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हरियाणा: 19 साल से गढ़ी सांपला-किलोई सीट पर काबिज हैं भूपिंदर सिंह हुड्डा, 2 बार रहे CM

News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 8:38 AM IST
हरियाणा: 19 साल से गढ़ी सांपला-किलोई सीट पर काबिज हैं भूपिंदर सिंह हुड्डा, 2 बार रहे CM
दो बार हरियाणा के सीएम रहे हैं हुड्डा.

हरियाणा (haryana assembly elections 2019) में 21 अक्‍टूबर को होने हैं विधानसभा चुनाव. कांग्रेस (Congress) की टिकट पर फिर मैदान में हैं पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा (bhupinder singh hooda).

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  • Last Updated: October 24, 2019, 8:38 AM IST
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नई दिल्‍ली. हरियाणा (Haryana) की राजनीति में कांग्रेस (Congress) का सबसे बड़ा चेहरा हैं भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder singh hooda). हरियाणा में लगातार दो बार सीएम बनने वाले हुड्डा पहले राजनेता रहे. लेकिन पिछले पांच साल से हरियाणा की राजनीति में हुड्डा की हुंकार सुनाई नहीं दे रही है. साल 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana assembly elections) में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव में वो सोनीपत से लोकसभा चुनाव भी हार गए. हालांकि, इसके बावजूद जाटों में हुड्डा की अहमियत और वजूद को कम करके नहीं आंका जा सकता है. हुड्डा के समर्थक उन्हें भूमिपुत्र कहते हैं. भूपिंदर सिंह हुड्डा गढ़ी सांपला-किलोई से चुनाव लड़ेंगे. साल 2000 में हुड्डा ने यहां पहली बार जीत हासिल की थी. पिछले 19 साल से हुड्डा इस सीट पर अपराजेय हैं. साल 2014 में हुड्डा ने इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के सतीश नांदल को हराया था. अब सतीश नांदल बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

1972 में राजनीति में रखा कदम
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने साल 1972 में राजनीति में कदम रखा. राजनीतिक करियर की शुरुआत में वो ब्लॉक कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहे. बाद में साल 1980 से 1987 के दरम्यान वो हरियाणा प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष, पंचायत समिति के अध्यक्ष और हरियाणा की पंचायत परिषद के अध्यक्ष रहे.
साल 1991, 1996,1998 और 2004 के लोकसभा चुनाव में हुड्डा लगातार चुनाव जीते और चार बार लोकसभा के सदस्य बने. हरियाणा में हुड्डा की हुंकार को इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि उन्होंने 1991 के लोकसभा चुनाव में रोहतक से हरियाणा के पूर्व सीएम और पूर्व उप प्रधानमंत्री रहे चौधरी देवीलाल को हरा दिया था.

2005 में पहली बार बने थे हरियाणा के CM
साल 1996 से साल 2001 तक वह हरियाणा कांग्रस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं. साल 2002 से 2004 तक हुड्डा हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं. 5 मार्च 2005 को वह पहली दफे हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद 25 अक्टूबर 2009 को वह फिर से हरियाणा के मुख्यमंत्री बने.

संविधान सभा के सदस्‍य थे पिता
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15 सितंबर, 1947 को एक स्वतंत्रता सेनानी के परिवार में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का जन्म हुआ था. उनके पिता चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा भारत की संविधान सभा के सदस्य भी रहे और आजाद भारत में पंजाब सरकार के मंत्री भी रहे थे. हुड्डा को प्रशासन और राजनीति विरासत में मिले.

हुड्डा पर कांग्रेस की जीत का दारोमदार
हरियाणा में पांच साल से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव जीतना बेहद जरूरी है. जीत का सारा दारोमदार एक बार फिर भूपिंदर सिंह हुड्डा पर है क्योंकि कांग्रेस ऐसे निर्णायक मौके पर कोई चांस नहीं लेना चाहेगी. हालांकि साल 2019 का लोकसभा चुनाव पिता-पुत्र पर भारी रहा. भूपिंदर सिंह हुड्डा सोनीपत से चुनाव हार गए तो उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक से चुनाव हार गए.

इसके बावजूद कांग्रेस ने एक बार फिर हुड्डा के हाथ में हरियाणा चुनाव की कमान सौंपी है. ज़ाहिर सी बात है कि कांग्रेस ये जानती है कि हरियाणा की जनता की नब्‍ज हुड्डा बेहतर जानते हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि हुड्डा कांग्रेस की खोई सत्ता वापस लाने में क्या करिश्मा कर पाते हैं क्योंकि हुड्डा पर सिर्फ प्रदर्शन का ही दबाव नहीं है बल्कि विरोधियों से निपटने की भी चुनौती है.

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First published: October 3, 2019, 5:05 PM IST
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