भारतीय एथलीटों को मनोवैज्ञानिकों ने दी भावनाओं का इजहार करने की सलाह

टोक्यो ओलिंपिक इस साल 23 जुलाई से शुरू होने हैं लेकिन फिलहाल कोरोना वायरस का असर इन खेलों पर एक बार फिर पड़ सकता है.

कोरोना वायरस के चलते कई टूर्नामेंट और खेल प्रतियोगिताएं रद्द या स्थगित करनी पड़ी हैं. ऐसे में कई खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल करने में नाकाम हो गए. मनोवैज्ञानिकों की एक समिति ने ऐसे खिलाड़ियों से भावनाओं को खुलकर इजहार करने की सलाह दी.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी का असर खेल पर भी पड़ा है. इसके चलते कई प्रतियोगिताएं रद्द हो  गई हैं जिसके कारण ओलंपिक टिकट हासिल करने में कई खिलाड़ी नाकाम हो गए. ऐसे में खिलाड़ियों में मानसिक स्वास्थ्य से जूझने की बढ़ती समस्या को देखते हुए मनोवैज्ञानिकों की एक समिति ने शुक्रवार को भावनाओं को खुल कर इजहार करने की सलाह दी.

    कई एथलीटों के साथ काम कर चुकी मुग्धा बावरे ने एक परिचर्चा में कहा, ‘खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ के मुद्दे को आमतौर पर अनदेखा किया जाता है. एथलीटों ने महामारी के दौरान जो सबसे महत्वपूर्ण बात सीखी है, वह यह कि अगर भावनात्मक रूप से अच्छा महसूस नहीं कर रहे हैं तो खुद को व्यक्त करें.’ उन्होंने कहा, ‘उन खिलाड़ियों के लिए यह दिल तोड़ने वाला है जो क्वालिफाइंग प्रतियोगिता रद्द होने से ओलंपिक टिकट नहीं हासिल कर सके, जो क्वालिफाई कर गए हैं, उनके लिए भी अनिश्चितता का माहौल एक चुनौती है.’

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    ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके एथलीटों के साथ काम कर रही संजना किरण ने इस परिचर्चा में कहा, ‘खासकर ऐसे खिलाड़ियों के लिए चीजें आसान नहीं होंगी, जिनके लिए टोक्यो में होने वाले खेल आखिरी ओलंपिक होगा.’ उन्होंने कहा, ‘टूर्नामेंटों के रद्द होने के कारण जिन खिलाड़ियों का ओलंपिक सपना चकनाचूर हुआ है, मैं उन्हें सुझाव दूंगी कि अपनी भावनाओं और निराशा को जाहिर करने के साथ समस्या के समाधान पर काम करे.’

    उन्होंने कहा, ‘इस महामारी ने खिलाड़ियों को ऐसी स्थिति में धकेल दिया जहां चीजे उनके हाथ में नहीं थी. वे हालांकि समझते हैं कि असहज और असहाय महसूस करना भी ठीक है और चीजों को सामान्य होने में थोड़ा समय लगेगा.’