रवि दहिया: जानिए कौन हैं ये पहलवान जिन्‍होंने भारत को दूसरा ब्रॉन्‍ज मेडल दिलाया

रवि दहिया: जानिए कौन हैं ये पहलवान जिन्‍होंने भारत को दूसरा ब्रॉन्‍ज मेडल दिलाया
रवि दहिया ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में 57 किग्रा वर्ग में मेडल जीता था

रवि दहिया (Ravi Dahiya) ने 57 किग्रा में कई शीर्ष पहलवानों को हराया और अपनी पहली ही वर्ल्‍ड चैंपियनशिप (World Championship) में पदक जीता.

  • भाषा
  • Last Updated: September 20, 2019, 9:45 PM IST
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नई दिल्‍ली: कुछ दिग्गज पहलवानों को हराकर टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic) के लिए क्वालीफाई करने और अपनी पहली विश्व चैंपियनशिप (World Championship) में ही कांस्य पदक जीतने वाले रवि दहिया (Ravi Dahiya) बेहद मितभाषी लेकिन प्रतिभा के धनी पहलवान हैं. दहिया ने 57 किग्रा में कई शीर्ष पहलवानों को हराया लेकिन फिर भी उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी. यहां तक कि जापान के युकी तकाहाशी जैसे पहलवान पर जीत दर्ज करने पर भी उनके चेहरे पर खुशी नहीं झलक रही थी. वह सेमीफाइनल में रूस के विश्व चैंपियन जौर उगएव से हार गये थे लेकिन बाद में कांस्य पदक जीतने में सफल रहे जिसके बाद उनके चेहरे पर मुस्कान साफ दिख रही थी.

दहिया ने बाद में कहा, ‘उन्होंने मेरे मुकाबले काफी जल्दी जल्दी करवा दिये थे.’ दहिया से पूछा गया कि आपने ओलिंपिक के लिये क्वालीफाई कर दिया है, उन्होंने कहा, ‘हां, वह तो है.’ दहिया ने पेशेवर कुश्ती लीग में अंडर-23 यूरोपीय चैंपियन और संदीप तोमर को हराकर अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई थी. इसके बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के ट्रायल्स में भी अपनी छाप छोड़ी.

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बजरंग पूनिया (दाएं) के साथ रवि दहिया.




छत्रसाल स्टेडियम से निकले हैं दहिया
यह 22 वर्षीय मुक्केबाज छत्रसाल स्टेडियम की देन है जिससे दो ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त निकले हैं. वह दस साल पहले अपने गांव नाहरी से यहां आए थे और तब वह केवल 12 साल के थे. बेहद मितभाषी और शर्मीले स्वभाव के दहिया के आदर्श ईरान के हसन याजदानी हैं.

दहिया के पिता किसान है और हर सुबह 39 किमी दूर स्थित अपने गांव से बेटे के लिये दूध और फल लेकर आते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे (अपने पिता) कहा कि वे परेशान नहीं हों लेकिन वे चाहते हैं कि मैं घरवाला शुद्ध दूध लूं.’

'मेरी असली यात्रा अब शुरू हुई'
उन्होंने कहा, ‘मैं बचपन से ही ऐसा (शर्मीला) हूं. मेरी असली यात्रा अब शुरू हुई है. मैंने क्या हासिल किया है? मेरे अभ्यास केंद्र पर ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान है. मैंने क्या किया है?’ दहिया के लिये मेंटर की भूमिका निभाने वाले अरुण कुमार ने कहा, ‘देखिये उसकी परवरिश कैसी हुई है.' वहीं सुशील कुमार ने कहा, ‘आप छत्रसाल स्टेडियम के सभी प्रशिक्षु इसी तरह के मिलेंगे. उनका ध्यान केवल खेल पर होता है.’

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