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देवेंद्र फडणवीस का सियासी सफर रहा है बेदाग, 47 साल की उम्र में बने थे महाराष्‍ट्र के CM

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Updated: October 3, 2019, 6:21 PM IST
देवेंद्र फडणवीस का सियासी सफर रहा है बेदाग, 47 साल की उम्र में बने थे महाराष्‍ट्र के CM
महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री हैं देवेंद्र फडणवीस.

विदर्भ से महाराष्ट्र (maharashtra) की राजनीति में मुकाम हासिल करने वाले देवेंद्र फडणवीस (devendra fadnavis) नागपुर दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे.

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  • Last Updated: October 3, 2019, 6:21 PM IST
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नई दिल्‍ली. देवेंद्र फडणवीस (devendra fadnavis), वो नाम जो महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में बीजेपी (BJP) का उगता हुआ सूरज है और जिसने कम समय में ही अपनी सियासत को बेदाग़ और चमकदार बनाने का काम किया है. मुख्यमंत्री काल के पांच साल पूरा करने के बाद देवेंद्र फडणवीस वापसी को लेकर पक्का भरोसा रखते हैं. इस भरोसे के पीछे दरअसल एक कड़ी मेहनत का सफर छिपा हुआ है.

47 साल की उम्र में बने CM
फडणवीस की कड़ी परीक्षा का दौर उसी दिन से शुरू हो गया था जब वो महाराष्ट्र की सत्ता में मराठा दावेदारों के बीच ब्राह्मण वर्ग का प्रतिनिधित्व लेकर शीर्ष में पहुंच गए थे. साल 2014 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बीजेपी भारी बहुमत से जीती. जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस के नाम का ऐलान सबसे बड़ा सरप्राइज़ था. केवल 47 साल की उम्र में ही देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल हो गया. उनसे पहले केवल एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ही ऐसी शख्सियत रहे हैं जो कि कम उम्र में सीएम बने.

बेदाग रहा सियासी सफर

देवेंद्र फडणवीस पर पार्टी के पुरजोर भरोसे की एकमात्र वजह उनकी बेदाग़ और युवा जोश से भरी सियासी यात्रा रही. संघ से जुड़ाव विरासत में मिला जिसने उन्हें बेहद ही अनुशासनप्रिय कार्यकर्ता बनाया और संघ की दीक्षा उनके सियासी जीवन में संजीवनी साबित हुई. लेकिन सीएम पद की अहम जिम्मेदारी से पहले वो राज्य के बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी के रूप में अनुभव हासिल कर चुके थे. उन्हें स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे का करीबी माना जाता था और उनके ही समर्थन से ये मुकाम मिल सका था. गोपीनाथ मुंडे के असामयिक निधन के बाद उस खालीपन को देवेंद्र फडणवीस ने भरने का काम किया और अपने राजनीतिक कौशल से विरोधियों को साधने में कामयाब हुए. जिसके बाद उनके सीएम बनने की राह पीएम मोदी की स्वीकारोक्ति से तय हो गई.

पांच साल में चुनौतियों से सामना
राज्य के सबसे युवा सीएम बने देवेंद्र ने लोकसभा चुनाव से पहले ही मराठा आरक्षण कार्ड खेला. देवेंद्र फणडवीस के सामने बड़ी चुनौती ये थी कि कार्ड के चलते पिछड़ों का आरक्षण कहीं से भी प्रभावित न हो. उन्होंने पिछड़े वर्ग के कोटे को बिना छेड़े अगड़े वर्ग को साधने का काम किया. अगड़ों को बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है.
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बड़े फैसले भी लिए
पिछले साल मराठाओं ने आरक्षण को लेकर हिंसक आंदोलन भी किया था. जिसके बाद राज्य के 30 फीसदी मराठाओं को लुभाने के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 16 फीसदी आरक्षण देने का बिल पारित कर दिया गया. देवेंद्र फडणवीस का ये बड़ा सियासी दांव था. इसके अलावा देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के विकास का एजेंडा लेकर चल रहे हैं. उन्होंने राज्य को सूखा मुक्त करने के लिए सिंचाई व्यवस्था पर ज़ोर दिया. जलयुक्त शिवार की वजह से मौजूदा साल में सूखे में गिरावट देखी जा रही है. इसके अलावा पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने महानगरों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर दिया. देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल में छगन भुजबल की गिरफ्तारी से बड़ा संदेश भेजने की कोशिश की. लेकिन किसानों के मोर्चे पर फडणवीस सरकार का कर्जा माफ न करने वाला फैसला गैर सियासी लगता है.

1999 में नागपुर से विधायक बने
देवेंद्र गंगाधरराव फडणवीस का जन्म 22 जुलाई 1970 को नागपुर के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ. उनके पिता गंगाधर राव आरएसएस और जनसंघ से जुड़े हुए थे. वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी थे. पिता से मिली राजनीतिक विरासत और सियासी अनुभव का देवेंद्र को फायदा मिला. वो कॉलेज की पढ़ाई के दौरान एबीवीपी यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए. इसके अलावा नागपुर में संघ की शाखा से भी जुड़े. 21 साल की उम्र में देवेंद्र फडणवीस नागपुर के नगर निगम के नगरसेवक नियुक्त किए गए. साल 1997 में मात्र 27 साल की उम्र में वो मेयर बने और साल 1997 से 2001 तक महापौर रहे. साल 1999 में वो नागपुर से विधायक बने तो साल 2001 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में देवेंद्र फडणवीस नागपुर के दक्षिण पश्चिम से विधायक बने.

नागपुर दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से लड़ेंगे चुनाव
देवेंद्र लॉ से ग्रेजुएट हैं और उन्होंने एमबीए किया हुआ है. साल 2006 में उन्होंने अमृता रानाडे से शादी की. इन दोनों की एक बेटी है, जिसका नाम दिविजा फडनवीस है. अमृता रानाडे एक गैर सियासी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनके माता-पिता नागपुर में डॉक्टर हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का आगाज़ अमरावती से जन आदेश यात्रा के साथ किया. तकरीबन साढ़े चार हज़ार किमी की यात्रा के दौरान देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के तकरीबन हर इलाके, गांव और जनपद में लोगों से मिले. विदर्भ से महाराष्ट्र की राजनीति में मुकाम हासिल करने वाले देवेंद्र फडणवीस नागपुर दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे.

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First published: October 3, 2019, 6:21 PM IST
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