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Exclusive: ऋतु फोगाट ने छोड़ दिया घर-परिवार, कहती हैं- आंखों में महान सपना हो तो संघर्ष भी वैसा ही होना चाहिए

Exclusive: ऋतु फोगाट ने छोड़ दिया घर-परिवार, कहती हैं- आंखों में महान सपना हो तो संघर्ष भी वैसा ही होना चाहिए

ऋतु फोगाट 3 साल से सिंगापुर में ट्रेनिंग कर रही हैं. उनका लक्ष्य एमएमए वर्ल्ड चैंपियन बनना है. (Ritu Phogat Instagram)

ऋतु फोगाट 3 साल से सिंगापुर में ट्रेनिंग कर रही हैं. उनका लक्ष्य एमएमए वर्ल्ड चैंपियन बनना है. (Ritu Phogat Instagram)

Mixed Martial Arts: कभी स्टार रेसलर रह चुकीं ऋतु फोगाट (Ritu Phogat) की आंखों में अब भारत की पहली एमएमए वर्ल्ड चैंपियन (MMA Champion) बनने का सपना है. लक्ष्य महान है तो संघर्ष भी बड़ा होगा. ऋतु इसके लिए घर-परिवार से हजारों किमी दूर लंबे-लंबे ट्रेनिंग सेशन कर रही हैं. खुद खाना बनाती हैं. ऋतु फोगाट ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू (Exclusive Interview) में अपने सारे सफर को याद किया. पेश हैं इंटरव्यू के मुख्य अंश:

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नई दिल्ली. ऋतु फोगाट. भारत की सुपरस्टार रेसलर. कॉमनवेल्थ से लेकर वर्ल्ड रेसलिंग तक धमाल मचा चुकीं ऋतु की आंखों में अब भारत की पहली एमएमए वर्ल्ड चैंपियन (MMA Champion) बनने का सपना है. ऐसा लक्ष्य जो अब तक एक भी भारतीय हासिल नहीं कर सका है. जब सपने बड़े हों तो उसे पाने का संघर्ष भी बड़ा हो जाता है. ऋतु फोगाट (Ritu Phogat) घर-परिवार से हजारों किमी दूर ऐसा ही संघर्ष कर रही हैं. एक अनजान देश में लंबे-लंबे ट्रेनिंग सेशन से लेकर खुद का खाना बनाने जैसे हर काम वो बड़ी शिद्दत से कर रही हैं ताकि भारत को मिक्स्ड मार्शल आर्ट (Mixed Martial Arts) की पहली भारतीय विश्व चैंपियन दिला सकें. सिंगापुर में ट्रेनिंग कर रहीं ऋतु फोगाट ने हमसे अपने करियर, गोल से लेकर परिवार तक हर विषय पर खुलकर बात की. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

  • अभी आप कहां हैं और आपकी ट्रेनिंग कैसी चल रही है?
    अभी मैं सिंगापुर में हूं. मैं पिछले तीन साल से यहीं पर रहकर ट्रेनिंग कर रही हूं क्योंक मुझे नहीं पता कि भारत में ऐसी ट्रेनिंग कहां की जाती है. इसलिए मैं यहां परिवार से दूर अपनी ट्रेनिंग कर रही हूं.
  • आपने 2016 में कॉमनवेल्थ रेसलिंग में गोल्ड जीतने और फिर प्रो रेसलिंग में सबसे महंगी महिला रेसलर चुनी गईं. कुश्ती में इतना कामयाब करियर छोड़कर एमएमए क्यों चुन लिया.
    मुझे बचपन से ही कुछ अलग करने की चाहत थी. जब मैं रेसलिंग में थी तब भी सोचती थी ऐसा क्या किया जा सकता है जो अब तक किसी ने नहीं किया. जब मैंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में जाने का फैसला किया तब मेरा रेसलिंग का करियर पीक पर था. लेकिन मैं बचपन से मिक्स्ड मार्शल आर्ट देखती थी. यह टफ खेल है और मुझे अच्छा लगता था. मैं सोचती थी कि इस खेल में भारत से कोई विश्व चैंपियन क्यों नहीं है. मैंने सोचा कि मुझे यह कोशिश करनी चाहिए. मैं भारत को एमएमए चैंपियन का पहला बेल्ट दिलाना चाहती थी. और जब इवॉल्व एमएमए ने मुझे ऑफर किया तो मुझे लगा कि यह अच्छा मौका है और मैंने हां कर दी.
  • फोगाट फैमिली ने महिला कुश्ती को नई पहचान दी है. आपके परिवार में दो चैंपियन रेसलर हैं. पिता ने बेटियों को पहलवान बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया है. ऐसे में आपने अपने परिवार को कैसे समझाया कि आप कुश्ती छोड़कर एमएमए में जाना चाहती हैं.
    यकीनन यह मुश्किल फैसला था और परिवार को मनाना कतई आसान नहीं होने वाला था. इसलिए मैंने सबसे पहले बहनों को अपने फैसले के बारे में बताया. शुरू में तो बहनों ने मुझसे कहा कि टोक्यो ओलंपिक नजदीक है और उसमें मेडल जीतने का मौका है. इस मैंने उन्हें इवॉल्व के ऑफर के बारे में बताया तो बहनों ने मेरी बात मान ली. बहनों ने पहले पापाजी से बात की. इसके बाद ही मैंने पापाजी से बात की. शुरुआती नानुकुर के बाद परिवार ने मेरा फैसला मान लिया और पूरा सपोर्ट किया. मैं आज जहां भी हूं, अपने परिवार की बदौलत हूं.
  • एमएमए चुनने पर आपके पिताजी ने आपसे क्या कहा?
    मेरे पापा जी ने मुझसे एक ही बात कही कि कुश्ती हो या एमएमए. हमारी एक ही कोशिश होनी चाहिए कि देश का नाम रोशन करें. उन्होंने कहा कि कुश्ती की ही तरह इस खेल को भी दिल से खेलो और देश का नाम आगे बढ़ाओ.
  • आपकी अब तक की एमएमए जर्नी शानदार रही है. आपने 9 में से 7 फाइट जीती हैं. हालांकि, एटमवेट वेट कैटेगरी के फाइनल में आपको हार का सामना करना पड़ा. कहां चूक रह गई?
    फाइनल में मेरा मुकाबला स्टैंप फेयरटेक्स (Stamp Fairtex) से था. थाईलैंड की फेयरटेक्स अनुभवी खिलाड़ी हैं. वे किकबॉक्सिंग चैंपियन भी रह चुकी हैं. उनसे मुकाबला आसान नहीं होने वाला था. आसान हुआ भी नहीं. लेकिन हार-जीत खेल का हिस्सा है. इस मैच को भूलकर आगे बढ़ना है. मुझे इस हार से काफी कुछ सीखने को मिला है. मैं अब और कड़ी ट्रेनिंग करूंगी. खुद को स्ट्रॉन्ग बनाउंगी.
  • MMA का खेल कुश्ती, कराटे, किक बॉक्सिंग जैसे कई खेलों का मिश्रण है. इस खेल में कुश्ती का बैकग्राउंड कितना मददगार होता है?
    मिक्स्ड मार्शल आर्ट में कुश्ती की भूमिका अहम है. पहलवान हमेशा नी डाउन की प्रैक्टिस करते हैं और जब एमएमए में उन्हें ऐसा मौका मिलता है तो वे इसे दोनों हाथों से लपक लेते हैं. अगर किसी खिलाड़ी ने इस मौके का सही इस्तेमाल किया तो उसकी संभावना काफी बढ़ जाती है. कुश्ती के बैकग्राउंड वाले खिलाड़ी के लिए एमएमए में काफी संभावनाएं हैं?
  • लेकिन कुश्ती और एमएमए की तकनीक में काफी अंतर होता है?
    बिलकुल इन दोनों खेल में काफी अंतर है. मैं अंतर को कम करने के लिए लगातार ट्रेनिंग कर रही हूं. रोज कुछ ना कुछ नया सीख रही हूं. मैं अपनी स्ट्राइकिंग बेहतर कर रही हूं. ग्राउंड में रेसलर पहले से ही बेहतर होते हैं. रेसलर ग्राउंड पर विरोधी को ज्यादा आसानी से कंट्रोल कर पाता है. मुझे भी इसका फायदा मिला है.
  • अपने ट्रेनिंग सेशन और डाइट के बारे में कुछ बताइए?
    अभी मेरे कंधे में थोड़ी चोट है. अभी मैं अपने फीजियो की देखरेख में कंधे की एक्सरसाइज कर रही हूं. इसके साथ-साथ मैं अपने बॉडी के लोअर पार्ट को स्ट्रॉन्ग बना रही हूं. मेरा दूसरा हाथ ठीक है और उससे स्ट्राइकिंग की ट्रेनिंग करती हूं. जहां तक डाइट का सवाल है. यह आमतौर पर सामान्य रहता है. जब मुकाबला नजदीक होता है, तो कुछ चीजें छोड़नी पड़ती हैं. खासकर जैसे मुझे मीठा पसंद है, लेकिन फाइट नजदीक होने पर मैं मीठा नहीं खाती हूं. अक्सर घर पर ही दाल-रोटी, सब्जी बना लेती हूं.
  • आपका अगला मुकाबला कब है?
    अभी मेरा अगला मुकाबला तय नहीं है. मैं जब पूरी तरह फिट हो जाउंगी तो ही मुकाबले में उतरूंगी. वन चैंपियनशिप में मेरा जिससे भी मुकाबला होगा, उसके लिए मैं तैयार हूं.
  • Tags: Mixed martial arts, Ritu Phogat, Sports news

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