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Tokyo Olympic: अन्नू रानी ने खेत में सीखा भाला फेंकना, अब मिला टोक्यो ओलंपिक का टिकट

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में अन्नू रानी से मेडल की उम्मीद

Tokyo Olympics: टोक्यो ओलंपिक में अन्नू रानी से मेडल की उम्मीद

मेरठ की युवा एथलीट अन्नू रानी (Annu Rani) को वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर ओलंपिक (Tokyo Olympic) में शामिल होने का मौका मिला है, किसान पिता को है पदक का भरोसा

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नई दिल्ली. मेरठ की एक और बेटी अब टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. भाला फेंक चैंपियन अन्नू रानी (Annu Rani) आखिरकार वर्ल्ड एथलीट रैंकिंग सिस्टम के आधार पर ओलंपिक के लिए चुनी गई हैं. अन्नू रानी को ओलंपिक टिकट मिलने से उनके गांव बहादुरपुर में परिजनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है. 12 साल के खेल करियर में आर्थिक समस्याओं को दरकिनार कर अन्नू ने अपने लाजवाब प्रदर्शन करने की बदौलत आखिरकार ओलंपिक का टिकट हासिल कर ही लिया है. हाल ही में 63.24 मीटर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था. वह मात्र .77 मीटर से ओलंपिक क्वालिफाई करने से चूक गई थीं लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर टोक्यो ओलंपिक में शामिल होने का मौका आखिरकार उन्हें मिल ही गया. मेऱठ की बेटी के ओलंपिक जाने की ख़बर से परिजनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है. अन्नू के किसान पिता कहते हैं कि बेटी ज़रुर पदक लेकर लौटेगी और देश का मान बढ़ाएगी.

अन्नू रानी की खास उपलब्धियां
- 2014 एशियाई गेम्स में कांस्य
- 2014 कामनवेल्थ गेम्स में प्रतिभाग
- 2015 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य
- 2017 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत
- वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फाइनल में जगह पक्की करने वाली पहली भारतीय बनीं
- आठ बार की राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर एथलीट

पिता की प्रेरणा से खेल के मैदान में पहुंचीं अन्नू रानी
किसान अमरपाल सिंह के घर 28 अगस्त 1992 को जन्मीं अन्नू रानी पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी हैं. अमरपाल सिंह ने बताया उनका भतीजा लाल बहादुर व बेटा उपेंद्र अच्छे धावक रहे हैं. वह खुद शॉटपुट खिलाड़ी रह चुके हैं.पिता की प्रेरणा से अन्नू रानी ने खेल के मैदान पर कदम रखा. वह गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थीं. शुरुआत में भाला फेंक के साथ गोला फेंक और चक्का फेंक में अभ्यास करती थीं. लेकिन आखिरकार उन्होंने भाला फेंक को अपना भविष्य चुना. परिजनों का कहना है कि अन्नू ओलंपिक से सोने का तमगा लेकर ही लौटेंगी.

किसान पिता अमरपाल सिंह बताते हैं कि वह डेढ़ लाख रुपये का भाला दिलाने में असमर्थ थे, अन्नू को पहला भाला 25 सौ रुपये में दिलाया था. जिसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की. माता मुन्नी देवी ने भी खुशी ज़ाहिर की है. अन्नू रानी का कद करीब साढ़े पांच फीट है. जबकि विदेशी महिला खिलाड़ियों का कद छह फीट से भी ऊपर है. अन्नू रानी कहा करती हैं कि भाला फेंक में दुनिया की सबसे छोटे कद की खिलाड़ी भले हों लेकिन उनका क़द ही उनकी कामयाबी की सीढ़ी भी बना है. गुरुकुल प्रभात आश्रम के स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने उन्हें 2010 में डिस्कस व गोला फेंक के बजाए भाला फेंक पर फोकस करने की सलाह दी और इसके बाद अन्नू रानी की दुनिया ही बदल गई. अन्नू को ओलंपिक का टिकट मिलने के साथ वो यूपी से खेलों के महाकुम्भ जाने वाली 13वीं खिलाड़ी हो गई हैं.

मेरठ के कई खिलाड़ियों ने किया ओलंपिक में क्वालिफाई
मेरठ से ओलंपिक जाने वाले खिलाड़ियों का रिकॉर्ड बनता जा रहा है. मेरठ की रेस वॉकर प्रियंका गोस्वामी. शूटर सौरभ चौधरी, हॉकी प्लेयर वंदना कटारिया और अब अन्नू रानी को ओलंपिक का टिकट मिल गया है. पैरा एथलीट विवेक चिकारा का भी चयन ओलंपिक के लिए हुआ है. मेरठ की बहू रहीं डिस्कस थ्रोअर सीमा पुनिया का भी ओलंपिक के लिए चयन हुआ है लेकिन इस बार उन्होंने ख़ुद को सिंगल बताया है. मेरठ की रहने वाली एथलीट पारुल चौधरी पर सबकी निगाहें हैं कि क्या वो भी आलम्पिक कोटा हासिल कर पाएगी. उन्हें लेकर एएफआई जल्द फैसला लेगा. कह सकते हैं कि यूपी इस बार टोक्यो में भारत का तिरंगा शान से ज़रुर लहराएगा.

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