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Olympics vs Paralympics: 100 करोड़ खर्च करने के बाद भी 15 शूटर नहीं जीत सके मेडल, अकेले अवनि ने जीत लिया गोल्ड

Tokyo Olympics vs Paralympics: ओलंपिक की तैयारियों पर 5 साल में करीब 1 हजार करोड़ रुपया खर्च हुआ. लेकिन ओलंपिक के मुकाबले पैरालंपिक खेलों में भारत को ज्यादा मेडल मिलते नजर आ रहे हैं. (AP/SAI Media Twitter)

Tokyo Olympics vs Paralympics: ओलंपिक की तैयारियों पर 5 साल में करीब 1 हजार करोड़ रुपया खर्च हुआ. लेकिन ओलंपिक के मुकाबले पैरालंपिक खेलों में भारत को ज्यादा मेडल मिलते नजर आ रहे हैं. (AP/SAI Media Twitter)

Olympics vs Paralympics: भारतीय खेल के इतिहास में 2021 यादगार रहेगा. कोरोना के कारण भले ही टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) 1 साल के लिए टाले गए. लेकिन इस देरी का भारतीय खिलाड़ियों पर असर नहीं पड़ा. भारत ने पहले टोक्यो ओलंपिक में रिकॉर्ड 7 पदक जीते और कामयाबी का यही सिलसिला पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) में भी बरकरार है. हालांकि, अगर दोनों खिलाड़ियों की तैयारियों, विदेश में ट्रेनिंग की अगर तुलना करें तो भारत के पैरा एथलीट्स का प्रदर्शन ज्यादा बेहतर रहा. इस बार पैरालंपिक में 54 खिलाड़ियों का दल गया है. इसमें से 7 पदक जीत चुके हैं. जबकि टोक्यो ओलंपिक में 121 खिलाड़ियों में से 7 मेडल आए थे.

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    नई दिल्ली. भारतीय खेल के इतिहास में 2021 यादगार रहेगा. कोरोना के कारण भले ही टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) 1 साल के लिए टाले गए. लेकिन इस देरी का भारतीय खिलाड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ा. भारत ने अपने 120 साल के ओलंपिक इतिहास में पहली बार एक ही ओलंपिक में 7 पदक जीते और इन खेलों का दूसरा व्यक्तिगत गोल्ड मेडल भी इसी गेम्स में आया. नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने जेवलिन थ्रो में गोल्ड जीतकर यह कारनामा किया था. उनसे पहले अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक (Beijing Olympics) में शूटिंग में स्वर्णिम सफलता हासिल की थी.

    अभी टोक्यो ओलंपिक में मिली ऐतिहासिक कामयाबी के जश्न का शोर थमा भी नहीं था कि फिर टोक्यो से सफलता की कहानियां एक-एक कर सामने आने लगीं. इस बार देश का मान पैरा एथलीट्स ने बढ़ाया (Tokyo Paralympics) है. अकेले आज यानी सोमवार को ही इन एथलीट्स ने देश की झोली में 2 गोल्ड समेत 5 मेडल डाले.

    देश में खेलों को लेकर माहौल बदला
    ओलंपिक और पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों की इस सफलता से एक बात तो साफ हो गई है कि देश में धीरे-धीरे खेल को लेकर माहौल बदल रहा है. सरकार, कॉरपोरेट सभी एक ही दिशा में सोचने लगे हैं. आज खिलाड़ियों को विदेश में ट्रेनिंग, विदेशी कोच, अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं. सरकार ने भी खिलाड़ियों के लिए खजाना खोल दिया है. फिर चाहें ओलंपिक या पैरालंपिक की बात हो. इसका असर भी मैदान पर दिखने लगा है.

    5 साल में 1 हजार करोड़ आवंटित हुए
    आइए आपको बताते हैं कि खेल मंत्रालय (Sports Ministry) ने टोक्यो ओलंपिक या पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) के लिए कितना बजट आवंटित किया था. इसके अलावा टॉप्स स्कीम के तहत कितनी राशि दी गई. खेल मंत्रालय के मुताबिक, 2016 से 2021 के बीच अलग-अलग ओलंपिक और पैरालंपिक कमेटी से जुड़े 18 नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (National Sports Federation) को 1091.52 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. खास बात है कि सभी 54 खिलाड़ी सरकार की टॉप्स योजना का हिस्सा थे.

    ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी टॉप्स (TOPS) के तहत बीते 5 साल में 18 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए 78.13 करोड़ मंजूर किए गए थे. 2016 से अलग-अलग 7 ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले 32 एथलीट्स पर टॉप्स स्कीम के तहत 44.41 करोड़ रुपए खर्च हुए.

    TOPS स्कीम ने बदली तस्वीर
    यह राशि राष्ट्रीय कोचिंग शिविर (सीनियर और जूनियर), विदेश में ट्रेनिंग कैंप, कोच और सपोर्ट स्टाफ को इनाम, आधुनिक उपकरणों और तकनीकी कौशल पर खर्च हुई. वर्तमान में, TOPS कोर योजना में 124 व्यक्तिगत एथलीट, इसके अलावा महिला और पुरुष हॉकी टीम (प्रत्येक में 18 खिलाड़ी) हैं. 160 से अधिक एथलीट इस स्कीम की कोर ग्रुप का हिस्सा हैं और 259 अन्य विकास समूह में शामिल हैं, जो 2024 और 2028 ओलंपिक खेलों की तैयारी कर रहे हैं.

    शूटिंग पर 100 करोड़ खर्च होने के बाद भी मेडल नहीं आया
    इससे एक बात तो साफ है कि सरकार ने ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की ट्रेनिंग में पैसे की कमी नहीं आने दी. खिलाड़ियों को हर तरह की सुविधाएं भी दीं. हालांकि, कुछ खेलों पर करोड़ों रुपया खर्च होने के बाद भी टोक्यो ओलंपिक में सफलता नहीं मिली. इसका उदाहरण शूटिंग है.

    2016 से अभी तक 32 ओलंपिक निशानेबाजों पर टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत 44.4 1 करोड़ रुपए खर्च हुए. वहीं, 2019 से अभी तक भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ द्वारा एनुअल कैलेंडर ट्रेनिंग एंड कंपटीशन (एसीटीसी) के 55 करोड़ रुपए खर्च किए गए.

    इसमें अगर विदेशी कोच ओलेग मिखालिव (पिस्टल) और पावेल स्मिर्नोव (राइफल) को हर महीने मिलने वाली 11 लाख रुपए से ज्यादा की तनख्वाह जोड़ दी जाए, तो अकेले शूटिंग पर ही 100 करोड़ रुपए खर्च हुए. लेकिन पहली बार इन खेलों में शामिल हुए रिकॉर्ड 15 निशानेबाजों में से एक भी पदक नहीं जीत पाया.

    अवनि ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली पहली महिला एथलीट
    वहीं, टोक्यो पैरालंपिक में 19 साल की अवनि लेखरा (Avani Lekhara) ने मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. अवनि ओलंपिक या पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वालीं पहली महिला निशानेबाज हैं और उनकी कामयाबी इसलिए भी बड़ी है कि उन्होंने सीधे गोल्ड पर निशाना साधा. उनसे पहले 2008 के बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने गोल्ड जीता था. अवनि भारत की पहली गोल्‍डन गर्ल है. ओलंपिक या पैरालंपिक दोनों में से किसी में भी आज तक भारतीय महिला ने गोल्‍ड नहीं जीता है.

    अवनि लेखरा ओलंपिक-पैरालंपिक खेलों में गोल्ड जीतने वाली छठी भारतीय हैं. उनसे पहले पैरालंपिक खेलों में मुरलीकांत पेटकर, देवेंद्र झाझरिया और मरियप्पन थंगावेलु गोल्ड जीत चुके हैं. सुमित अंतिल ने भी जेवलिन थ्रो में गोल्ड जीत लिया है. वहीं ओलंपिक खेलों में अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में गोल्ड जबकि नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

    भाविना ने टेबल टेनिस में पहला मेडल दिलाया
    अवनि के अलावा भाविना पटेल (Bhavina Patel) ने भी टोक्यो पैरालंपिक में इतिहास रचा है. वो ओलंपिक और पैरालंपिक दोनों के टेबल टेनिस इवेंट में पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं. भाविना ने रविवार को अपने पहले पैरालंपिक खेलों में भारत की झोली में सिल्‍वर मेडल डाला.

    ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में इतने खिलाड़ियों का दल गया
    इस बार टोक्यो ओलंपिक में भारत का 121 सदस्यीय दल गया था, जबकि पैरालंपिक में 9 स्पोर्टिंग इवेंट में भारत के 54 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. इन खेलों में भारत को अब तक 7 पदक मिल चुके हैं. जबकि ओलंपिक में भी भारत को इतने ही पदक मिले थे. लेकिन इसमें 121 सदस्यीय दल गया था.

    अगर हम पुराने आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत ने टोक्यो पैरालंपिक से पहले 12 मेडल जीते हैं. जिसमें 4 स्वर्ण, 4 रजत और 4 कांस्य शामिल हैं. वहीं, ओलंपिक इतिहास में भारत ने 24 खेलों में 35 पदक अपने नाम किए हैं. इसमें से 7 मेडल टोक्यो में मिले थे.

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