मिल्खा का दर्द, ऐसे कैसे सुधरेगी खेलों की सूरत!

उड़न सिख मिल्खा सिंह ने देश में खेलों की दुर्दशा के पीछे भारतीय ओलंपिक संघ को जिम्मेदार ठहराया है। मिल्खा सिंह ने कहा कि भारत सरकार खेलों के लिए काफी बजट जारी करती है।

श्रवण शुक्‍ला
Updated: October 15, 2015, 8:05 PM IST
मिल्खा का दर्द, ऐसे कैसे सुधरेगी खेलों की सूरत!
उड़न सिख मिल्खा सिंह ने देश में खेलों की दुर्दशा के पीछे भारतीय ओलंपिक संघ को जिम्मेदार ठहराया है। मिल्खा सिंह ने कहा कि भारत सरकार खेलों के लिए काफी बजट जारी करती है।
श्रवण शुक्‍ला
श्रवण शुक्‍ला
Updated: October 15, 2015, 8:05 PM IST
नई दिल्ली। उड़न सिख मिल्खा सिंह ने देश में खेलों की दुर्दशा के पीछे भारतीय ओलंपिक संघ को जिम्मेदार ठहराया है। मिल्खा सिंह ने कहा कि भारत सरकार खेलों के लिए काफी बजट जारी करती है, लेकिन आईओसी की ढीली कार्यप्रणाली के चलते देश में खेलों की स्थिति खराब है।

मिल्खा सिंह ने कहा कि तमाम खेल संगठनों में राजनीतिज्ञों की घुसपैठ है। वो खेलों के बारे में कुछ नहीं जानते। वो पद पर बने रहें, लेकिन तजुर्बेकार खिलाड़ियों को खेलों पर काम करने दें। मिल्खा सिंह बैडमिंटन का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि भारत में बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी हैदराबाद से क्यों आ रहे हैं क्योंकि वहां पुलेला गोपीचंद जैसा कोच है, जो चैंपियन रह चुका है और खिलाड़ियों में चैंपियन बनने का जज्बा पैदा कर रहा है।

मिल्खा सिंह ने कहा कि खेल संगठन सिर्फ पैसों को खर्च करने पर ध्यान देते हैं, लेकिन कहां खर्च करना है, इसका हिसाब कोई नहीं रखता। देश में विभिन्न खेलों के लगभग 50 हजार कोच हैं। वो क्या करते हैं, और सरकार से मिले धन का इस्तेमाल कहां होता है, ये कोई बताने वाला नहीं है। अगर इन प्रशिक्षकों की जिम्मेदारी तय कर दी जाए, तो नतीजे सामने आने लगेंगे वर्ना देश में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों की स्थिति बदतर ही रहेगी।

मिल्खा सिंह से जब पूछा गया कि मौजूदा समय में कौन सा एथलीट बेहतर प्रदर्शन कर रहा है जिससे ओलंपिक में पदकों की उम्मीद लगाई जा सकती है तो उन्होंने कहा कि ऐसा कहते हुए मुझे वाकई अफसोस हो रहा है कि मौजूदा समय में देश में ऐसा कोई एथलीट नहीं है, जिसका नाम मैं ले सकूं। मिल्खा सिंह कहते हैं कि उनके समय में खेलों को लेकर सरकार का कोई बजट नहीं होता था। लेकिन अब है। लेकिन बजट के बावजूद खिलाड़ियों को कुछ नहीं मिलता।

मिल्खा सिंह ने कहा कि उन्होंने भारत सरकार को खेलों को बढ़ावा देने के लिहाज से अहम सुझाव दिए थे, लेकिन वो कहां हैं, ये किसी को नहीं पता। मिल्खा सिंह कहते हैं कि हमारे देश में खिलाड़ियों के लिए रोजगार की व्यवस्था होनी चाहिए। उड़न सिख ने कहा कि एक निश्चित स्तर तक पहुंचे खिलाड़ियों को सरकार रोजगार दे। उनके लिए सम्मानजनक नौकरी की व्यवस्था करे। दरअसल, मौजूदा समय में भी खेल कोटे से नौकरियों की व्यवस्था है, लेकिन ये सिर्फ पहुंच वाले खिलाड़ियों को ही मिल पाती हैं। ऐसे में खेलों को करियर के रूप में चुनने में झिझक होती है। इस स्थिति में सरकार को चाहिए कि वो एक निश्चित स्तर पर खेल चुके लोगों को बिना एड़ियां रगड़े अच्छा काम दिलाए। वर्ना खेलों में प्रोफेशनल लोग नहीं आ सकते।

मिल्खा ने कहा कि हमारे देश में विभिन्न खेलों के टैलेंट का बड़ा हिस्सा खेल की दुनिया में सक्रिय ही नहीं रहता। मिल्खा कहते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को भी खेलों में आने से रोका, क्योंकि उन्हें हकीकत पता थी। लेकिन जीव मिल्खा सिंह ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद गोल्फ को प्रोफेशन के तौर पर चुना, जबकि उनकी पत्नी निर्मल कौर भारतीय वॉलीबॉल टीम की कप्तान रह चुकी हैं।

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First published: March 20, 2015, 2:34 AM IST
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