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धांधली पर हल्ला बोल, एक साथ कई एजेंसियां खोलेंगी पोल

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया यानी सीएजी ने कॉमनवेल्थ खेलों के खाते खंगालने शुरू कर दिए हैं। नजर केवल सुरेश कलमाडी की कमेटी पर ही नहीं है।

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    नई दिल्ली। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया यानी सीएजी ने कॉमनवेल्थ खेलों के खाते खंगालने शुरू कर दिए हैं। नजर केवल सुरेश कलमाडी की कमेटी पर ही नहीं है। जांच के दायरे में खेलों से जुड़े तमाम महकमे हैं। इस महाघोटाले को उजागर करने के लिए सीएजी ने लगभग सौ लोगों की टीम तैयार की है। लेकिन घोटाले की जांच में कई और एजेंसियों को लगा दिए जाने से सीएजी में नाराजगी है।

    इस हमाम में सभी नंगे हैं, लिहाजा अब निशाने पर सिर्फ कॉमनवेल्थ खेल आयोजन समिति ही नहीं है बल्कि दिल्ली सरकार, डीडीए, पीडब्लूडी, सीपीडब्लूडी समेत कई सरकारी विभाग भी जांच के दायरे में हैं। खेल के पीछे के खेल की जांच के लिए सीएजी ने 100 लोगों की टीम बनाई है। इनमें 6 अफसर निदेशक स्तर के हैं। इस चुनौती से जूझने के लिए सीएजी के सभी अधिकारियों की छुट्टियां और विदेश दौरे रद्द कर दिए गए हैं।

    शुरुआती दौर में 16 बड़े प्रोजेक्टस की जांच चल रही है। सीएजी का कहना है कि तीन महीने के अंदर वो अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप देगी। जांच में सीएजी के अलावा इनकम टैक्स, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग, सीबीआई तो लगी ही थी, पीएमओ की तरफ से पूर्व सीएजी वी.के. शुंगलू की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बना दी गई है। इसी ने कैग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों की मानें तो ज्यादा जांच एजेंसियां होने से जांच का काम प्रभावित हो सकता है। एक साथ सभी जांच एजेंसियां खेलों से जुड़ी फाइलों को खंगालने और अधिकारियों की जांच में जुट गई हैं जिससे उसकी जांच की रफ्तार धीमी हो सकती है।

    उधर सीएजी ने साफ कर दिया है कि वो अपनी जांच में मिलने वाले नतीजे किसी को नहीं बताएगी और गोपनीय तरीके से संसद में पेश करेगी। कैग के अधिकारियों की एक टीम मंगलवार से कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में एक हफ्ते के लिए कैंप करेगी। सीएजी के अधिकारी वहां हुए खर्चे का लेखा जोखा लेना चाहते हैं। कैग की एक टीम पहले से ही आयोजन समिति के मुख्यालय में डेरा डाले हुए है।

    आज शाम हुई कॉमनवेल्थ ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में आयोजन समिति का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ा दिया गया है। वजह तो बताई जा रही है महाखेल के बचे काम पूरा करना लेकिन जानकारों की मानें तो ऐसा जांच तक सभी अधिकारियों को आयोजन समिति में बनाए रखने के लिए किया गया।

    उधर इनकम टैक्स विभाग भी जांच में जुट गया है। उसकी जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या आयोजन समिति यानि ओसी ने आयकर नियमों का उल्लंघन और कर की चोरी तो नहीं की। आयकर विभाग खेलों में आय पर टैक्स काटने की तैयारी भी कर रहा है।

    वित्त विभाग की टीम ने अलग-अलग जगहों पर हुए निर्माण कार्य, प्रेस ऑपरेशन, टीवी प्रसारण के अधिकार संबंधी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।

    आईबीएन सेवन को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीएजी का मानना है कि महाघोटाले के लपेटे में सिर्फ कलमाडी नहीं बल्कि उनके अलावा भी कई लोग हैं। इसके अलावा केंद्रीय सतर्कता आयोग ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वो इस बात की जांच करे कि दागी अधिकारियों का कॉमनवेल्थ खेलों के लिए सेलेक्शन क्यों किया गया।

    एक समाचार एजेंसी के आरटीआई के जवाब में सीवीसी ने कहा है कि जांच के दायरे में कॉमनवेल्थ खेलों से जुडे वित्तीय और प्रशासनिक अनियमिताओं को भी लाया गया है। इन अनियमितताओं में चिकित्सा से जुड़े सामानों की खरीदारी, दागी अफसरों की बहाली, बैनर, वाहनों में ग्राफिक्स और सैंडी समेत कई चीजों की तैयारी शामिल है।

    सीवीसी गेम्स में खरीदारी या फिर कंस्ट्रक्शन से जुड़े कम से कम 22 और प्रोजेक्ट की जांच कर रही है। इन 22 प्रोजेक्ट में 6 प्रोजेक्ट युवा एवं खेल मंत्रालय, 3 आयोजन समिति, 2 एमसीडी, 2 सीपीडब्ल्यूडी, 2 दिल्ली सरकार और एक-एक वाणिज्य मंत्रालय, मौसम विभाग और एनडीएमसी के दायरे में आते हैं।

    सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियों के रडार में जहां एक ओर कॉमनवेल्थ खेलों के ज्वाइंट डायरेक्टर राजकुमार सचेती हैं जो सुरेश कलमाडी के करीबी माने जाते हैं तो दूसरी ओर सीपीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ए के जैन भी हैं।

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