...तो क्या ट्रायल्स में बजरंग को चोटिल करने के लिए रची गई थी साजिश, जिसे फेडरेशन ने कर दिया नाकाम?

वर्ल्ड चैंपियनशिप के ट्रायल्स में बजरंग पूनिया के भार वर्ग में पांच पहवान थे, लेकिन उनका मुकाबला सिर्फ एक के साथ ही हुआ और इस मैच से ही उन्होंने चैंपियनशिप का टिकट हासिल कर लिया...

News18Hindi
Updated: July 27, 2019, 3:08 PM IST
...तो क्या ट्रायल्स में बजरंग को चोटिल करने के लिए रची गई थी साजिश, जिसे फेडरेशन ने कर दिया नाकाम?
बजरंग पूनियां (फाइल फोटो)
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Updated: July 27, 2019, 3:08 PM IST
भारत के स्‍टार पहवान बजरंग पूनियां को अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक में मेडल का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, लेकिन उससे पहले उनके सामने विश्व चैं‌पियनशिप है, जिसके लिए उन्होंने क्वालिफाई कर लिया है. उन्होंने हरफूल को मात देते हुए वर्ल्ड चैंपियन‌शिप का टिकट हासिल किया.

दिल्ली के हुए ट्रायल में 65 किलोग्राम वर्ग में उनके सामने पांच पहलवान उतरने वाले थे, लेकिन उतरा सिर्फ एक ही पहलवान. जिसके पीछे कारण माना जा रहा है ऐसा बजरंग को चोटिल करने की साजिश से बचाने के लिए किया गया. खबरों के अनुसार इस वर्ग में बजरंग को कुछ पहवान चाेटिल कर सकते थे. इन सबसे बचाने के लिए फेडरेशन ने उनके सामने सिर्फ एक ही पहलवान को उतारा.हालांकि पहलवान श्रवण ने फेडरेशन सेकेट्ररी  विनोद तोमर पर आरोप भी लगाया.

शक में घेरे में आया पहलवान

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुता‌बिक शुक्रवार की सुबह एक पहवान शक के घेरे में आया. इसी वजह से भारतीय कुश्ती संघ ने उस पहलवान को खेलने से रोक दिया था. संघ के सूत्र ने कहा कि हमें पहले से ही इसकी जानकारी थी, इसीलिए हमनें उसे रोक दिया.

पहलवान ने लगाया यह आरोप
जबकि इस पहलवान ने कहा कि दो दिन पहले जब उन्होंने सहायक सचिव विनोद तोमर से बात की थी तो उन्होंने कहा कि उनका नाम ट्रायल में है, लेकिन वजन कराने से ठीक पहले उन्होंने मुझे 57 सा 70 किग्रा वर्ग में लड़ने के लिए कहा. पहलवान का कहना है कि इस बारे में मना करने के बाद तोमर ने कहा कि जिन्होंने नेशनल में गोल्ड जीता है, उसी का ट्रायल हो रहा है. वहीं एक अन्य सूत्र का कहना है कि उस पहलवान ने 65 किग्रा में कभी नहीं खेला. न ही उसने सोनीपत में नेशनल कैंप में हिस्सा लिया और न ही पिछले साल सीनियर नेशनल में मेडल जीता.

क्या उड़ी हैं नियम की छज्जियां
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हालांकि उत्कर्ष काले, संदीप तोमर और सत्येंद्र जैसे कुछ पहलवानों ने भी न तो नेशनल में मेडल जीता है और न ही कैंप का हिस्सा थे. लेकिन फिर भी उन्हें ट्रायल में उतरने की मंजूरी मिली. यहां तक कि डब्‍ल्यूएफआई ने ट्रायल्स के लिए जो दिशा निर्देश जारी किए थे, उसमें भी कैंप में हिस्सा लेने वाले ही ट्रायल्य में हिस्सा लेंगे. इसका मतलब काले, तोमर और सत्येंद्र के मामले में साफतौर पर नियमों की छज्जियां उड़ाई जा रही है.

ड्रॉ में था ‌सिर्फ एक का नाम



बजरंग ने कहा कि वह भी यहां सभी प्रतियो‌गियों के खिलाफ मुकाबला करने के आए  थे. उन्हें भी पहले पांच  पहलवानों का ही पता था.  लेकिन ड्रॉ में सिर्फ हरफूल का भी नाम था. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि श्रवण काे मौका क्यों नहीं दिया गया. इन चीजों का जवाब फेडरेशन देगा.

वजन कम करना मुश्किल
वहीं श्रवण ने ऊपर आरोप लगे हैं कि वह बजरंग को चोटिल करना चाहते थे. उन्हाेंने इस बारे में कहा कि यह सभी आरोप झूठे हैं. आखिर वह क्यों बजरंग को हानि पहुंचागें. उन्होंने मुझसे कहा कि तुम 57, 61 यसा 70 किग्रा किसी में भी उतर जाओ. इस पहलवान ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर आखिर मुझे क्यों करना चाहिए.  उनका भार 65 किग्रा है और वह 57 किग्रा तक के लिए अपना वजन कम नहीं कर सकते. श्रवण ने कहा कि वह सिर्फ 61 किग्रा और 70 किग्रा में भी उतर सकते थे, लेकिन ये दोनों ही भाग वर्ग ओलिंपिक में नहीं है. इस पहलवान ने कहा कि वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलिंपिक के लिए काफी मेहनत की थी, लेकिन अब मौका जा चुका है.

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First published: July 27, 2019, 2:21 PM IST
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