें पहले लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) रहते थे. एक इंटरव्यू में रवि इसका खुलासा भी कर चुके हैं. उन्होंने इस कमरे को लेकर कहा था कि छत्रसाल स्टेडियम में सालों में जिस कमरे में रहा, उसमें पहले योगेश्वर रहते थे. यह उनके लिए बनाया गया था. उन्होंने इसी कमरे में रहकर काफी वक्त तक तैयारी की. उनके छत्रसाल स्टेडियम छोड़ने के बाद यह कमरे मुझे दिया गया. मुझे इस कमरे में रहना काफी अच्छा लगता है.

    टोक्यो ओलंपिक से पहले रूस में ट्रेनिंग की
    टोक्यो ओलंपिक पिछले साल जुलाई में ही होने थे. इसलिए रवि तैयारी के लिहाज से रूस चले गए थे और वहां उन्होंने कोच मुराद गैदारोव की देखरेख में काफी महीनों तक अभ्यास किया था. रूस में मिली ट्रेनिंग को लेकर उन्होंने कहा था कि यहां मुझे काफी सीखने को मिला. क्योंकि मैं रोज नए पहलवानों से लड़ता था और कोच मुराद मेरे सामने रोज नई चुनौती रखते थे. इससे मुझे अपने खेल को सुधारने और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनान में काफी मदद मिली.

    गांव वालों से है रवि को मेडल की उम्मीद
    रवि के नाहरी गांव के 15 हजार लोगों को भी उनसे पदक की उम्मीदे हैं. इसके पीछे एक खास मकसद है. क्योंकि गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. यहां पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है. बिजली भी कुछ घंटों के लिए ही आती है. ऐसे में गांव वालों को उम्मीद है कि अगर रवि टोक्यो से मेडल जीतकर लौटते हैं, तो उनके गांव का कायापलट हो जाएगा. क्योंकि अतीत में ऐसा हो चुका है.

    रवि के मेडल से जुड़ी गांव की खास मुराद
    महावीर सिंह के ओलंपिक में दो बार देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने उनसे उनकी इच्छा के बारे में पूछा तो उन्होंने गांव में पशु चिकित्सालय खोलने का आग्रह किया. मुख्यमंत्री ने इस पर अमल किया और पशु चिकित्सालय बन गया. अब गांव वालों का मानना है कि यदि रवि टोक्यो में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो नाहरी भी सुर्खियों में आ जाएगा तथा सरकार उस गांव में कुछ विकास परियोजनाएं शुरू कर सकती है जहां 4000 परिवार रहते हैं.

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