Tokyo Olympics: रोहन बोपन्ना ने लगाए आरोप तो एआईटीए ने कहा- खुद क्वालिफाई क्यों नहीं किया?

Tokyo Olympics: रोहन बोपन्ना (दाएं) ने एआईटीए पर आरोप लगाए. (Divij Sharan/Instagram)

Tokyo Olympics: ओलंपिक गेम्स के मुकाबले 23 जुलाई से शुरू होने हैं. लेकिन टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) क्वालिफाई नहीं कर सके हैं. टेनिस में सिर्फ 1996 में भारत को एक मेडल मिला था. लिएंडर पेस ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

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    नई दिल्ली. युगल टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) ने दिविज शरण के साथ टोक्यो ओलंपिक के लिए कट हासिल करने में विफल रहने के बाद सोमवार को एआईटीए (AITA) पर सभी को गुमराह करने का आरोप लगाया कि उसने सुमित नागल के साथ उनकी जोड़ी बनाकर कहा कि क्वालिफिकेशन हासिल का मौका है. एआईटीए ने बोपन्ना पर पलटवार करते हुए कहा कि उसने केवल उनकी मदद करने की कोशिश की, क्योंकि वह अपने दम पर क्वालिफाई करने में नाकाम रहे थे.

    एआईटीए ने टोक्यो खेलों में पुरुष युगल स्पर्धा के लिए पहले रोहन बोपन्ना और दिविज शरण के नाम की नामांकन की घोषणा की थी. बोपन्ना (विश्व रैंकिंग 38) और शरण (विश्व रैंकिंग 75) की संयुक्त रैंकिंग 113 क्वालिफिकेशन हासिल करने में नाकाम रही. अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (ITF) के अनुसार 16 जुलाई की समय सीमा से कुछ दिन पहले यह जोड़ी विकल्प की सूची में पांचवें स्थान पर थी.

    रोहन बोपन्ना और सानिया का ट्वीट.


    सुमित नागल ने इसके बाद पुरुष एकल के लिए क्वालिफाई कर लिया. कोविड-19 महामारी के कारण ओलंपिक में टेनिस में युगल मुकाबलों को उन खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने एकल के लिए क्वालिफाई किया है. एआईटीए को पुरुष युगल में नागल के साथ बोपन्ना की जोड़ी बना दी. रोहन बोपन्ना ने ट्वीट किया, ‘आईटीएफ ने कभी भी सुमित नागल और मेरे लिए जोड़ी को स्वीकार नहीं किया. आईटीएफ स्पष्ट था कि नामांकन की समय सीमा (22 जून) के बाद चोट/बीमारी के बिना किसी भी बदलाव की अनुमति नहीं थी. एआईटीए ने खिलाड़ियों, सरकार, मीडिया और बाकी सभी को यह कहकर गुमराह किया है कि हमारे पास अभी भी मौका है.’

    हमने आईटीएफ से किया था संपर्क

    एआईटीए महासचिव अनिल धूपर ने कहा कि उन्होंने नामांकन बदलने के लिए आईटीएफ से संपर्क किया. धूपर ने कहा, ‘हमने आईटीएफ को लिखा था कि हम नामांकन बदलना चाहते हैं और अब नागल के साथ बोपन्ना की जोड़ी बनाना चाहते हैं. इसलिए कृपया हमें सलाह दें कि कैसे आगे बढ़ना है. उन्होंने हमें इसका जवाब दिया कि नामांकन को केवल चोट और बीमारी या किसी विशेष परिस्थिति में ही बदले जा सकते है.’ टेनिस में सिर्फ 1996 में भारत को एक मेडल मिला था. लिएंडर पेस ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

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    सानिया मिर्जा ने भी उठाए सवाल

    उन्होंने सवाल किया, ‘ऐसे में किसी को गुमराह करने का सवाल ही कहां है. हमें ऐसा कर के क्या फायदा होगा? सच तो यह है कि रोहन बोपन्ना की रैंकिंग क्वालिफिकेशन के लिहाज से काफी अच्छी नहीं थी. हमने केवल उसकी मदद करने की कोशिश की, ताकि वह खेलों में प्रतिस्पर्धा कर सके. उन्होंने अपने दम पर क्वालिफाई क्यों नहीं किया?’ रोनह बोपन्ना के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए सानिया मिर्जा ने कहा, ‘क्या? अगर यह सच है तो यह बिल्कुल हास्यास्पद और शर्मनाक है. इसका मतलब यह भी है कि हमने मिक्स्ड डबल्स में मेडल के एक अच्छे मौके को गंवा दिया. अगर आप और मैं योजना के अनुसार खेलते तो मौका बन सकता था. हम दोनों को बताया गया कि आपके और सुमित के नाम दिए गए हैं.’

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