विनेश फोगाट ने मैच में बदली कोच की रणनीति और कटाया टोक्‍यो का टिकट

विनेश फोगाट ने मैच में बदली कोच की रणनीति और कटाया टोक्‍यो का टिकट
विनेश फोगाट.(AP Photo)

विनेश फोगाट ने नूर सुल्‍तान में विश्‍व कुश्‍ती चैंपियनशिप में कांस्‍य पदक जीतकर टोक्‍यो ओलिंपिक 2020 का टिकट कटाया.

  • भाषा
  • Last Updated: September 19, 2019, 1:15 PM IST
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नूर-सुल्तान: कुश्ती में टोक्यो ओलिंपिक का टिकट कटाने वाली पहली भारतीय बनी विनेश फोगाट का कहना है कि ओलंपिक क्वालीफिकेशन के अहम मुकाबले में मैट पर परिस्थितियों के अनुरूप उन्होंने कोच द्वारा बताई गई रणनीति में बदलाव किया और जीत हासिल की. विश्व चैम्पियनशिप की ओलिंपिक क्वालीफाइंग बाउट से पहले कोच वूलर एकोस ने विनेश को सारा एन हिल्डरब्रांट से दूर रहने के साथ उसके दायें हाथ को रोकने और पैरों को बचाने की रणनीति सुझाई थी. लेकिन विनेश ने मैट पर परिस्थितियों के हिसाब से इसका उलट किया.

कोच की रणनीति को जरूरत के हिसाब से बदला
विनेश ने 53 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने और टोक्यो ओलिंपिक का टिकट कटाने के बाद पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘कोचों ने कुछ और ही रणनीति सुझाई थी. लेकिन मुझे मैट पर कुछ और ही लगा और मैंने इसी के अनुसार रणनीति में बदलाव किया. मुझे लगा कि वह मुझ पर दबाव बना रही थी लेकिन मैं अंक नहीं गंवा रही थी तो इससे वह थक रही थी.’

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विनेश फोगाट ने 53 किलो भारवर्ग में कांस्‍य पदक जीतकर 2020 ओलिंपिक का टिकट कटाया. (AP Photo)

उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैंने सोचा कि क्यों उसे पैरों पर आक्रमण करने के लिये लुभाऊं और फिर डिफेंस में मजबूत बनी रहूं ताकि इससे वह पूरी तरह थक जाए. मैंने उसे ऐसा करने दिया और फिर उसे रोक लिया. यह मेरे लिए कारगर रहा. मैं जानती हूं कि वह मेरी तुलना में कितनी मजबूत थी.’



5 बार विनेश का पैर पकड़ने के बाद भी नहीं मिला एक अंक
अमेरिका की नंबर एक पहलवान ने रेपेचेज की दूसरी बाउट के दौरान पांच बार विनेश के पैर को पकड़ा था लेकिन वह इसमें से एक में भी अंक नहीं जुटा सकी. विनेश ने कहा, ‘अगर वह कुछ अंक जुटा भी लेती तो वह थक जाती क्योंकि इसके लिये वह अपनी पूरी ताकत झोंक देती.’

'मां नहीं देखती बाउट'
यह भारतीय पहलवान जानती है कि बड़ा पदक जीतने का मतलब क्या होता है. वह रियो ओलिंपिक से पहले लगी चोट को भूली नहीं है जिसके कारण उसे कुछ हफ्तों तक व्हीलचेयर पर रहना पड़ा था. उन्होंने कहा, ‘मेरी मां ने तो मेरी बाउट देखना ही बंद कर दिया था. उसे डर लगता था कि मैं फिर से अपने पैर में चोट लगा लूंगी. हालांकि वह अगर देखती भी तो वह चिल्ला-चिल्लाकर दूसरों के लिए मुश्किल पैदा कर देती कि अरे, मेरी बेटी की टांग छोड़ दे, तोड़ ना दियो.’

पति भी कुश्‍ती के दांवपेच में माहिर
अपने पहलवान पति सोमबीर राठी के बारे में उन्होंने कहा, ‘उन्होंने भले ही पदक नहीं जीते हों लेकिन कुश्ती के दांवपेच में वह बहुत चतुर हैं. वह भी वही चीज कहते जो मेरे विदेशी कोच ने कही थी.’

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