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<a href='http://khabar.ibnlive.in.com/photogallery/3491/'>देखें: <font color=red>चलेगा मैरीकॉम का मुक्का तो ओलंपिक गोल्ड पक्का!</font></a>

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मैरीकॉम न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि दो बच्चों की मां भी हैं लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने जज्बे को कम नहीं होने दिया और अब वो भारत को सबसे बड़ी उपलब्धि दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

मैरीकॉम न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि दो बच्चों की मां भी हैं लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने जज्बे को कम नहीं होने दिया और अब वो भारत को सबसे बड़ी उपलब्धि दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

मैरीकॉम न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि दो बच्चों की मां भी हैं लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने जज्बे को कम नहीं होने दिया और अब वो भारत को सबसे बड़ी उपलब्धि दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

    ये हैं लंदन ओलंपिक 2012 में भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक एम जे मैरीकॉम। महिला बॉक्सिंग में पांच बार की विश्व चैंपियन मैरीकॉम के मुक्के का जवाब दुनिया की किसी बॉक्सर के पास नहीं।

    मणिपुर की रहने वाली मैरीकॉम इन दिनों ओलंपिक की जबर्दस्त तैयारियों में व्यस्त हैं। वे राजधानी इम्फाल के निकट लांगोल गेम्स विलेज की हसीन वादियों में जमकर पसीना बहा रही हैं और अपने दमखम को बढ़ा रही हैं।

    मैरीकॉम न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि दो बच्चों की मां भी हैं लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने जज्बे को कम नहीं होने दिया और अब वो भारत को सबसे बड़ी उपलब्धि दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

    मैरी कॉम 48 किलोग्राम वजन श्रेणी की मुक्केबाज हैं और उन्होंने साल 2000 में मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखा। एक साल के भीतर यानी 2001 में उन्होंने मुक्केबाजी की विश्व चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल किया।

    1 मार्च 1983 को मणिपुर के एक गरीब किसान परिवार में जन्मीं मैरी कॉम के मन में बॉक्सिंग का आकर्षण 1999 में उस समय उत्पन्न हुआ जब उन्होंने खुमान लम्पक स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग करते देखा।

    अपने मणिपुरी साथी बॉक्सर डिंको सिंह की सफलता ने भी मैरीकॉम को बॉक्सिंग की ओर आकर्षित किया। मैरी कॉम ने 2001 में पहली बार नेशनल वुमन बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती। वो छह राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी है।

    भारत सरकार ने 2003 में मैरीकॉम को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। जुलाई 29, 2009 को वे भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुनी गईं। 2001 में मैरीकॉम ने मुक्केबाजी की विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। उसके बाद 2002, 2005, 2006, 2008 और 2010 में उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया।

    Tags: Boxing, Imphal, Mary kom

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