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जो सिर्फ सपना था उसे लंदन में पूरा कर दिखाया भारत ने

जो सिर्फ सपना था उसे लंदन में पूरा कर दिखाया भारत ने

ओलंपिक इतिहास में भारत का सफर इस बार शानदार रहा है। 2004 बीजिंग ओलंपिक में भारत ने 3 मेडल जीते थे वहीं, लंदन ओलंपिक में 6 मेडल जीतकर भारत ने कामयाबी का झंडा गाड़ा है।

    नई दिल्ली। 2012 ओलंपिक भारत के लिए यादगार साबित हुआ है। ओलंपिक इतिहास में भारत का सफर इस बार शानदार रहा है। 2004 बीजिंग ओलंपिक में भारत ने 3 मेडल जीते थे वहीं, लंदन ओलंपिक में 6 मेडल जीतकर भारत ने कामयाबी का झंडा गाड़ा है।

    आखिरी दिन सुशील कुमार के सिल्वर मेडल के साथ ही ओलंपिक इतिहास में भारत ने पहली बार शूटिंग, बैडमिंटन, कुश्ती और बॉक्सिंग में एक साथ अपना लोहा मनवाते हुए 6 मेडल अपने नाम कर लिए। वैसे 2012 ओलंपिक में कामयाबी के इस सफर की शुरुआत गगन नारंग ने की थी। 30 जुलाई 2012 को 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में नारंग ने कांस्य पर कब्जा किया था।

    गगन नारंग ने शूटिंग मुकाबलों में अभिनव बिंद्रा की नाकामी का एहसास भी होने नहीं दिया और देश को इस ओलंपिक का पहला पदक दिलाया। इसके बाद भारतीय सेना के जांबाज सूबेदार विजय कुमार ने बड़ा उलटफेर करते हुए भारत को दूसरी बार शूटिंग में रजत पदक दिलाया।

    03 अगस्त 2012 को 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में रजत पदक जीतकर विजय कुमार ने एक बेहतरीन ओलंपिक की उम्मीद को बनाए रखा। विजय के विजय के बाद 5 अगस्त को भारत की सायना का मुकाबला चाइना से हुआ। सायना ने चीन के बैडमिंटन वर्चस्व में सेंध लगाते हुए कांस्य पदक पर कब्जा किया। हालांकि ये पदक साइना को चीन की खिलाड़ी के चोट लगने से बाहर होने के कारण मिला।

    05 अगस्त 2012 को बैटमिंटन महिला एकल मुकाबले में सायना ने कांस्य जीता। बीजिंग की नाकामी को भूलते हुए सायना ने आखिरकार ओलंपिक मेडल जीत ही लिया।

    बैटमिंटन के बाद पुरुष बॉक्सिंग में भारत को एक के बाद एक लगातार निराशा का सामना करना पड़ा लेकिन इस निराशा को दूर किया महिला वर्ग में 5 बार विश्व चैंपियन रही मैरीकॉम ने। शानदार खेल दिखाते हुए मैरीकाम ने कांस्य पदक को अपने कब्जे में कर लिया। 07 अगस्त 2012 के दिन बॉक्सिंग मुकाबले में मैरीकॉम ने कांस्य जीता।

    जैसे-जैसे ओलंपिक खत्म होने के करीब आ रहा था वैसे-वैसे हर उम्मीद को झटका लग रहा था। लेकिन, आखिरी लम्हों में कुश्ती में योगेश्वर दत्त ने सनसनीखेज तरीक से कांस्य पर कब्जा किया। 11 अगस्त 2012 के दिन कुश्ती मुकाबले में योगेश्वर ने कांस्य पर कब्जा जमाया।
    खेलों के महांकुंभ के आखिरी दिन बीजिंग में कांस्य जीत चुके सुशील कुमार ने गोल्ड मेडल की उम्मीद जगा दी। गोल्ड जीतन में सुशील भले ही चूके लेकिन अपने फाइनल में पहुंचने के चलते हार के बावजूद उन्होंने पहली बार भारत को कुश्ती में रजत पदक दिलाया।

    1996 अंटलाटा में भारत के पास 1 मेडल था, 2008 बीजिंग में ये संख्या 3 हुई। महज 4 साल के भीतर ओलंपिक में भारत ने पदकों के रिकॉर्ड को डबल कर दिया। उम्मीद की जानी चाहिए की लंदन की कामयाबी रियो 2016 ओलंपिक की हौसला अफजाई के काम आएगी।

    Tags: Gagan Narang, India, Mary kom, Saina Nehwal, Sushil kumar, Yogeshwar Dutt

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