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Tokyo Olympics: 5 साल की उम्र में अनाथ हुई रेवती रिले रेस में उतरेंगी, नानी ने मजदूरी कर यहां तक पहुंचाया

Tokyo Olympics: रेवती वीरामनी पहली बार ओलंपिक में उतर रही हैं. (PTI)

Tokyo Olympics: रेवती वीरामनी पहली बार ओलंपिक में उतर रही हैं. (PTI)

Tokyo Olympics: महिला धावक रेवती वीरामनी (Ravathi Veeramani) ओलंपिक (Tokyo Olympics) के लिए तैयार हैं. लेकिन उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. गेम्स 23 जुलाई से 8 अगस्त तक होने हैं. भारत के 120 खिलाड़ी 18 खेलों में दमखम दिखाएंगे.

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    नई दिल्ली. पांच साल की उम्र में अनाथ हुई रेवती वीरामनी (Ravathi Veeramani) को उनकी दिहाड़ी मजदूर नानी ने पाला. रेवती को शुरुआत में नंगे पैर दौड़ना पड़ा, क्योंकि उनके पास जूते खरीदने के पैसे नहीं थे. अब यह वे ओलंपिक (Tokyo Olympics) में दौड़ने का सपना साकार करने जा रही हैं. तमिलनाडु के मदुरै जिले के सकीमंगलम गांव की 23 साल की रेवती 23 जुलाई से शुरू हो रहे टोक्यो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने जा रही भारत की चार गुणा 400 मीटर मिश्रित रिले टीम का हिस्सा हैं.

    रेवती वीरामनी ने जिन मुश्किल हालात का सामना किया उन्हें याद करते हुए कहा, ‘मुझे बताया गया था कि मेरे पिता के पेट में कुछ तकलीफ थी, जिसके कारण उनका निधन हो गया. इसके छह महीने बाद दिमागी बुखार से मेरी मां भी चल बसी. जब उनकी मौत हुई तो मैं छह साल की भी नहीं थी.’ उन्होंने कहा, ‘मुझे और मेरी बहन को मेरी नानी के अराम्मल ने पाला. हमें पालने के लिए वह बहुत कम पैसों में भी दूसरों के खेतों और ईंट भट्ठों पर काम करती थी.’

    नानी ने काम पर भेजने से कर दिया इंकार

    रेवती वीरामनी ने कहा, ‘हमारे रिश्तेदारों ने नानी को कहा कि वह हमें भी काम पर भेजें, लेकिन उन्होंने इनकार करते हुए कहा कि हमें स्कूल जाना चाहिए और पढ़ाई करनी चाहिए.’ रेवती और उनकी बहन 76 साल की अपनी नानी के जज्बे के कारण स्कूल जा सकीं. दौड़ने में प्रतिभा के कारण रेवती को रेलवे के मदुरै खंड में टीटीई की नौकरी मिल गई, जबकि उनकी छोटी बहन अब चेन्नई में पुलिस अधिकारी है.

    नेशनल में नंगे पैर दौड़ लगाई

    तमिलनाडु के खेल विकास प्राधिकरण के कोच के कन्नन ने स्कूल में रेवती की प्रतिभा को पहचाना. रेवती की नानी शुरुआत में उन्हें दौड़ने की स्वीकृति देने से हिचक रही थी, लेकिन कन्नन ने उन्हें मनाया और रेवती को मदुरै के लेडी डोक कॉलेज और छात्रावास में जगह दिलाई. रेवती वीरामनी ने कहा, ‘मेरी नानी ने कड़ी मेहनत करके हमें पाला. मैं और मेरी बहन उनके कारण बच पाए, लेकिन मेरी सारी खेल गतिविधियां कन्नन सर के कारण हैं. मैं कॉलेज प्रतियोगिताओं में नंगे पैर दौड़ी और 2016 में कोयंबटूर में राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप के दौरान भी. इसके बाद कन्नन सर ने सुनिश्चित किया कि मुझे सभी जरूरी किट, पर्याप्त खान-पान मिले और अन्य जरूरतें पूरी हों.’

    बाद में 400 मीटर रेस को चुना

    रेवती वीरामनी ने 2016 से 2019 तक कन्नन के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग की और फिर उन्हें पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) में राष्ट्रीय शिविर में चुना गया है. कन्नन के मार्गदर्शन में 100 मीटर और 200 मीटर में चुनौती पेश करने वाली रेवती को गलीना बुखारिना ने 400 मीटर में हिस्सा लेने को कहा. बुखारिना राष्ट्रीय शिविर में 400 मीटर की कोच थीं. उन्होंने कहा, ‘गलीना मेडम ने मुझे 400 मीटर में दौड़ने को कहा. कन्नन सर भी राजी हो गए. मुझे खुशी है कि मैंने 400 मीटर में हिस्सा लिया और मैं अब अपने पहले ओलंपिक में जा रही हूं.’

    रेवती वीरामनी ने कहा, ‘कन्नन सर ने मुझे कहा था कि एक दिन मैं ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करूंगी और चीजें काफी तेजी से हुईं. यह सपना साकार होने की तरह है, लेकिन मैंने इसके इतनी जल्दी सच होने की उम्मीद नहीं की थी. मैं ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी और मैं यही आश्वासन दे सकती हूं.’

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