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टोक्यो ओलंपिक होते ही इसलिए हैं कि हॉकी में भारत का परचम लहराता रहे, 1964 का गोल्ड भूले तो नहीं!

Tokyo Olympics 2020: भारत की महिला और पुरुष हॉकी टीमें टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं. (फोटो: PTI/AP)

Tokyo Olympics 2020: भारत की महिला और पुरुष हॉकी टीमें टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी हैं. (फोटो: PTI/AP)

Tokyo Olympics 2020: भारत की महिला और पुरुष हॉकी टीमों (Indian Hockey Team) ने टोक्यो ओलंपिक 2020 के सेमीफाइनल में जगह बनाई है. इससे भारतीय खेलप्रेमियों को 1964 में हुए टोक्यो ओलंपिक गेम्स याद आ गए हैं, जब भारत ने पाकिस्तान को हराकर हॉकी का गोल्ड मेडल जीता था.

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नई दिल्ली. तो अब यह बात 16 आने साबित हो गई है कि टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) होते ही इसलिए हैं कि भारत हॉकी में अपना परचम लहराता रहे. तभी तो टोक्यो गेम्स 2020 (Tokyo 2020) भारत को उस बुलंदी पर ले जाता दिख रहा है, जो भारतीय हॉकी प्रेमियों का बरसों से सपना रहा है. सोने पर सुहागा यह कि भारत की एक नहीं, दो-दो टीमें (महिला एवं पुरुष) ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं. क्या टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) और भारतीय हॉकी (Indian Hockey) का कुछ खास रिश्ता है. यह जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा.

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भारत (India) ने ओलंपिक में 8 गोल्ड मेडल जीते हैं. एक जमाना था जब सब मानकर चलते थे कि भारतीय दल कोई मेडल लाए या ना लाए, लेकिन हॉकी टीम तो सोना बटोरकर ही लौटेगी. हॉकी टीम पर सोने सा यह भरोसा रोम में तब होम हो गया जब पाकिस्तान ने फाइनल में भारत को हरा दिया. कहने को तो हम तब भी सिल्वर लेकर लौटे थे, लेकिन यह चांदी किसी बर्बादी का संकेत दे रही थी. हॉकी टीम की 1928 से चली आ रही बादशाहत छिन गई थी. जिस भारतीय ने ना कभी हॉकी देखी थी, ना गोल्ड और ना ही मेडल, उसे भी ऐसा लग रहा था कि उसके सिर से जैसे ताज छिन गया था.

अब तो हर भारतीय को उगते हुए सूरज कहे जाने वाले देश से आस थी. जापान. चार साल बाद अगले ओलंपिक यहीं तो होने थे. साल 1964 आया और टोक्यो ने ओलंपिक की भव्य मेजबानी की. भारत के लिए उन दिनों ओलंपिक का मतलब बस हॉकी में गोल्ड जीतना हुआ करता था, जिसे 1960 में पाकिस्तान ने हमसे छीन लिया था. लेकिन टोक्यो ओलंपिक में भारत ने ओलंपिक चैंपियन का अपना खोया रुतबा फिर हासिल कर लिया. वह भी डिफेंडिंग चैंपियन पाकिस्तान को हराकर.

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टोक्यो ओलंपिक 1964 से टोक्यो ओलंपिक 2020 के बीच गंगा में बहुत पानी बह गया है. भारत ने इन 56 साल के अंतराल में यूं तो ओलंपिक गोल्ड भी जीता और विश्व कप की ट्रॉफी भी अपने नाम की. लेकिन चैंपियन वाला वह रुतबा कभी भी वापस नहीं मिला, जो 1928 से लेकर 1956 तक हमारे पास था. अब टोक्यो ओलंपिक (2020) ने भारतीय हॉकीप्रेमियों के दिल में एक बार फिर वह आस जगाई है, जो बरसों से बार-बार टूटती रही है. लेकिन इस बार कहानी कुछ और ही है.

भारतीय पुरुष टीम सेमीफाइनल में बेल्जियम से भिड़ेगी.

भारतीय पुरुष टीम सेमीफाइनल में बेल्जियम से भिड़ेगी.

भारतीय पुरुष टीम 1972 के बाद पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है. (1980 में भारत ने गोल्ड जीता था, लेकिन तब सेमीफाइनल मुकाबले नहीं हुए थे.) भारतीय महिला टीम भी पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाते हुए सेमीफाइनल में आ डटी हैं. अब 3 अगस्त को पुरुष टीम विश्व चैंपियन बेल्जियम से टकराएगी तो महिला टीम 4 अगस्त को 4 ओलंपिक मेडल जीत चुके अर्जेंटीना के सामने होगी.

भारतीय महिला टीम सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से भिड़ेगी.

भारतीय महिला टीम सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से भिड़ेगी.

भारत की दोनों टीमों ने अब तक जो खेल दिखाया है, वह बताता है कि वह दुनिया की किसी भी टीम को हराने में सक्षम है. अब सेमीफाइनल में क्या होगा, यह तो वक्त के गर्भ में है. हम जीते तो फाइनल खेलेंगे. लेकिन अगर हार गए तो.. यकीन मानिए भारतीय हॉकी टीमें तब भी चैंपियन जैसी ही होंगी. हमारी दोनों टीमों ने अब लड़ना सीख लिया है और जब आपको लड़ना आ जाए तो जीत बहुत दिन दूर नहीं रहती.

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