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CWG: 11 प्रोजेक्ट में उड़ा दिए 527 करोड़ रुपये ज्यादा

कॉमनवेल्थ खेलों में घूसखोरों ने करोड़ों की हेराफेरी की। गेम्स से जुड़े ग्यारह बड़े प्रोजेक्ट में अनुमानित लागत से कहीं ज्यादा करीब 527 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

कॉमनवेल्थ खेलों में घूसखोरों ने करोड़ों की हेराफेरी की। गेम्स से जुड़े ग्यारह बड़े प्रोजेक्ट में अनुमानित लागत से कहीं ज्यादा करीब 527 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

कॉमनवेल्थ खेलों में घूसखोरों ने करोड़ों की हेराफेरी की। गेम्स से जुड़े ग्यारह बड़े प्रोजेक्ट में अनुमानित लागत से कहीं ज्यादा करीब 527 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

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    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ खेलों में घूसखोरों ने करोड़ों की हेराफेरी की। गेम्स से जुड़े ग्यारह बड़े प्रोजेक्ट में अनुमानित लागत से कहीं ज्यादा करीब 527 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस मेगा इवेंट से कुछ लोगों ने 200 करोड़ की मोटी मलाई काटी। ये सनसनीखेज खुलासा खेलों में गड़बडी़ की जांच कर रहे सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने किया है।

    इन 11 प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 1435 करोड़ थी जबकि इन प्रोजेक्ट्स के लिए 1962 करोड़ रुपए चुकाए गए यानी इन प्रोजेक्ट्स पर अनुमानित लागत से 37 फीसदी ज्यादा करीब 527 करोड़ रुपए फिजूलखर्ची में दिए गए।

    सवाल ये है कि कॉमनवेल्थ खेलों से जुड़े इन 11 बड़े प्रोजेक्ट की लागत आखिर इतनी क्यों बढ़ गई? हैरानी की बात तो ये है कि इन प्रोजेक्ट से जुड़ी डीडीए, एनडीएमसी, सीपीडब्ल्यूडी और एमसीडी जैसी तमाम एजेंसियों ने भी अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया है।

    सीवीसी की नजर खासतौर पर पांच बडे़ गेम्स प्रोजेक्ट पर है। इनमें तालकटोरा इंडोर स्टेडियम, रिंग रोड बाइपास, बारापुल्ला एलिवेटेड रोड, डॉ. एसपी मुखर्जी स्विमिंग पूल और राजाराम कोहली मार्ग ग्रेड सेपरेटर हैं। आरोप है कि इनके निर्माण कार्य में काफी अनियमितताएं बरती गईं। तालकटोरा स्टेडियम में बेहद घटिया स्तर का कॉन्क्रीट इस्तेमाल किया गया। रिंग रोड बाइपास प्रोजेक्ट में एक्स्ट्रा ट्रांसपोर्ट चार्जेज के नाम पर 3 करोड़ 68 लाख रुपए चुकाए गए। इसके अलावा सीरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स और ध्यान चंद नेशनल स्टेडियम में गड़बड़ी को लेकर भी सीवीसी ने जांच शुरू कर दी है।

    ये सनसनीखेज खुलासे एक अखबार की तरफ से दाखिल आरटीआई के तहत सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने अपने जवाब में किए हैं। 293 पन्नों के इस दस्तावेज में खासतौर पर उन 25 शिकायतों का जिक्र है जिनके इर्द गिर्द सीवीसी जांच कर रही है। सीवीसी के मुताबिक गड़बड़ियां यहीं खत्म नहीं होतीं। शिवाजी स्टेडियम प्रोजेक्ट चीन की एक ऐसी फर्म को दिया गया जिसने भारत सरकार के किसी प्रोजेक्ट पर पहले कभी काम नहीं किया था।

    शिवाजी स्टेडियम पर 160 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं जो कि अनुमानित लागत से दोगुनी रकम है। इसके बावजूद ये स्टेडियम समय पर तैयार नहीं हुआ। खन्ना स्टेडियम में 14 सिंथेटिक टेनिस कोर्ट सरफेस बिछाने के टेंडर में अनियमितताएं बरती गईं।

    गेम्स में धांधली की इन शिकायतों की जांच कर रहे सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी एजेंसियों को इस महीने के आखिर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इन रिपोर्ट के आधार पर ही विजिलेंस कमीशन अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रधानमंत्री की बनाई जांच समिति को सौंपेगा।

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