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Tokyo Olympics : श्रीजेश बोले, बहुत त्याग किया, अब टोक्यो में पदक जीतकर उसे भुनाने का मौका

Tokyo Olympics : श्रीजेश बोले, बहुत त्याग किया, अब टोक्यो में पदक जीतकर उसे भुनाने का मौका

गोलकीपर पीआर श्रीजेश लगातार तीसरी बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेंगे. (Instagram)

गोलकीपर पीआर श्रीजेश लगातार तीसरी बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेंगे. (Instagram)

ओलंपिक खेलों (Olympics) में भारतीय हॉकी टीम को आखिरी पदक 1980 मॉस्को खेलों में मिला था. अब श्रीजेश (PR Sreejesh) चाहते हैं वह भारत को एक बार फिर ओलंपिक पदक विजेता बनाएं. वह लगातार तीसरी बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेंगे.

    नई दिल्ली. लगातार तीसरे और संभवत: अपने आखिरी ओलंपिक (Olympic Games) में भाग ले रहे भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी गोलकीपर पी आर श्रीजेश (PR Sreejesh) ने कहा कि उन्होंने खेल के लिए ‘काफी बलिदान दिया है’, जिसे वह टोक्यो (Tokyo Olympics) में हर कीमत पर भुनाना चाहते हैं. इस महीने 23 तारीख से शुरू होने वाले आगामी ओलंपिक में आठ बार की चैंपियन भारतीय टीम अपने चार दशक से अधिक समय के खिताबी सूखे को खत्म करना चाहेगी.

    सीनियर टीम के लिए 2006 में पदार्पण करने के बाद से श्रीजेश का केवल एक ही सपना है, ओलंपिक पदक विजेता बनना. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शामिल 35 साल के श्रीजेश ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच इतने लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद मुश्किल था. उन्होंने कहा, ‘जब आप इस तरह का त्याग करते हैं, तो मैं हमेशा उसके बाद खुद से सवाल पूछने की कोशिश करता हूं, जैसे मैं अपने बच्चों, अपने परिवार से दूर क्यों रह रहा हूं? लेकिन मुझे जवाब पता है.’

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    इस पूर्व कप्तान ने कहा, ‘हॉकी में हमारा इतिहास बहुत शानदार रहा है और जब मैं अपने करियर में पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे पता है कि मेरे पास बहुत सारे एफआईएच पदक हैं, मेरे पास लगभग हर टूर्नामेंट के पदक हैं, लेकिन विश्व कप या ओलंपिक का एक भी पदक नहीं है. यह मेरा आखिरी ओलंपिक खेल हो सकता है. मेरे लिए यह इस बारे में है कि मैं खिलाड़ी के तौर पर इससे क्या हासिल कर सकता हूं, मुझे इस ओलंपिक से क्या मिल सकता है? यह केवल एक पदक हो सकता है. यह ऐसा सपना है जिसने मुझे सब कुछ त्यागने में मदद की.’

    उन्होंने कहा, ‘यही (ओलंपिक पदक का सपना) मुझे अतिरिक्त ऊर्जा दे रहा है. यह वही है जो हमें हर सुबह अपने बिस्तर से उठने और कड़ी मेहनत करने में मदद कर रहा है. यह एक सपना है जिसे मैं पिछले 15 वर्षों से जी रहा हूं और अगले 15 वर्षों तक ऐसा करने को तैयार हूं.’ ओलंपिक में भारत को आखिरी पदक 1980 मॉस्को खेलों में मिला था.

    श्रीजेश ने टोक्यो रवाना होने से पहले कहा, ‘यह हमारे लिए भारतीय हॉकी के इतिहास का हिस्सा बनने, ओलंपिक पदक विजेता सूची का हिस्सा बनने का अवसर है और यही मुझे अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर रहा है.’

    Tags: Hockey, Olympics, Olympics 2020, Sports news, Tokyo 2020, Tokyo olympic 2020, Tokyo Olympics, Tokyo Olympics 2020

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