प्रधानमंत्री मोदी ने मुक्केबाज डिंको सिंह के निधन पर शोक जताया, मैरीकॉम ने बताया योद्धा

डिंको सिंह ने 19 साल की आयु में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था. (फाइल फोटो)

डिंको सिंह ने 19 साल की आयु में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था. (फाइल फोटो)

डिंको सिंह को एक निडर मुक्केबाज माना जाता था. उन्होंने बैंकाक एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक की अपनी राह में दो ओलंपिक पदक विजेताओं थाईलैंड के सोनताया वांगप्राटेस और उज्बेकिस्तान के तैमूर तुलयाकोव को हराया था. उस समय किसी भारतीय मुक्केबाज के लिये बड़ी उपलब्धि थी.

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  • Last Updated: June 10, 2021, 12:44 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता डिंको सिंह के निधन पर शोक प्रकट किया. पीएम ने कहा कि वह एक उत्कृष्ट मुक्केबाज थे जिन्होंने मुक्केबाजी की लोकप्रियता बढ़ाने में काफी योगदान दिया. भारतीय मुक्केबाजी को नई दिशा देने वाले डिंको सिंह का लीवर कैंसर से लंबे समय तक जूझने के बाद आज सुबह निधन हो गया. वह 42 साल के थे और 2017 से इस बीमारी से जूझ रहे थे.

मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘डिंको सिंह खेल के सुपरस्टार और एक उत्कृष्ट मुक्केबाज थे जिन्होंने कई पदक और ख्याति अर्जित की तथा मुक्केबाजी की लोकप्रियता बढ़ाने में काफी योगदान दिया. उनके निधन से दुखी हूं. उनके परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.’’ मणिपुर के इस सुपरस्टार ने 10 वर्ष की उम्र में अपना पहला राष्ट्रीय खिताब (सब जूनियर) जीता था.

मैरीकॉम ने बताया रॉकस्टार

वह भारतीय मुक्केबाजी के पहले स्टार मुक्केबाज थे जिनके एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक से, छह बार की विश्व चैंपियन एम सी मैरीकॉम सहित कई खिलाड़ी इस खेल से जुड़ने के लिये प्रेरित हुए थे. मैरीकॉम ने पीटीआई से कहा, ''वह रॉकस्टार थे, एक दिग्गज थे, एक योद्धा थे. मुझे याद है कि मैं मणिपुर में उनका मुकाबला देखने के लिये कतार में खड़ी रहती थी. उन्होंने मुझे प्रेरित किया. वह मेरे नायक थे. यह बहुत बड़ी क्षति है. वह बहुत जल्दी चले गये. ''
निडर मुक्केबाज थे डिंको

डिंको को एक निडर मुक्केबाज माना जाता था. उन्होंने बैकाक एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक की अपनी राह में दो ओलंपिक पदक विजेताओं थाईलैंड के सोनताया वांगप्राटेस और उज्बेकिस्तान के तैमूर तुलयाकोव को हराया था जो उस समय किसी भारतीय मुक्केबाज के लिये बड़ी उपलब्धि थी. दिलचस्प बात यह है कि उन्हें खेलों के लिये शुरुआती टीम में नहीं चुना गया था और विरोध दर्ज करने के बाद उन्हें टीम में लिया गया था.

भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने ट्वीट किया, '' इस क्षति पर मेरी हार्दिक संवेदना. उनका जीवन और संघर्ष हमेशा भावी पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्रोत रहेगा. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि शोक संतप्त परिवार को दुख और शोक की इस घड़ी से उबरने के लिये शक्ति प्रदान करे.''



1998 एशियाई खेलों में जीता सोना

डिंको ने 1998 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और उन्हें उसी साल अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. खेलों में उनके योगदान के लिये उन्हें 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. भारतीय नौसेना में काम करने वाले डिंको मुक्केबाजी से संन्यास लेने के बाद कोच बन गये थे. वह भारतीय खेल प्राधिकरण के इम्फाल केंद्र में कोचिंग दिया करते थे लेकिन बीमारी के कारण बाद में अपने घर तक ही सीमित हो गये थे.

पिछले साल हुए थे कोरोना वायरस से संक्रमित

उन्हें पिछले साल कैंसर के लिये जरूरी रेडिएशन ​थेरेपी करने के ​लिये दिल्ली लाया गया था. पीलिया होने के कारण उनकी थेरेपी नहीं हो पायी थी. उन्हें वापस इंफाल भेज दिया गया लेकिन घर लौटने पर कोविड-19 से संक्रमित हो गये. जिसके कारण उन्हें एक महीना अस्पताल में बिताना पड़ा था. बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने कहा, ''यह आसान नहीं था लेकिन मैंने स्वयं से कहा, लड़ना है तो लड़ना है. मैं हार मानने के लिये तैयार नहीं था. किसी को भी हार नहीं माननी चाहिए.

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