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Tokyo Olympics: कुश्ती में विनेश और बजरंग पदक उम्मीद , रवि दहिया बन सकते हैं छिपे रूस्तम

एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) से टोक्यो ओलंपिक में भी काफी उम्मीदें हैं. हरियाणा के झज्जर से ताल्लुक रखने वाले बजरंग 65 किग्रा में चुनौती पेश करेंगे. वह इस वर्ग की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 पहलवान हैं. 
(Instagram)

एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) से टोक्यो ओलंपिक में भी काफी उम्मीदें हैं. हरियाणा के झज्जर से ताल्लुक रखने वाले बजरंग 65 किग्रा में चुनौती पेश करेंगे. वह इस वर्ग की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 पहलवान हैं. (Instagram)

टोक्यो ओलंपिक में भारत के सात पहलवान कुश्ती में चुनौती पेश करेंगे जिनमें से विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया पर सभी की नजरें होंगी.

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    नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक से पहले भारतीय पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है और कम से कम तीन तो पदक के प्रबल दावेदार हैं. भारत के सात पहलवान कुश्ती में चुनौती पेश करेंगे जिनमें से विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया पर सभी की नजरें होंगी. उनके अलावा अंशु और सोनम मलिक ने जूनियर से सीनियर स्तर तक तेजी से कामयाबी हासिल की है.

    बजरंग पूनिया (65 किलो) पिछले दस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने छह स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य जीता. दमखम के आधार पर जीतने वाले बजरंग के लिये ‘लेग डिफेंस’ समस्या रहा है. उन्होंने इस पर मेहनत की है लेकिन उनके भारवर्ग में चुनौती काफी कठिन होगी. रवि दहिया (57 किलो) दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम की देन है. वह तकनीक के धनी और काफी ताकतवर पहलवान हैं . उन्हें हालांकि बढ़त बनाने के बाद दबाव में होने का खामियाजा पोलैंड ओपन में भुगतना पड़ा. दीपक पूनिया जूनियर से सीनियर स्तर पर कामयाबी के साथ पहुंचे लेकिन टोक्यो ओलंपिक की तैयारी उतनी पुख्ता नहीं कही जा सकती. उन्होंने 2020 विश्व कप के बाद नहीं खेला है और पोलैंड ओपन से पहले चोट के कारण बाहर होना पड़ा.

    विनेश फोगाट (53 किलो) अपने वर्ग में स्वर्ण पदक की दावेदार है. भारवर्ग में बदलाव का भी उन्हें फायदा मिला है. वह तकनीकी कौशल की धनी है और उनमें अपार ताकत भी है. जवाबी हमलों पर अंक गंवाने से उन्हें बचना होगा. सीमा बिस्ला टोक्यो ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करके सभी को चौंका दिया है. वह बुल्गारिया में हुए टूर्नामेंट से टोक्यो का टिकट कटाने में कामयाब रही क्योंकि वहां बड़े पहलवान नहीं उतरे थे. बड़े स्तर पर अनुभव की कमी उनकी राह में रोड़ा बन सकती है. उनके वर्ग में आठ पहलवान ऐसे हैं जिनका उन्होंने कभी सामना नहीं किया. अंशु मलिक के पास खोने के लिये कुछ नहीं है. टोक्यो का अनुभव भविष्य में उनके काम आयेगा.

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    सोनम मलिक भी अंशु की तरह ‘सरप्राइज क्वालीफायर’ हैं. वह कैडेट स्तर से सीधे सीनियर स्तर पर पहुंची. घरेलू स्तर पर उन्होंने लगातार चार बार रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को हराया.

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