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शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरी आईबीएल

शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरी आईबीएल

कहते है इंडिया में क्रिकेट की तुलना करना किसी और खेल के लिए आसान नहीं है। इंडियन बैंडमिंटन लीग विवाद के मामले में क्रिकेट को कोसों पीछे छोड़ दिया है।

    नई दिल्ली। कहते है इंडिया में क्रिकेट की तुलना करना किसी और खेल के लिए आसान नहीं है। इंडियन बैंडमिंटन लीग विवाद के मामले में क्रिकेट को कोसों पीछे छोड़ दिया है। लीग की शुरूआत से पहले ही ऐसा क्या हुआ जिसने इस लीग को शुरु होने से पहले ही उसके दामन को दागदार कर दिया।

    क्रिकेट हिन्दुस्तान की जान है इस बात पर शायद किसी को भी एतराज नहीं होगा। आईपीएल पर नजर डालें तो हर सीजन की अपनी कई खूबियां और खामियां रही। अगर खामियों को हटा दिया जाए तो आईपीएल से क्रिकेट को हुए फायदे और को देखकर भारत में हर खेल में इस नए पैटर्न को अपनाया गया। चाहे वो हॉकी लीग हो या फिर अगस्त से शुरू होने वाली बैडमिंटन लीग।

    लेकिन इंडियन बैडमिंटन लीग शुरु होने से पहले ही विवादों में घिर गई और इस विवाद ने पूरे देश के मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 22 जुलाई दिल्ली के एक पांच सितारा होटल इंडियन बैडमिंटन लीग में होने वाली खिलाड़ियों की नीलामी को लेकर सज चुका था। खिलाड़ियों की निलामी भी हुई लेकिन इस निलामी के महज 24 घंटे की भीतर ही एक बड़ा बवाल खड़ा हो गया।

    कॉमनवेल्थ खेलों में महिला डबल्स की चैंपियन ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा को छह आइकन खिलाड़ियों में शामिल किया गया था, लेकिन आखिरी पलों में उनका बेस रेट 50,000 डॉलर से घटाकर 25,000 डॉलर कर दिया गया था। दोनों स्टार खिलाड़ियों ने आईबीएल के इस फैसले को असम्मान जनक और निराशाजनक करार दिया। बोली के दौरान ज्वाला को क्रिश दिल्ली स्मैशर्स ने 31,000 डॉलर और अश्विनी को पुणे पिस्टन ने 25,000 डॉलर में खरीदा।

    कॉमनवेल्थ खेलों में महिला डबल्स की चैंपियन ज्वाला और अश्विनी को सिर्फ इस बात की खीज नहीं थी कि उन्हे कम पैसों में क्यों खरीदा गया, उनकी नाराजगी इस बात पर भी थी कि महिला डबल्स को इस लीग से हटाकर एक और पुरुष सिंगल्स को इसमें शामिल क्यों किया गया।

    डबल्स में ज्वाला के साथ ही 2011 में लंदन में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य जीतने वाली अश्विनी की नाराजगी की अलग ही कहानी है। अश्विनी की डबल्स पार्टनर रह चुकी प्रदन्या गादरे और तरुन कोना को 10,000 डॉलर और 15,000 डॉलर के बेस प्राइस के मुकाबले 46,000 डॉलर और 28,000 डॉलर ऑफर किए गए। जबकि साइना नेहवाल को हैदराबाद की टीम ने 72 लाख रुपये में और विश्व की नंबर एक खिलाड़ी ली चॉन्ग वी को मुंबई की टीम ने करीब 81 लाख रुपये में खरीदा।

    22 जुलाई को हुई नीलामी के दौरान आयोजकों ने 6 में से 2 आयकन खिलाड़ियों- ज्वाला और अश्विनी पोनप्पा के लिए नियमों में बदलाव किया और इनकी आधार कीमत कम कर दी। साथ ही इन खिलाड़ियों को पहले चरण की नीलामी में किसी टीम ने खरीदा भी नहीं क्योंकि फ्रेंचाइजी सबसे पहले सिंगल्स के खिलाड़ियों पर दांव लगाना चाहते थे। जबकि ये दोनों ही डबल्स की खिलाड़ी हैं। दोनों खिलाड़ियों की नाराजगी को देखते हुए आईबीएल ने ये भरोसा दिया है कि इनके नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी। इसके तहत ज्वाला को आईबीएल अपनी ओर से 19 हजार और पोनप्पा को 25 हजार डॉलर देगा।

    आयोजनकर्ताओं के इस बयान का असर भी हुआ। 48 घंटे तक चले इस जोरदार ड्रामे के बाद ज्वाला गुट्टा ने कहा कि विवादों के बावजूद वो आईबीएल में खेलना जारी रखेंगी। साथ ही ये भी कहा कि वो दिल्ली स्मैशर्स से जुड़कर बेहद खुश हैं।

    देश में पैसे और लोकप्रियता के मामले में फिलहाल क्रिकेट की बराबरी करना किसी दूसरे खेल के लिए आसान नहीं है। लेकिन अगर बात विवादों की की जाए तो आईपीएल की तर्ज पर शुरू हुई ये लीग शुरु होने से पहले ही क्रिकेट को तगड़ी टक्कर दे रही है।

    Tags: Jwala gutta, New Delhi, Saina Nehwal

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