World Wrestling Championship: गोल्ड के साथ ओलिंपिक कोटा हासिल करने पर होगी विनेश-बजरंग की नजर

वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Athletics Championship) से पहले विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) और सुशील कुमार (Sushil Kumar) का प्रदर्शन शानदार रहा है

भाषा
Updated: September 13, 2019, 3:23 PM IST
World Wrestling Championship: गोल्ड के साथ ओलिंपिक कोटा हासिल करने पर होगी विनेश-बजरंग की नजर
विनेश फोगाट के पास इतिहास रचने का मौका है
भाषा
Updated: September 13, 2019, 3:23 PM IST
भारत के शीर्ष पहलवानों के लिए शनिवार से शुरू हो रही वर्ल्ड चैंपियनशिप (Wrestling World Championship) में असली परीक्षा होगी क्योंकि इसमें वे प्रतिष्ठा की ही नहीं बल्कि टोक्यो ओलिंपिक क्वालिफिकेशन (Tokyo Olympic Qualification) की भी उम्मीद लगाए होंगे.

वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) का प्रदर्शन शानदार रहा है, जिसके कारण उन्हें पद्म पुरुसकार के लिए नामंकित किया गया है. वहीं दिव्या काकरान (Divya Kakran) भी कुछ अच्छे नतीजों से आत्मविश्वास से भरी होंगी.

अच्छे फॉर्म में है बजरंग पूनिया

बजरंग ने इस सत्र की सभी चार प्रतिस्पर्धाओं - डैन कोलोव, एशियन चैंपियनशिप अली अलीव और यासर डोगू - में जीत दर्ज की. वह वर्ल्ड चैंपियनशिप के 65 किग्रा वर्ग में दुनिया के नंबर एक और शीर्ष वरीय पहलवान के तौर पर मैट में उतरेंगे. विनेश ने नए वजन वर्ग से सत्र की शुरूआत की जिसमें उन्होंने 50 से 53 किग्रा में खेलने का फैसला किया.

हालांकि उन्होंने इस नये वजन वर्ग सांमजस्य बिठाने के लिए कुछ समय लिया लेकिन फिर भी वह पांच फाइनल तक पहुंची जिसमें उन्होंने तीन स्वर्ण पदक - यासर डोगू, स्पेन में ग्रां प्री और पोलैंड ओपन - जीते.

विनेश के पास इतिहास रचने का मौका

विनेश के लिये कौशल संबंधित कोई मुद्दा नहीं है. लेकिन मजबूत प्रतिद्वंद्वी को छह मिनट तक पकड़कर रोके रखना एक बड़ी चुनौती है जिसे उसने हाल में यह बात स्वीकार भी की थी. इस संबंध में बड़े स्तर की प्रतियोगिता उन्हें इसका आकलन करने में मदद करेगी क्योंकि इस पहलवान की निगाहें पहले विश्व पदक पर लगी हैं. पिछले साल कोहनी की चोट के कारण उन्हें बुडापेस्ट चैंपियनशिप से बाहर होने के लिये मजबूर होना पड़ा था.
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विनेश फोगाट ने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था


वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत की किसी महिला पहलवान ने गोल्ड मेडल नहीं जीता है और विनेश के पास भारत के सूखे को समाप्त करने का मौका होगा. वहीं बजरंग अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं लेकिन उनके लिये एक चीज परेशानी का कारण बन सकती है और वो है उनका कमजोर ‘लेग डिफेंस’. इससे उनके लिए निश्चित रूप से यह कड़ी परीक्षा होगी.

आठ साल बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में उतरेंगे सुशील कुमार
सिर्फ सुशील कुमार ने कुश्ती के इतिहास में भारत को पुरुष फ्रीस्टाइल में विश्व खिताब दिलाया है और अब बजरंग दूसरे पदक के लिए भारत के इंतजार को खत्म करने के लिये बेताब होंगे. पच्चीस वर्षीय पहलवान के ने दो वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल हासिल किये हैं लेकिन वह गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए हैं. हालांकि उन्हें इसके लिए कई चुनौतियों से जूझना होगा जिसमें रूस के गदजिमुराद राशिदोव और बहरीन के हाजी मोहम्मद अली शामिल हैं.

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सुशील कुमार आठ साल बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में 74 किग्रा वर्ग में उतरेंगे


दो बार के ओलिंपिक मेडलिस्ट विजेता सुशील पिछले कुछ समय से जूझ रहे हैं और आठ साल बाद विश्व चैंपियनशिप में वापसी कर रहे हैं. 74 किग्रा में उनके प्रदर्शन पर सभी की नजरें लगी होंगी क्योंकि पिछले कुछ समय से उनके प्रदर्शन पर चर्चा हो रही है.

सुशील की तहर ही रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूझ रही हैं. उन्होंने 2017 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप जीतने के बाद से कोई खिताब नहीं जीता है. वह लंबे समय से दबाव को झेलने में सहज नहीं हो पा रही हैं. बाउट के अंतिम क्षणों में रक्षात्मक होना उसके लिये मददगार नहीं हो रहा है, जिसके कारण वह कई बार अच्छी स्थिति के बावजूद हार गयईं.

दिव्या काकरान से होगी उम्मीदें

वहीं दिव्या काकरान में काफी स्फूर्ती है और वह अपने मुकाबलों में अडिग रहती है. उन्होंने इस सत्र में दो गोल्ड और इतने ही ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं. पूजा ढांडा पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेजल जीतने वाली केवल चौथी भारतीय महिला पहलवान बनीं. वह 57 किग्रा में स्थान पक्का नहीं कर सकीं जो ओलिंपिक वर्ग हैं. लेकिन अब वह 59 किग्रा में दूसरा पदक हासिल करना चाहेंगी.

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दिव्य काकरन ने भी हाल में दो गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल जीते थे


यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रायल्स में पूजा को चौंकाने वाली सरिता मोर कैसा प्रदर्शन करती हैं. पुरुष फ्रीस्टाइल पहलवानों में दीपक पूनिया कुछ उलटफेर करने में सक्षम है. वह 18 साल की उम्र में भारत के पहले जूनियर विश्व चैंपियन बनने के बाद यहां पहुंचे हैं. उन्होंने ट्रायल में अपने सीनियर पहलवानों को पछाड़ा. अब सीनियर स्तर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिये उनके पास अच्छा मौका होगा.

गुरप्रीत सिंह (77 किग्रा) और हरप्रीत सिंह (82 किग्रा) ग्रीको रोमन में भारत की सर्वश्रेष्ठ उम्मीद होगी. हालांकि भारत के राष्ट्रीय ग्रीको रोमन कोच हरगोविंद सिंह का कहना है कि बहुत कुछ ड्रॉ और भाग्य पर निर्भर करेगा. चैंपियनशिप से तीनों शैलियों के छह वर्गों में छह ओलिंपिक कोटे मिलेंगे.

टीम :

(पुरुष फ्रीस्टाइल): रवि कुमार (57 किग्रा), राहुल अवारे (61 किग्रा), बजरंग पूनिया (65 किग्रा), करण (70 किग्रा), सुशील कुमार (74 किग्रा), जितेंदर (79 किग्रा), दीपक पूनिया (86 किग्रा), परवीन (92 किग्रा), मौसम खत्री (97 किग्रा) और सुमित मलिक (125 किग्रा)।

(पुरुष ग्रीको रोमन): मंजीत (55 किग्रा), मनीष (60 किग्रा), सागर (63 किग्रा), मनीष (67 किग्रा), योगेश (72 किग्रा), गुरप्रीत सिंह (77 किग्रा), हरप्रीत सिंह (82 किग्रा), सुनील कुमार (87 किग्रा), रवि (97 किग्रा) और नवीन (130 किग्रा)

(महिला फ्रीस्टाइल): सीमा (50 किग्रा), विनेश फोगट (53 किग्रा), ललिता (55 किग्रा), सरिता (57 किग्रा), पूजा ढांडा (59 किग्रा), साक्षी मलिक (62 किग्रा), नवजोत कौर (65 किग्रा), दिव्या काकरान (68 किग्रा), कोमल भगवान गोले (72 किग्रा) और किरण (76 किग्रा)

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First published: September 13, 2019, 3:23 PM IST
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